जासं, रांची/पलामू । पलामू जिले के हुसैनाबाद स्थित दमदमी गांव के एक मरीज को बेहतर इलाज के लिए डालटनगंज रेफर करने से नाराज परिजनों व ग्रामीणों ने बुधवार को हुसैनाबाद अनुमंडलीय अस्पताल परिसर में जमकर बवाल काटा। खुद के विधायक कुशवाहा शिवपूजन मेहता का समर्थक होने का दावा कर रहे लोगों ने अस्पतालकर्मी जयप्रकाश नारायण की जमकर पिटाई कर दी जिससे वह घायल हो गए। जमकर तोड़फोड़ की।

गुंडई की हद यह कि अस्पताल में इलाजरत एक बच्चे का आक्सीजन मॉस्क निकालकर फेंक दिया। डॉक्टरों ने किसी तरह उसकी जान बचाई। हंगामे के दौरान अनुमंडल अस्पताल में कुछ समय के लिये रणभूमि सा नजारा उत्पन्न हो गया। मरीज दहशत में आ गए। जयप्रकाश के साथ मारपीट व दुर्वव्यवहार के विरोध में सभी स्वास्थ्यकर्मी हुसैनाबाद थाना को आवेदन देकर अनुमंडल अस्पताल के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए।

ओपीडी भी ठप करा दिया, सभी आरोपितों को अविलंब गिरफ्तार करने व सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की जा रही थी। इससे अनुमंडल अस्पताल का काम काज ठप हो गया। जयप्रकाश ने हुसैनाबाद थाना में दमदमी गांव निवासी मुकेश कुमार मेहता समेत अन्य के खिलाफ मारपीट करने, अस्पताल का रजिस्टर फाड़ने व गाली गलौज करने संबंधित आवेदन दिया है।

घटना की जानकारी मिलते ही हैदरनगर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के कर्मी भी अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गए। हुसैनाबाद के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी मनोज कुमार महतो ने मारपीट की कड़ी निंदा करते हुए स्वास्थ्यकर्मियों को काम पर लौटने का आग्रह किया। काफी आग्रह के बाद अस्पताल में कर्मी काम पर लौटे। पुलिस दोषियों के खिलाफ कार्रवाई में जुट गई है।

अस्‍पताल के कर्मी ने निकाला था मास्‍क : अस्पताल के कर्मी ही खुद बच्चे का ऑक्सीजन निकालकर उनके समर्थक पर आरोप मढ़ रहे हैं। जो खुद मरीज को लेकर अस्पताल गए हैं वे दूसरे का मास्क क्यों निकालेंगे। जिन पर आरोप लगाया जा रहा है उनसे सदर अस्पताल में पैसे की मांग की जा रही थी। इसका ही विरोध किया गया। अव्यवस्था के लिए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी दोषी हैं। -शिवपूजन मेहता, बसपा विधायक

रांची की जगह एंबुलेंस ने पहुंचाया लातेहार, नवजात की मौत : लातेहार जिले में जन स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ थमने का नाम नहीं ले रहा। बुधवार को एक बार फिर सदर अस्पताल में इसकी बानगी नजर आई। चंदवा सीएचसी में विजय गंझू की पत्नी सुनीता देवी ने मंगलवार की शाम दो बच्चों को जन्म दिया। बच्चों की स्थिति ठीक नहीं होने के कारण चिकित्सकों ने बच्चों की बेहतर चिकित्सा के लिए रांची रिम्स रेफर कर दिया।

प्रसूता के परिजनों ने 108 एंबुलेंस से संपर्क किया तो एंबुलेंस आ गई लेकिन रिम्स ले जाने के बदले उन्हें लातेहार सदर अस्पताल पहुंचा दिया। 108 एंबुलेंस पर बैठने के बाद परिजनों ने अस्पताल से मिली पर्ची को दिखाते हुए कहा कि उन्हें रांची रिम्स ले जाएं। लेकिन एंबुलेंस चालक ने उन्हें इलाज के लिए लातेहार सदर अस्पताल पहुंचा दिया। यहां आने के बाद सदर अस्पताल में बच्चों को भर्ती नहीं किया गया उन्हें तत्काल रांची रिम्स जाने को कहा गया।

लेकिन तब तक 108 एंबुलेंस का चालक उन्हें छोड़कर जा चुका था, इसके बाद अस्पताल ने दूसरे वाहन की मदद से उन्हें वापस चंदवा सीएसची भेज दिया। यहां बच्चों की चंदवा सीएसची में जांच की गई और अस्पताल के एंबुलेंस में फ्यूल की निश्शुल्क व्यवस्था कर उन्हें रांची रिम्स के लिए भेज दिया। लेकिन इतनी जद्दोजहद के बाद रास्ते में ही एक बच्चे की मौत हो गई।

व्यवस्था से आहत विजय के परिजनों ने चालक से कहा कि अब उन्हें कहीं नहीं जाना, वह उन्हें घर पहुंचा दे। दबाव में चालक ने उन्हें घर पहुंचा दिया। व्यवस्था की मार ने एक बच्चे की असमय जान ले ली। चालक ने अगर सही समय पर बच्चे को रिम्स पहुंचाया होता या सदर अस्पताल में बच्चे के इलाज की व्यवस्था होती तो शायद उसकी जान बच जाती। लातेहार सदर अस्पताल में चंद दिनों पूर्व बेबी वार्मर मशीन खराब होने के कारण एक नवजात बच्चे की मौत का मामला प्रकाश में आ चुका है।