रांची, जासं । राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का अनुसांगिक संगठन भारत तिब्बत सहयोग मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष स्वामी दिव्यानंद ने कहा कि  1949-50 में तिब्बत पर चीन के  हमले और 1959 में पूरे कब्जे से पहले तिब्बत पूरी तरह एक स्वतंत्र देश था तथा भारत और चीन के बीच सुरक्षा क्षेत्र जैसा था। इससे पहले इतिहास में कभी भी किसी भी स्थान पर भारत और चीन की सीमा सांझी नहीं थी। तिब्बत पर कब्जा जमाने के बाद चीन ने तिब्बत को अपनी छावनी की तरह इस्तेमाल किया और 1962 में भारत पर हमला करके भारत की हजारों वर्गमील भूमि को हड़प लिया।

आज भारत सरकार को हिमालय की सीमा पर चीनी सेना से भारत की रक्षा के लिए और शांति बनाए रखने के लिए पांच वर्ष में कितना पैसा खर्च करना पड़ता है उतने पैसे में भारत के ऐसे हर एक नागरिक को पीने का साफ पानी, अच्छा अस्पताल, अच्छी शिक्षा हमेशा के लिए उपलब्ध कराई जा सकती है जिन्हें यह सब आज तक नसीब नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि चीन शुरू से ही भारत के साथ शत्रु की व्यवहार करता रहा है। तिब्बत के कई इलाकों को चीन अपने परमाणु कचरे के कूड़ेदान की तरह इस्तेमाल करके भारत की पवित्र नदियों को प्रदूषित करने का यह घिनौना काम कर रहा है। तिब्बत पर कब्जे से चीन और पाकिस्तान की सीमाएं आपस में मिल गई हैं इससे दोनों देशों को भारत के खिलाफ सीधे सैनिक गठजोड़ की सुविधा मिल गई है। यही नहीं भारतीय अर्थव्यवस्था को कमजोड़ करने के कारण चीन भारत में अपना माल डंप कर रहा है ताकि यहां के उद्योग धंधे समाप्त हो जाये। उन्होंने कहा कि भारत की संप्रभुता और अर्थव्यवस्था के लिए तिब्बत का आजाद होना अावश्यक है।

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप