रांची, राज्य ब्यूरो। प्रशासन के विपरीत चलने वाले, अमूमन सरकार के किसी आदेश को नहीं मानने वाले नक्सली कहां गए, किसी को पता नहीं। कोरोना वायरस का खौफ इस कदर पसरा कि नक्सली भी भूमिगत हो गए हैं, यूं कहें तो क्वारंटाइन हो गए हैं। न तो वे अपने सुरक्षित जोन से बाहर निकल रहे हैं, न उन्हें खोजने में पुलिस ही अपनी ऊर्जा लगा रही है।

दहशत गोली, बम, बारूद का नहीं, बल्कि अदृश्य कोरोना वायरस के संक्रमण यानी कोविड-19 महामारी का है, जिससे निपटने को आज पूरी दुनिया जूझ रही है। इस वैश्विक महामारी ने सबका उद्देश्य ही बदलकर रख दिया है। सभी अपनी व दूसरों की जान बचाने की कोशिश में जुटे हैं। राज्य में 22 मार्च के बाद से अब तक नक्सली हिंसा व नक्सली गतिविधियों की एक भी सूचना नहीं। इसकी एक और भी महत्वपूर्ण वजह है। वह यह कि कोयला साइडिंग, खनन-पट्टा और विकास योजनाओं का पूरी तरह बंद हो जाना।

इसके चलते लेवी-रंगदारी के लिए होने वाली नक्सली घटनाएं पूरी तरह बंद हैं। पुलिस भी लॉकडाउन कानून का पालन कराने में जुटी हुई है। पुलिस भले ही जंगल में नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाने के लिए जमी है, लेकिन लॉकडाउन कानून का पालन अभी प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ में पिछले दिनों नक्सलियों के हमले में 17 जवानों की शहादत व 14 जवानों का गंभीर रूप से जख्मी होने की घटना के बाद से ही झारखंड की पुलिस भी सतर्क है। राज्यों की सीमा पर चौकसी भी है, लेकिन वहां भी सर्वाधिक जोर लॉकडाउन कानून का सख्ती से पालन पर दिया जा रहा है।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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