रांची : केंद्रीय कोयला व रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि धनबाद-चंद्रपुरा रेल लाइन पर ट्रेनो का परिचालन नहीं किया जा सकता है। भूमिगत आग के कारण इससे जानमाल को क्षति पहुंच सकती है। हजारों व्यक्तिट्रेन से सफर करते हैं, अगर इस कारण दुर्घटना होगी तो काफी नुकसान और जानमाल की क्षति होगी। उन्होंने कहा कि धनबाद-चंद्रपुरा रेल लाइन के नए विकल्प पर काम किया जा रहा है। शनिवार को बीसीसीएल दौरे के क्रम में लोदना एरिया की नार्थ व साउथ तिसरा परियोजना में पत्रकारों से बातचीत में मंत्री ने यह बात कही।

उन्होंने कहा कि धनबाद चंद्रपुरा रेल लाइन को जल्द ही कोल कंपनी को हैंडओवर कर दिया जाएगा। इसकी प्रक्रिया चल रही है। इस मौके पर सांसद पीएन सिंह, विधायक फूलंचद मंडल, विधायक राज सिन्हा, सीसीएल सीएमडी गोपाल सिंह आदि मौजूद थे।

झरिया पुनर्वास में लाएं तेजी :

मंत्री ने कहा कि झरिया पुनर्वास को लेकर 2004 के कट ऑफ डेट पर ही सर्वे का काम किया जाएगा। कोयला मंत्री ने कहा कि जो काम चल रहा है, उसमें तेजी लाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अग्नि प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे असुरक्षित लोगों को वहां से जल्दी से हटाएं और उनके रहने के लिए उचित व्यवस्था का भी प्रबंध करें।

दैनिक जागरण के सुझाव पर मंत्री ने किया अमल, बोला भेजें प्रस्ताव इस दौरान दैनिक जागरण के पत्रकार ने मंत्री से कहा कि धनबाद से कई ट्रेनें बंद कर दी गई हैं। पारसनाथ स्टेशन पर ठहराव (कोचिंग डिपो) के लिए जगह होने के बावजूद कई जगहों के लिए सीधी ट्रेन नहीं है, जबकि वहां ट्रेनों के इंजन आसानी से बदले जा सकते हैं और बंद पड़ी ट्रेनों को शुरू किया जा सकता है। उन्होंने इस सुझाव को अच्छा बताते हुए इस पर विचार किए जाने की बात कही। उन्होंने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से भी कहा कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एक प्रस्ताव तैयार कर मंत्रालय को भेजें। उन्होंने रेल अधिकारियों से इस मामले पर विचार कर बात आगे बढ़ाने को कहा।

धनबाद-चंद्रपुरा के लिए वैकल्पिक रेलमार्ग का काम तेजी से शुरू हो: मुख्यमंत्री

राज्य ब्यूरो रांची : धनबाद-चंद्रपुरा बंद रेल लाइन के विकल्प पर अब तेजी से काम शुरू होने के आसार दिखने लगे हैं। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए तेजी से काम शुरू करने का आग्रह किया। उन्होंने कोडरमा-रांची रेललाइन को भी शीघ्र पूरा करने का आग्रह केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखा।

केंद्रीय मंत्री ने इस मुद्दे पर सकारात्मक उत्तर दिया और इसके साथ कोयले की ढुलाई में रंगदारी और गुंडागर्दी रोकने की पहल पर भी दोनों नेताओं ने सहमति जताई। इस दौरान राज्य सरकार, रेलवे और कोयला मंत्रालय के वरीय अधिकारी भी मौजूद थे।

मुख्यमंत्री आवास में केंद्रीय मंत्री से बात करते हुए मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि झारखंड से रेलवे को जितना राजस्व मिलता है उसी के अनुरूप झारखंड को सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। राज्य सरकार फॉरेस्ट क्लियरेंस व अन्य मुद्दों पर लगातार समीक्षा कर रही है।

सीएम ने कोयले की ढुलाई में रंगदारी और गुंडागर्दी के मामले पर अंकुश लगाने के लिए सुझाव दिया कि जिन कोल माइंस में संभव हो वहा रेल लाइन बिछाकर कोयले की ढुलाई की जाए। इससे रंगदारी पर काफी अंकुश लगेगा। जहा सुविधा नहीं है, वहा कनवेयर के माध्यम से कोयले को रेलवे साइट तक लाया जाए। इस पर केंद्रीय मंत्री ने अपनी सहमति जताते हुए अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

बैठक में रेल व कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि पिछली सरकारों की तुलना में झारखंड में रेलवे के क्षेत्र में 6 गुना निवेश बढ़ा है। 2014 तक जहा झारखंड में सालाना केवल 450 करोड़ का काम होता था, वह बढ़कर 2100 करोड़ पहुंच गया है। इसका असर यह है कि रेल लाइन बनाने में काम में तेजी आ गई है।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयीजी द्वारा चालू किए गए ज्यादातर प्रोजेक्ट जल्द ही पूरे हो जाएंगे। गोयल ने राची में खेल यूनिवर्सिटी में हो रहे कार्यो के लिए मुख्यमंत्री को विशेष तौर पर बधाई दी और कहा कि झारखंड के बच्चों में काफी क्षमता है। इन्हें थोड़ा सा प्रोत्साहन मिलेगा तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर झारखंड और देश का नाम रौशन करेंगे।

बैठक में झारखंड के मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी, सीएम के प्रधान सचिव सुनील कुमार वर्णवाल, खान सचिव विनय चौबे, पीसीसीएफ संजय कुमार आदि अधिकारी उपस्थित थे।

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Posted By: Jagran