एक समय था जब रांची के बारे में यह कहावत मशहूर हुआ करती थी कि पीठे छउआ, माथे खांची, जब देखो तो समझो रांची। तब स्टेशन से लेकर शहर की सड़कों पर जहां-तहां ऐसी महिलाएं मेहनत-मजदूरी या व्यापार करती दिखतीं थीं जो अपने छोटे बच्चे को संभाले रखने के लिए कपड़े की एक थैलानुमा खांची पीठ में बांधकर चलती थी। उसी खांची के सहारे उसका बच्चा बंधा होता था और महिला बच्चा संभालते हुए अपना काम करती रहती थी। मेहनतकश राज्य और शहर की यह पहचान पिछले डेढ़ दशकों में काफी बदली है। 

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वर्ष 2000 में अलग झारखंड राज्य बनने के बाद पूरे राज्य समेत राजधानीवासियों की उम्मीदें भी परवान चढ़ीं। धड़ाधड़ खुलते मॉल, मल्टीप्लेक्स, शिक्षण संस्थान, बिग बाजार और रिलायंस स्टोर जैसे बड़े रिटेल बाजारों की श्रृंखला ने रोजगार और व्यापार के भी तमाम रास्ते खोले। अब राजधानी रांची में विकास की इमारत की नींव पड़ती दिख रही है।

रिटेल और कॉल सेंटर ने खोले रोजगार और व्यापार के नए रास्ते

जिस तरह से निवेश की संभावनाएं बढ़ी हैं और कंपनियां अपने कॉरपोरेट ऑफिस रांची में बना रही हैं, उसके मद्देनजर शहर को पूरी तरह विकसित करना होगा। यहां एचईसी, सीएमपीडीआइ, मेकॉन, उषा मार्टिन और सेल सरीखी महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाइयां रोजगार की प्रमुख स्रोत रही हैं। रांची ने ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, निर्माण, धातु और होजरी जैसे क्षेत्रों में हाल के वर्षों में काफी प्रगति की है।

 

 

रिटेल व्यवसाय का भी अब यहां लगातार विस्तार हो रहा है। रिलायंस, स्पेंसर से लेकर वुडलैंड, ली, एडिडास जैसी नामी-गिरामी कंपनियां शहर के हर वर्ग की जरूरतों को पूरा कर रही हैं। क्रयशक्ति में इजाफे की वजह से मैकडोनाल्ड से लेकर केएफसी और कैफे कॉफी डे तक के आउटलेट में चहलपहल रहती है। युवाओं का एक बड़ा वर्ग अब पढ़ाई के साथ-साथ कॉल सेंटर में नौकरी भी करता है।

पर्यटन और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में बढ़ीं संभावनाएं

सुहाने मौसम और मनोहारी पर्यटन स्थलों की वजह से रांची अपार संभावनाओं को अपने में समेटे हुए है। हाल के दिनों में फिल्म निर्माण को लेकर बढ़ी गतिविधियों ने फिल्म व्यवसाय का नया क्षेत्र भी यहां खोल दिया है। पतरातू क्षेत्र में बन रही फिल्म सिटी और राज्य सरकार की फिल्म नीति इससे जुड़ी संभावनाओं को धार दे रही है। 

झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कारपोरेशन के गठन के बाद यहां काफी संख्या में कलाकार अपनी फिल्म को झारखंड में फिल्माना चाहते हैं। सरकार भी उनकी मदद कर रही है। हाल के दिनों में रांची डायरीज, महेंद्र सिंह धौनी समेत तमाम बड़ी फिल्मों में रांची की धमक दिखाई दी।

