अलग राज्य बनने के बाद कई तरह के बदलावों से गुजर रही राजधानी के लिए एक बात स्वीकार करना कतई गलत नहीं होगा कि यहां आधारभूत संरचनाओं का विकास उस स्तर पर नहीं हो सका जितना होना चाहिए था। पिछले दो-तीन वर्षों से लगातार हो रहे कार्यों का असर अब दिखने लगा है और कुछ दिनों में बदलाव स्पष्ट दिखने लगेगा।

राजधानी के लोग नए तौर-तरीकों से रूबरू होंगे और यह महसूस कर सकेंगे कि शहर में कुछ बेहतर काम भी हो रहा है। इस दौरान हम रांची की प्राकृतिक सौंदर्य को बचाकर रखने की पूरी चेष्टा करेंगे। यह प्रमाणित करने की कोशिश करेंगे कि शहर के मौलिक तत्वों से छेड़खानी किए बगैर विकास होना संभव है। 

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बड़ा होगा शहर का आकार
रांची की बढ़ती आबादी के साथ बावजूद नियोजित विकास की कमी दिखती रही है। पिछले 50 वर्षों में बस स्टैंड जस का तस है। सड़कों की चौड़ाई नहीं बदली
है। नालियां उसी हिसाब से हैं, जिस हिसाब से आज से आधी आबादी की जरूरत थी। मूल कारण रहा कि शहर का आकार किसी न किसी कारण से नहीं बढ़ा। इसे बढ़ाने की योजना को अब मूर्तरूप दिया जा रहा है।

इंटर स्टेट बस टर्मिनल को सुकुरहुट्टू में बनाने की योजना है, जिससे बस स्टैंड शहर से कम से कम 15 किमी दूर हो जाएगा। इसी प्रकार शहर से दूर ही ट्रांसपोर्ट नगर के लिए स्थान का चयन कर लिया गया है। इस प्रकार वाहनों की एक बड़ी संख्या शहर के बाहर ही रूक जाएगी। यहां से छोटे वाहनों से शहर में लोगों और सामग्रियों का आना-जाना हो सकेगा।

इस तरह से दो दिशाओं में शहर का विकास होगा जिसकी लंबाई 15-20 किमी तक होगी और समय के साथ इसी दायरे में शहर का नया स्वरूप विकसित
होगा। इसके बाद ख्याल रखना है कि सड़कें, नाली, पेयजल की व्यवस्था, बिजली जैसी आधारभूत संरचनाएं तात्कालिक नहीं बल्कि एक बड़ी आबादी को देखते हुए तैयार की जाएं।

ओवरब्रिज से नियंत्रित होगी ट्रैफिक समस्या
शहर में तीन रेल ओवरब्रिज हैं जिससे लोगों का आना-जाना तो चलता है लेकिन भीड़भाड़ वाले इलाकों से लोगों और वाहनों को निकालने में कठिनाई का सामना
करना पड़ता है। सरकार की ओर से शहर में पहला फ्लाईओवर निर्माण का काम शुरू हो चुका है। आनेवाले दिनों में और फ्लाईओवर बनेंगे, जिसके बाद एक हद तक ट्रैफिक को नियंत्रित कर लिया जाएगा।

इसके साथ ही सरकार कोशिश कर रही है कि लोगों को सार्वजनिक वाहनों से आने-जाने के लिए प्रेरित किया जाए। लो-फ्लोर बसों का संचालन इसी का हिस्सा है। दिल्ली की तर्ज पर ऐसी बसों का संचालन हो सकता है। वर्तमान में हमारे पास जो उपलब्ध सड़कें हैं, उनमें सिर्फ रिंग रोड पर ही यह बसें चल सकेंगी। इसके अलावा कुछ और चौड़ी सड़कों पर सिटी बस सर्विस की शुरुआत से ट्रैफिक स्मूथ हो सकेगी।

ट्रॉम और सोलर बैट्री चालित बसें भी होंगी
शहर के कई इलाकों में ट्रॉम और सोलर बैट्री चालित बसों के संचालन पर भी विभाग विचार कर रहा है। इससे आवागमन के सार्वजनिक वाहन बढ़ेंगे और लोगों को फायदा होगा। भीड़ से भी निजात मिलेगी।

50 हजार की आबादी पर वेंडर मार्केट डेवलप होंगे
रांची में प्रमुख शहरों पर भीड़भाड़ का प्रमुख कारण है उपभोक्ता सामग्रियों के लिए अलग-अलग इलाके में बाजार का उपलब्ध नहीं होना। रांची में सरकार 50
हजार की आबादी पर वेंडर मार्केट बनाने जा रही है जिससे मुख्य मार्गों पर खरीदारी के लिए पहुंचनेवाले लोगों को उनकी कॉलोनियों के इर्द-गिर्द ही रोका जा सके। ऐसे मार्केट में 50 से 100 दुकानें होंगी और पर्याप्त पार्किंग का भी इंतजाम होगा।

नालियां चौड़ी होंगी, नाले भी दुरुस्त होंगे
शहर में आज से 50 साल पहले के हिसाब से नालियां बनी हैं और नाले नहीं के बराबर हैं। सरकार दोनों को मजबूती से नए जमाने के हिसाब से बनाने जा रही
है। इससे स्वच्छता को लेकर आम लोगों की समस्याएं दूर होंगी। ठोस कचरा उठाव की व्यवस्था को और दुरुस्त किया जा रहा है और कचरा ढोने वाली गाड़ियों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है। रांची को साफ सुथरा रखने के लिए तमाम सुझावों पर काम किया जा रहा है।

प्राकृतिक सौंदर्य को सहेजने का जिम्मा भी
नगर विकास सिर्फ आंखें मूंदकर विकास को प्राथमिकता नहीं देता बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य को भी बचाए रखने के लिए हम प्रयासरत हैं। तालाबों से
लेकर आसपास के झरना तक बचे रहें, यह हमारा लक्ष्य है। यही कारण है कि तालाबों की पक्की घेराबंदी को रोक दिया गया है।

रांची शहर से सटे तीन डैम हैं और इन इलाकों में शहर का विकास भी तेजी से हो रहा है। यहां भी अनियोजित विकास को रोकने की कोशिश होगी ताकि डैम तक बरसात का पानी पहुंच सके। पहाड़ी और पठारों के बीच यही डैम-तालाब रांची को जीवन देते हैं तो सौंदर्य भी बढ़ाते हैं। आनेवाले कुछ वर्षों में रांची का नियोजित विकास लगभग 30 किमी के दायरे में होगा और इसी को आधार बनाकर काम किया जा रहा है।

By Nandlal Sharma