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    विनोद सिंह की व्हाट्सएप चैट में मिला कोड वर्ड, फाइल-फोल्डर क्या है मतलब? राज्य सरकार को रिमाइंडर भेजेगी ईडी

    Updated: Thu, 15 Feb 2024 11:01 PM (IST)

    जमीन घोटाला में ईडी ने पिछले दिनों जांच में सामने आए कुछ तथ्यों से राज्य सरकार को अवगत कराया था। ईडी ने विनोद सिंह के व्हाट्सएप चैट से भी सरकार को अवगत कराया था जिसमें ट्रांसफर पोस्टिंग में लेन-देन के लिए कोडवर्ड का इस्तेमाल किया गया था। ट्रांसफर पोस्टिंग में लाख के लिए फाइल और करोड़ के लिए फोल्डर शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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    राज्य सरकार को रिमाइंडर भेजेगी ईडी। (फाइल फोटो)

    राज्य ब्यूरो, रांची। जमीन घोटाला मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच कर रही ईडी ने पिछले दिनों जांच में सामने आए कुछ तथ्यों से राज्य सरकार को अवगत कराया था।

    ईडी ने विनोद सिंह के व्हाट्सएप चैट से भी सरकार को अवगत कराया था, जिसमें ट्रांसफर पोस्टिंग में लेन-देन के लिए कोडवर्ड का इस्तेमाल किया गया था।

    छानबीन में यह बात सामने आई है कि ट्रांसफर पोस्टिंग में लाख के लिए फाइल शब्द और करोड़ के लिए फोल्डर शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    ईडी के पत्राचार के बाद क्या कार्रवाई हुई, इसे लेकर ईडी एक बार फिर राज्य सरकार को रिमाइंडर भेजेगी। यह रिमाइंडर राज्य के मुख्य सचिव को भेजी जाएगी।

    3 जनवरी को हुई थी विनोद सिंह के ठिकानों पर छापेमारी

    तीन जनवरी को ईडी ने विनोद सिंह के ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसमें उनके ठिकाने से 25 लाख रुपये नकदी के अलावा जमीन में निवेश से संबंधित कई कागजात मिले थे।

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    ईडी ने उनके मोबाइल को भी जब्त किया था और उनके व्हाट्सएप चैट को भी निकाला था। सर्वाधिक संदिग्ध व्हाट्सएप चैट उनके व पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बीच हुए थे। उसी व्हाट्सएप चैट में ट्रांसफर पोस्टिंग से संबंधित चैट भी थे।

    35 पेज की अनुशंसा में इन बातों का जिक्र 

    सूत्रों के अनुसार, करीब 35 पेज की अनुशंसा राज्य सरकार को भेजी गई है। उसमें एक सरकारी जमीन को एक निजी व्यक्ति को स्थानांतरित करने का जिक्र है, जिसमें के लिए ढाई करोड़ रुपये नजराना के तौर पर दिए जाने की जानकारी दी गई है।

    कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों के बारे में भी सरकार को अवगत कराया गया है, जिनके माध्यम से अनियमितता की आशंका जताई गई है। कुछ टेंडर में भी गड़बड़ियों से संबंधित जानकारी भी सरकार से साझा की गई है।

    जांच के क्रम में गिरफ्तारी

    सेना के प्रयोग वाली 4.55 एकड़ जमीन की अवैध तरीके से खरीद-बिक्री मामले में अनुसंधान के दौरान ईडी ने बड़गाईं अंचल के तत्कालीन राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के ठिकानों पर भी छापेमारी की थी। इस छापेमारी में भानु के आवास से 11 ट्रंक में रखे गए जमीन से संबंधित सरकारी दस्तावेज मिले थे।

    मूल दस्तावेज में हेराफेरी का मामला भी सामने आया था। उक्त जानकारी को ईडी ने राज्य सरकार को साझा करते हुए कार्रवाई की अनुशंसा की थी।

    राज्य सरकार की अनुशंसा पर ही बड़गाईं के तत्कालीन अंचलाधिकारी मनोज कुमार के बयान पर रांची के सदर थाने में तत्कालीन राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के विरुद्ध जालसाजी की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हुई थी।

    उक्त केस को टेकओवर करते हुए ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग में केस दर्ज की और उक्त केस के जांच में ही पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी हुई। बाद में तत्कालीन राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद को इस केस में भी गिरफ्तार दिखाया गया है। उसके बाद से ही भानु से रिमांड पर पूछताछ जारी है।

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