जागरण संवाददाता, रांची : दैनिक जागरण की ओर से रांची समेत देश के 10 चुनिंदा शहरों में चल रहे माइ सिटी माइ प्राइड अभियान के तहत शनिवार को दैनिक जागरण कार्यालय में राउंड टेबल कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। कांफ्रेंस में शामिल लोगों के विमर्श में जहां राजधानी रांची शहर को शानदार सुव्यस्थित और विकसित शहरों की दौड़ में आगे लाने की ललक दिखी वहीं लगातार बदलाव और विकास कार्यों के प्रति संतोष का भाव भी दिखाई दिया। वक्ताओं ने शहर की उन खासियतों को भी गिनाया जिनपर शहरवासी गर्व करते हैं। इस दौरान कैंपेन की सिटी लिवेबिलिटी सर्वे रिपोर्ट 2018 पर भी चर्चा की गई।

उप महापौर संजीव विजयवर्गीय ने बताया कि यह बहुत सुखद स्थिति है कि अपने शहर में गर्व करने लायक एक साथ कई चीजें हैं। एक ओर जहां रांची की आबोहवा शानदार और मनमोहक है वहीं प्रकृति से मिली झील, पहाड़ और घाटियों की खूबसूरती इसे खूबसूरत शहरों की श्रेणी म लाकर खड़ा करती है। सरकार के स्तर पर शहर के सुंदरीकरण को लेकर तेजी से काम चल रहा है। पिछले तीन-चार वर्षों में यहां काफी काम हुए हैं।

डिप्टी मेयर ने कहा कि रांची के मोरहाबादी मैदान को लंदन के टाइम्स स्क्वायर की तर्ज पर विकसित किया जाना भी इन्हीं प्रयासों में एक है। इसके अलावा विश्वस्तरीय जेएससीए स्टेडियम, खेलगांव आदि कुछ ऐसे ढांचे हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल चुकी है। एचईसी क्षेत्र में विकसित की जा रही ग्र्रीन स्मार्ट सिटी भी अपने आप में अनोखी होगी। यहां स्मार्ट सिटी की सभी मानक सुविधाएं और साधन विकसित किए जा रहे हैं। कई पार्क नए बनाए गए हैं, जबकि पुराने पार्कों को संवारा गया है। करमटोली चौक में तालाब के सुंदरीकरण की इतनी शानदार योजना है कि तैयार होने के बाद शहर के घूमने योग्य सुंदर स्थानों में वह शुमार होगा। धुर्वा में बन रही ज्यूडिशियल एकेडमी, रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय आदि भी राष्ट्रीय स्तर पर शहर को नई पहचान देंगे। फुटपाथ दुकानदारों के लिए बनाए जा रहे वेंडर मार्केट को खास तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। शहर में बन रहे तीन नए फ्लाइओवर जहां शहर को एक नया लुक देंगे वहीं लोगों को जाम से भी मुक्ति दिलाएंगे। इतना ही नहीं शहर के हर गली-मुहल्ले में नाली, सड़क, स्ट्रीट लाइट, बिजली आदि के क्षेत्र में तेजी से चल रहा काम अब नजर आने लगा है। यह नई उम्मीद जगा रहा है। मुहल्ले के स्तर से शहर को सुंदर बनाने का प्रयास हो रहा है।

 

डॉक्टर केके कदम ने धुर्वा डैम जैसा और भी डैम बनाकर शहर की जलापूर्ति की क्षमता को बढ़ाने का प्रयास करने पर जोर दिया। साथ ही व्यवस्था में सुधार कर काम के सिंगल विंडो सिस्टम को जल्द से जल्द लागू करने की भी उन्होंने जरूरत बताई। इसके अलावा ड्रेनेज सिस्टम के रिट्रीटमेंट पर भी उन्होंने जोर दिया।
डॉक्टर सुनील ने शहर को और बेहतर बनाने के लिए लोगों को जनसंख्या, स्वच्छता, नागरिक जिम्मेदारी आदि को लेकर जागरूक किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने शहर में विभिन्न समूहों द्वारा किए जा रहे छोटे-छोटे सराहनीय प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए छोटे-छोटे प्राइवेट क्लीनिकों को भी सशक्त बनाने की जरूरत बताई।

प्रोफेसर विनय भगत ने विकास के लिए सभी विभागों में आपसी समन्वय को जरूरी बताया। रिम्स के अपग्रेडेशन और अन्य विकास कार्यों को उन्होंने सराहनीय बताया। कांफ्रेंस में डॉक्टर सुनील कुमार, डॉ. केके कदम, प्रोफेसर विनय भगत, डॉ. आरसी मिश्र, रंधीर कुमार सिंह, मोहम्मद अकबर, रीमा सिन्हा, सीमा मोदी, प्रशांत भगत आदि ने भी विचार रखे।

