रांची, जागरण संवाददाता। पूरे देश के लिए सोमवार का दिन बेहद गौरव का था। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा चंद्रयान-2 का सफल प्रक्षेपण करने पर जहां पूरा देश मारे खुशी के झूम उठा, वहीं रांची के लिए भी यह घड़ी खास गौरव का अहसास दिलानेवाली थी। चंद्रयान-2 को इसरो के श्रीहरिकोटा स्थित स्पेस सेंटर के जिस लांचिंग पैड से प्रक्षेपित किया गया, उसके निर्माण में रांची में स्थित सार्वजनिक क्षेत्र की दो बड़ी कंपनियों मेकॉन और एचईसी का अहम योगदान रहा। साल 2005 में मेकॉन ने दूसरा लांच पैड का प्रोजेक्ट पूरा कर इसरो को सौंपा था।

इसकी पूरी डिजाइन से लेकर ढांचा खड़ा करने तक के काम का पूरा प्रोजक्ट जहां मेकन ने पूरा किया वहीं हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचईसी) ने इस लांच पैड के लिए मशीनों, और उपकरणों की आपूर्ति की थी। एचईसी ने परियोजना के लिए मोबाइल लांच पैड (एमएलपी), टावर क्रेन, हॉरिजेंटल स्लाइडिंग डोर, 400 टन की ईओटी क्रेन और लांच वाहनों को रखने के लिए बनाए गए फोल्डिंग-कम-वर्टिकल प्लेटफॉर्म का निर्माण कर आपूर्ति की थी। मोबाइल लांच पेडेस्टल (एमएलपी) के निर्माण के समय इसका कुल वजन लगभग 800 टन था। साथ ही इसमें नौ मॉड्यूल लगाए गए थे, जिन्हें एचईसी में ही तैयार किया गया था। इनमें कई ढांचे रांची में ही गढ़े गए थे।

वायु दाब बनाए रखने के लिए बनाया गया था 10टन का टावर क्रेन

80 मीटर की ऊंचाई पर अंबिलिकल टावर के ऊपर लगाए गए 10 टन टावर क्रेन को वायु दबाव बनाए रखने के लिए डिजाइन किया गया था। साथ ही 47 मीटर की ऊंचाई पर चक्रीय वायु दाब को बनाए रखने के लिए हॉरिजेंटल डोर और अंतरिक्ष वाहन विधानसभा भवन की सुरक्षा के लिए भी बनाए गए थे। इस दूसरे लांच पैड से भारत ने अपने अन्य प्रतिष्ठित मिशन जैसे चंद्रयान-1 और अन्य संचार उपग्रहों को सफलतापूर्वक लांच किया है। हाल ही में, एचईसी ने फिर इसरो से 31 करोड़ रुपये के फोल्डिंग प्लेटफॉर्म और हॉरिजेंटल स्लाइडिंग डोर्स के लिए ऑर्डर हासिल किया है।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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