रांची, जासं। राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के सदस्य दिलीप के हाथीबेड उपायुक्त राय महिमापत रे के रवैए पर भड़क उठे। कहा, मैं राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग का सदस्य हूं, इसलिए कलेक्टर ने ऐसा व्यवहार किया या फिर मैं अनुसूचित जाति का हूं इसलिए? उन्होंने कहा कि वे इस मामले से प्रधानमंत्री कार्यालय व मुख्यमंत्री को आयोग के अध्यक्ष के माध्यम से अवगत कराएंगे।

हाथीबेड गुरुवार को समाहरणालय के बी ब्लॉक स्थित कमरा नंबर-505 में सफाईकर्मियों के विभिन्न यूनियनों के सदस्यों के साथ बैठक कर रहे थे। दरअसल, दोपहर दो बजे से आयोग के सदस्य ने सफाईकर्मियों के मुद्दे पर बैठक बुलाई थी। बैठक में उपायुक्त, नगर आयुक्त समेत नगर निगम के स्वास्थ्य शाखा के अधिकारियों को भी उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया था। लेकिन दो बजे तक न तो उपायुक्त पहुंचे और न ही नगर निगम के अधिकारी।

नतीजतन आयोग के सदस्य अधिकारियों की कार्यशैली पर भड़क उठे। हाथीबेड ने कहा कि उन्हें 7-8 राज्यों का दायित्व दिया गया है। यहां पर रिम्स व सिटी अस्पताल समेत कई अस्पताल हैं। ये सभी कलेक्टर के अधीन हैं। फिर भी मैं जिस वक्त यहां आया। प्रोटोकॉल के तहत उपायुक्त ने कोई शिष्टाचार नहीं निभाया। बैठक के बीच जाते वक्त भी उन्होंने मुझसे कोई अनुमति तक नहीं ली। सरकार का एक प्रोटोकॉल होता है। नगर आयुक्त भी इस बैठक में आए थे।

उन्होंने कहा कि दिल्ली लौटने के बाद इस मामले की रिपोर्ट तैयार कर आयोग के अध्यक्ष को देंगे। इस मामले की सुनवाई के लिए उपायुक्त को बुलाएंगे। वे जहां भी जाएंगे, उनपर सख्त कार्रवाई हो सकती है। वे एक आइएएस अधिकारी हैं। लेकिन उन्हें आइएएस की परिभाषा ही मालूम नहीं है। उन्होंने बताया कि सदस्य को राज्य अतिथि का दर्जा प्राप्त होता है। फिर भी उसके साथ किस प्रकार का व्यवहार किया जाता है।

मुझे लगता है कि आयोग के साथ सफाई शब्द जुड़ा हुआ है, शायद इसी वजह से इनकी मानसिकता नहीं बनी हो। मैंने महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ में मुख्य सचिव के साथ बैठक की है। भारतवर्ष में अतिथि देवो भव: के तहत अतिथि का सत्कार करते हैं। अधिकारियों का भी एक शिष्टाचार होता है। मेरे प्रोटोकॉल में भी यह शामिल है कि अधिकारियों को मेरे साथ किस प्रकार का व्यवहार करना चाहिए। - दिलीप के हाथीबेड, सदस्य, राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग, नई दिल्ली।

प्रधानमंत्री ने अपने कहा है कि किसी को गुलदस्ता नहीं देना चाहिए। जहां तक अन्य मुद्दों की बात है तो फोन पर बात करने के लिए बाहर जाना कोई गलत बात नहीं है। मैं बैठक को बाधित नहीं कर सकता। जिला प्रशासन ने इन्हें तवज्जो नहीं दी, ऐसा संभव नहीं है। शेष उनका निजी मामला है। - राय महिमापत रे, उपायुक्त, रांची।

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