फूड प्रोसेसिंग और फूलों की खेती के क्षेत्र में हैं बेहतर संभावनाएं
सब्जियों के बेहतर उत्पादन का केंद्र होने के कारण फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में भी रांची में काफी संभावनाएं हैं। इस जरूरत को सरकार ने समझा है और इस क्षेत्र में व्यापार और निवेश के रास्ते खुले। कुछ कंपनियों से समझौते भी हुए। हालांकि इसे अभी अपेक्षित धार नहीं मिल पाई है। यहां की जलवायु फूलों की खेती के लिए काफी अनुकूल है। ऐसे में फूल और उससे जुड़े व्यापार भी उद्यमियों के लिए पलकें बिछाए तैयार हैं।

पर्यटन के क्षेत्र में ढेरों अवसर
प्राकृतिक खूबसूरती को समेटे रांची में पर्यटन के क्षेत्र में भी काफी संभावनाएं हैं। ऐतिहासिक-सांस्कृतिक स्थलों से लेकर सुंदर पहाड़, झरने, झील, मंदिर, पार्क और मनोरम घाटियां पर्यटन को रोजगार के अवसर में तब्दील कर सकती हैं। आंशिक तौर पर इस क्षेत्र में रोजगार के रास्ते खुले भी हैं।

रियल एस्टेट में दिख रही उछाल

शहर में आर्थिक विकास की वजह से रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। निर्माण और रियल एस्टेट कारोबार में व्यापक उछाल देखने को मिला है. 2001 के दौरान महज 150 करोड़ रु. में सिमटा निर्माण और रियल एस्टेट कारोबार अब लगभग 4,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है। यही नहीं, इस कारोबार से प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से 40,000 लोग जुड़े हुए हैं। 

बन रहे शिक्षा के केंद्र

पहले उच्च शिक्षा के लिए रांची में सिर्फ दो यूनिवर्सिटी- रांची यूनिवर्सिटी और बिरसा मुंडा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी- हुआ करती थीं। अब इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आइआइएम), सेंट्रल यूनिवर्सिटी और सेंट्रल लॉ यूनिवर्सिटी जैसे प्रीमियर संस्थान खुलने के साथ ही यह शिक्षा का केंद्र भी बनता जा रहा है। अस्थायी भवनों में चल रहे इन संस्थानों के लिए सरकार ने जमीन मुहैया करा दी है। राज्य में खेल को प्रोत्साहन देने के लिए राजधानी में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की स्थापना की दिशा में भी काम शुरू कर दिया गया है। रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय ने भी इस इलाके को नई सौगात दी है।

बदल रही है शहर की सूरत, स्मार्ट सिटी की ओर बढ़ रहे कदम

रांची के धुर्वा में हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन की खाली जमीन पर ग्रीन स्मार्ट सिटी बनाए जाने का काम जहां जोर-शोर से चल रहा है। वहीं उसी क्षेत्र में हाईकोर्ट और विधानसभा के भवन बनकर तैयार हैं। उधर कांके इलाके को इंस्टीट्यूशनल एरिया के तौर पर विकसित करने की दिशा में काम हो रहा है। यहां नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से लेकर कई संस्थान बन रहे हैं। दर्जन भर से अधिक निजी विश्वविद्यालयों ने भी शिक्षा की एक अलग क्रांति लाई है। वहीं स्मार्ट सिटी बनने की दिशा में भी राजधानी के कदम तेजी से बढ़े हैं।

ये हैं खूबियां
राजधानी रांची के लोग सामाजिक सौहार्द की संस्कृति में यकीन रखते हैं। विविधताओं से भरा यहां का समाज परंपरा और आधुनिकता को साथ-साथ लेकर चलने में यकीन रखता है। राजधानी बनने के बाद विकास के कई रास्ते खुले। कई शिक्षण संस्थान और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी खुले। रिटेल के व्यवसाय ने भी अच्छी रफ्तार पकड़ी है।

ये हैं कमजोरी
कमजोर कानून-व्यवस्था, संकरी सड़कें, अनियोजित विकास, आधारभूत संरचनाओं के विकास की धीमी रफ्तार, शहर के कई इलाकों में पानी की कमी, बिजली की समस्या, सीमांत इलाकों के लिए विकास की योजना नहीं।

 

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By Krishan Kumar