रांची : नगर निगम क्षेत्र स्थित 53 वार्डो में कुल 56 तालाब हैं। छोटी व सहायक नदियों का अस्तित्व समाप्त हो चुका है। शहरीकरण ने नदी-नालों की चौड़ाई कम कर दी। इस कारण जलाशयों का जलस्तर भी प्रभावित हुआ है। शहर की समृद्धि जलाशयों के स्रोत को बाधित कर रही रही है।

उल्लेखनीय है कि विकास की राह में कई आलीशान मकान बन गए, तो कहीं नदी की जमीन पर बस्तियां बस गईं। वर्ष 2016 में नगर विकास विभाग की पहल पर रांची नगर निगम ने 11 तालाबों के सुंदरीकरण व जीर्णोद्धार की योजना तैयार की थी। हालांकि सुंदरीकरण के इस खेल में तालाब के चारों ओर कंक्रीट का निर्माण कर प्राकृतिक जस्रोत बंद कर दिए गए। बारिश के मौसम में जिन नालों से बरसाती पानी तालाब में प्रवेश करता था, उसे भी नगर निगम के अभियंताओं ने बंद कर दिया। अब हालात ऐसे हैं कि बारिश की बूंदों से ही तालाब के जलस्तर में वृद्धि होती है और गर्मी की आहट होते ही तालाब सूख रहे हैं।

तेतर टोली तालाब के उद्घाटन समारोह में नगर विकास मंत्री सीपी सिंह भी नायक तालाब की स्थिति को बयां करते हुए चिंतित हो उठे। उन्होंने यह भी कहा कि तालाब के जीर्णोद्धार व सुंदरीकरण की योजना से पूर्व तालाब में 12 महीने पानी भरा रहता था, जबकि सुंदरीकरण के बाद पहली बार नायक तालाब गर्मी शुरू होते ही सूख गया। मंत्री की बात सुन कार्यपालक अभियंता रंजन कुमार सिन्हा ने भी कहा था कि तेतर टोली तालाब में दो प्राकृतिक जलस्रोत हैं, जिसके कारण इस तालाब का जलस्तर जीर्णोद्धार व सुंदरीकरण के बाद भी बेहतर है। कुछ तालाबों में प्राकृतिक जलस्रोत नहीं होने के कारण गर्मी शुरू होते ही जलस्तर घटता जा रहा है।

लगातार घटती जा रही है नदियों की चौड़ाई

राजधानी की कई छोटी नदियों का अस्तित्व ही खत्म हो चुका है। कई तालाबों का नामोनिशान भी नहीं बचा है। पूर्व में शहरी क्षेत्र में कई नदिया हुआ करती थीं। हालांकि अब सिर्फ स्वर्णरेखा नदी ही बची हुई है। हरमू, जुमार, अरगोड़ा, हिनू व पोटपोटो समेत अन्य नदियों अब सिर्फ नाम के लिए ही बची हुई हैं। अधिकतर नदियां अतिक्रमण के कारण धीरे-धीरे सिमट रही हैं। सिर्फ यही नहीं बड़ी नदियों की कई सहायक नदियां पूरी तरह से सूख गई हैं, जो अब विलुप्त होने की कगार पर है। जुमार नदी रांची व आसपास के क्षेत्रों में कुछ वर्ष पूर्व तक लगभग 30 मीटर चौड़े क्षेत्र में बहती थी। हालांकि अब इस नदी का अस्तित्व भी खतरे में है। कई जगहों पर नदी की चौड़ाई महज 10 मीटर तक ही रह गई है। स्वर्णरेखा नदी का भी यही हाल है। स्वर्णरेखा नदी की चौड़ाई सरकारी खतियान में 24.46 मीटर है, जबकि हटिया व नामकुम में इस नदी की चौड़ाई अब पांच मीटर से भी कम हो गई है। पोटपोटो नदी की चौड़ाई 32 से 37 मीटर के बीच थी। अब यह 7.5 मीटर में सिमट कर रह गई है।

तालाब भरकर बन गए पुल और स्टेडियम

राजधानी के कई तालाब पूरी तरह से गायब हो चुके हैं। जेल तालाब को भर दिया गया। रांची गोशाला, गोरखनाथ भवन के निकट स्थित तालाब को भर कर पुल का निर्माण हो गया। गुटुवा स्कूल के निकट तालाब पर भी पुल निर्माण हो गया। भुतहा तालाब को भर कर स्टेडियम बना दिया गया। कर्बला चौक के निकट स्थित तालाब पर पुल का निर्माण हो गया। हेसल बस्ती तालाब को भी अभी आंशिक रूप से भर दिया गया है। गोपाल काप्लेक्स के पीछे स्थित तालाब, बार्गेन बाजार के पीछे स्थित बसुंधरा तालाब, एसटी-एससी पुलिस स्टेशन के निकट स्थित तालाब, जैलर कैंपस स्थित तालाब, प्लाजा सिनेमा के निकट स्थित तालाब, गोपाल काप्लेक्स के बगल में स्थित तालाब पूरी तरह से गायब हो चुके हैं।

Posted By: Jagran

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