रामगढ़, जागरण संवाददाता। झारखंड के रामगढ़ जिले में खेत में डीप बोरिंग के दौरान मिथेन गैस के रिसाव से अचानक आग लग गई। करीब चार घंटे तक आग की लपटें उठती रहीं। यह घटना वज्रपात के कारण हुई। आलम यह है कि अब भले ही आग बुझ गई हो, लेकिन मिथेन गैस का रिसाव जारी है। जिस जगह आग लगी है, उस इलाके से होकर गुजरने वाले पक्षियाें की मौत हो जा रही है। खास कौओं की मौत ज्यादा हो रही है। इस घटना से इलाके में दहशत का माहौल है।

वज्रपात की घटना के बाद लगी आग

बताया गया कि सीसीएल हजारीबाग एरिया के झारखंड उत्खनन परियोजना से सटे लइयो के करमाली टोला में डीप बोरिंग का कार्य चल रहा था। यह इलाका रामगढ़ जिले के मांडू प्रखंड अंतर्गत लईयो उत्तरी व लईयो दक्षिणी पंचायत में पड़ता है। यहां कई जगह अधिक मात्रा में मिथेन गैस का रिसाव अभी भी जारी है। शनिवार को तेज बारिश के दौरान वज्रपात की घटना हुई। लईयो करमाली टोल स्थित डीप बोरिंग से मिथेन गैस के रिसाव हो रहा था। इसमें आग लग गई। घटना की खबर लगते ही ग्रामीणों के बीच अफरा तफरी का माहौल कायम हो गया।

पानी के से साथ निकल रही थी आग

डीप बारिंग से पानी के साथ निकल रही आग की लपटें देखने के लिये आसपास के ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। घटना की सूचना पाकर सीसीएल की झारखंड उत्खनन परियोजना के अधिकारी घटना स्थल पहुंचे। आग की लपटें देख कर अचंभित में रह गये। करीब चार घंटे तक आग की लपटें निकलती रहीं। इसके बाद अपने आप डीप बोरिंग से निकल रही आग बुझ गई। इस मौके पर ग्रामीणों ने कहा कि लईयो के कई घरों के कुएं, हैंडपंप सहित खेतों के बंद डीप बोरिंग से गैस का रिसाव हो रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि सीसीएल प्रबंधन क्षेत्र में हो रहे गैस रिसाव को रोकने को लेकर उचित कदम नहीं उठा रहा है। प्रबंधन यहां के लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहा है।

10 फीट तक उठ रही आग की लपटें

लईयो उत्तरी पंचायत के मुखिया मदन महतो ने दैनिक जागरण को बताया कि वज्रपात के दौरान डीप बोरिंग में आग लग गई। आग की लपटें करीब दस फीट ऊंची थी। इस इलाके में कई जगह मिथेन गैस का रिसाव हो रहा है। लंबे समय से यहां के लोग परेशानी झेल रहे हैं, लेकिन सीसीएल झारखंड उत्खनन परियोजना इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। सीसीएल के पीओ व सीसीएल हजारीबाग एरिया के जीएम से कई बार इस समस्या से निजात दिलाने का आग्रह किया गया, लेकिन प्रबंधन इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है। जल्द ही प्रबंधन के खिलाफ ग्रामीण आंदोलन करेंग।

Edited By: M Ekhlaque