रांची, राज्य ब्यूरो। Inter-Caste Marriage झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा है कि आजकल के शिक्षित युवा-युवती अपना जीवन साथी स्वयं चुन रहे हैं। संविधान की धारा 21 में ऐसा करने की स्वतंत्रता है। हर किसी को अपना जीवनसाथी चुनने का अधिकार है। अंतरजातीय विवाह से दो संप्रदायों के तनाव को कम किया जा सकता है, लेकिन पुराने विचारों वाले लोग इन बच्चों को धमका रहे हैं। अदालत ने कांके की रहने वाली सना रसीद उर्फ पम्मी की सुरक्षा मुहैया कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान उक्त टिप्पणी की है।

बहन और जीजा के घर रह रही सना रसीद

अदालत ने सना को रांची एसएसपी के यहां जाकर सारी जानकारी देने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि एसएसपी प्रार्थी की पूरी बात सुनकर उचित आदेश पारित करेंगे। जरूरत पड़ी तो कांके थाने में उसका बयान दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाए। सना रसीद की ओर झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। सुनवाई के दौरान प्रार्थी के अधिवक्ता नवीन कुमार ने अदालत को बताया कि सना रसीद अपने कांके स्थित बहन और जीजा के यहां रहती है। उसका हिंदू लड़के साथ प्रेम प्रसंग था। घर के विरोध के चलते उसने इससे किनारा कर लिया। इसके बाद उसका विवाह 52 साल की उम्र के व्यक्ति के साथ करने पर जोर देने लगे।

प्रेमी के परिजन को क्षति पहुंचाने की आशंका

इसके खिलाफ सना रसीद ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्यपाल रमेश बैस और रांची के एसएसपी को पत्र लिखकर गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। घर में शादी के दबाव को देखते हुए युवती जीजा के घर से भाग गई। अभी उसके जान को खतरा है। इसलिए उसे सुरक्षा उपलब्ध कराया जाए। युवती को यह भी डर है कि उसके परिजन उसके प्रेमी के परिजन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस पर अदालत ने रांची एसएसपी को युवती के मान सम्मान और सुरक्षा देने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने उक्त याचिका को निष्पादित कर दिया।

Edited By: M Ekhlaque

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