जागरण संवाददाता, रांची: कोकर में दुर्गा पूजा पंडाल का निर्माण केदारनाथ पर्वत के प्रारूप पर तैयार किया जा रहा है। 80 फीट ऊंचे पर्वत को पार करने के बाद श्रद्धालुओं को मां दुर्गा का दर्शन होगा। गर्भगृह को गुफानुमा बनाया जा रहा है। इसी में माता अन्य देवी-देवताओं के साथ विराजेंगी। केदारनाथ में 2013 में आए विध्वंस का भी चित्रण होगा जो कि श्रद्धालुओं के मन में रोमांच पैदा करेगा। थीम इस प्रकार तैयार की गई है कि विध्वंस के माध्यम से प्रकृति के महत्व को दर्शाया जा सके। पंडाल देखकर प्रकृति से छेड़छाड़ से होने वाले भयंकर त्रासदी से लोग रू-ब-रू होंगे। इसके निर्माण में करीब 22 लाख रुपये का खर्च होगा। पंडाल का निर्माण पश्चिम बंगाल के चंदननगर के कारीगरों द्वारा किया जा रहा है। मूर्ति एवं लाईटिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पंडाल के निर्माण में तीन दर्जन कलाकार दिन-रात जुटे हुए हैं।

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पर्वत से उतरते ही बदल जाएगा श्रद्धालुओं का चेहरा

कोकर दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष चंचल चटर्जी ने बताया कि माता के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं का चेहरा पर्वत से गुफा में उतरते ही बदल जाएगा। ऐसा लाइटिंग की कमाल से होगा। कोलकाता से विशेष लाइट मंगवाया जा रहा है। संतरंगी लाइट के प्रभाव से गुफा में प्रवेश करते ही कुछ देर के लिए आप खुद अपने चेहरे को भूल जाएंगे। हां कुछ देर के बाद सबकुछ वापस सामान्य हो जाएगा।

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1962 में एक हजार रुपये से शुरु हुई थी पूजा

कोकर में दुर्गा पूजा की शुरुआत 1962 में वर्तमान अध्यक्ष चंचल चटर्जी के पिता शंभू प्रसाद चटर्जी एवं जीजा स्व.सनत बनर्जी के प्रयास से हुआ था। पहली बार पूजा में एक हजार रुपये का खर्च आया था। उस समय भव्य मेला लगता था। दूर-दूर से लोग कोकर की पूजा देखने आते थे। वर्तमान में कोकर स्थित प्राथमिक विद्यालय परिसर में दुर्गा पूजा का आयोजन होता है।

Posted By: Jagran

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