रांची अपने नागरिकों को गौरव महसूस करने के कई मौके देती है। शहर को और भी बेहतर बनाने के लिए प्रयास जारी हैं। मोरहाबादी में बन रहा टाइम्स स्क्वायर रांची को पूरे देश में एक अलग स्थान देगा। इसके लिए किया जा रहा खर्च लोगों को जल्द ही नजर आएगा। कांटाटोली, रातू रोड और हरमू में बन रहे फ्लाइओवर शहर को जाम से मुक्ति दिलाने में कारगर साबित होंगे। शहर में बनने वाला वेंडर्स मार्केट देश का इकलौता मार्केट है जहां ढेर सारी सुविधाएं एक साथ होंगी। वेंडर्स मार्केट के निचले हिस्से में फुटपाथ के लिए स्थान होगा। वहीं ऊपर के तल्ले में ऑफिस और होटल भी होंगे। निगम में ऑनलाइन सेवाओं को लगातार गति दी जा रही है। सिंगल विंडो सिस्टम विकसित किया जा रहा है। शहरवासियों का भी पूरा सहयोग मिल रहा है। स्वच्छता को लेकर जहां तेजी से शौचालय निर्माण, साफ-सफाई और जागरूकता के अलावा सिंगल विंडो सिस्टम पर लगातार काम हो रहा है।
संजीव विजय वर्गीय, उप महापौर, रांची

हर बात के लिए निगम और प्रशासन को जिम्मेवार ठहराना गलत है। अपने दायित्व को समझते हुए हम सबको आगे आना होगा। ध्यान देने वाली बात है कि 20 लाख की आबादी में केवल 1.5 लाख लोग ही टैक्स देते हैं। स्पष्ट है कि सरकार के साथ भी समस्याएं हैं। आज अगर शहर पर बीमारियों का खतरा है तो इसके लिए सरकार नहीं, हम जिम्मेवार हैं। हमें सरकार के भरोसे बैठना छोड़ कर अपने लिए कार्य करना होगा। 

डॉ. सुनील कुमार, सर्जन

शहर के विकास में अभी भी कुछ समस्याएं हैं जिनपर विचार होना चाहिए। स्मार्ट सिटी को धुर्वा डैम से पानी दिए जाने की बात तो हुई है लेकिन आज जब वह डैम एचईसी को ही नियमित सप्लाई नहीं कर पा रहा है तो स्मार्ट सिटी को पानी कैसे दे सकेगा। शहर को 24 घंटे बिजली सप्लाई करने की दिशा में भी अभी हम बहुत पीछे हैं। जाम की स्थिति ने लोगों की नाक में दम कर रखा है। इसके लिए सड़कों के चौड़ीकरण पर ध्यान देना होगा।
डॉ. केके कदम, मेडिकल एडवाइजर, एचईसी प्लांट अस्पताल

अपने शहर पर गर्व करने के लिए बहुत कुछ है। बेहतर शिक्षण संस्थानों लगातार खुल रहे हैं। अभी भी शहर में सुधार की काफी गुंजाइश है। यह बात सही है कि सभी विभाग जनता के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन उन विभागों में आपसी समन्वय की कमी है। नई बनी सड़क को टेलीफोन विभाग तोड़ देता है और वह सड़क दोबारा नहीं बन पाती है। अगर सभी विभाग साल भर के प्लान के साथ काम करें तो समन्वय के साथ सभी काम आसानी से होंगे और संसाधन की बर्बादी भी नहीं होगी। इससे लोगों को भी काफी फायदा होगा।
विनय भगत, प्रोफेसर, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी

लोगों को साफ-सफाई के प्रति जागरूक होना होगा। पानी की बर्बादी भी रोकनी होगी। अभी डेंगू और चिकनगुनिया के प्रकोप के बीच नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पाया कि जगह-जगह लोग पानी स्टोर कर कर रखे थे, लेकिन पानी की शुद्धता का कोई ख्याल नहीं रखा गया था। बिना ढके रखे गए एक-एक सप्ताह पुराने पानी में डेंगू और चिकनगुनिया के लार्वा मिले। इन चीजों के प्रति लोगों को जागरूक करना होगा।
रंधीर कुमार सिंह, बिल्डर एसोसिएशन

राजधानी में अस्पतालों की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि मरीजों को परेशान न होना पड़े। इसपर सरकार को पहल करनी चाहिए। साथ ही शहर में लोगों की मूलभूत सुविधाओं को बढ़ाया जाना चाहिए। पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को दुरुस्त करने से लेकर जाम की समस्या दूर करने तक के बारे में ठोस उपाय किए जाने चाहिए। यहां सबसे बढ़ी समस्या पानी निकासी है। इसपर सरकार को ध्यान देना चाहिए।
डॉ. आरसी मिश्र, चिकित्सक

जो इलाके बारिश में जलमग्न हो जाते हैं, उनपर खास ध्यान दिए जाने की जरूरत है। नगर निगम में ऐसी व्यवस्था बनानी होगी कि सूचना देने के थोड़ी देर बाद ही काम हो जाए। इसकी प्रभावी मॉनेटरिंग की भी व्यवस्था हो।
डॉ. बीना दुबे

युवाओं के रोजगार के लिए कौशल विकास के अलावा रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम होना चाहिए। हाल के दिनों में कौशल विकास के क्षेत्र में काफी काम हुए हैं, लेकिन रोजगार के पुख्ता और प्रभावी इंतजाम की कमी है। वेतन भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण प्रतिभाओं का पलायन हो रहा है।
प्रशांत भगत, छात्र

महिलाओं की सुरक्षा और आपराधिक घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए खास प्रयास करने होंगे। राजधानी की कानून व्यवस्था आदर्श स्तर की होनी चाहिए। व्यापारियों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए भी ठोस व्यवस्था बने। पुलिस को अपने सिस्टम को और भी प्रभावी बनाने पर विचार करना चाहिए।
आनंद गोयल, व्यवसायी

 

By Gaurav Tiwari