राजधानी में बिजली की स्थिति अन्य शहरों के मुकाबले बेहतर है। शहर में पावर की कमी नहीं है। जो भी थोड़ी बहुत समस्या आ रही है वो वितरण प्रणाली की वजह से है। इस दिशा में जोरों से कार्य चल रहा है। बिजली कटने के केवल दो कारण हैं - प्राकृतिक आपदा और मरम्मत कार्य। विभाग द्वारा किया जा रहा मरम्मत कार्य प्राकृतिक आपदा के प्रभाव को कम करेगा और बहुत जल्द रांची को 24 घंटे बिजली देने का वादा पूरा होगा। इसके लिए विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों में से सबसे महत्वपूर्ण है नए सबस्टेशनों का निर्माण।

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रांची में कुल छह लाख बिजली उपभोक्ता हैं, जिन्हें 53 सबस्टेशन से बिजली आपूर्ति की जा रही है। सभी सबस्टेशन पर दस गुणा ज्यादा लोड है। ऐसे में बेहतर बिजली व्यवस्था के लिए कुल 60 नए सबस्टेशन बनाए जा रहे हैं।

तारों से लेकर ट्रांसफॉर्मर तक की हो रही है बदली
केवल नए सबस्टेशन से काम नहीं चलने वाला है। सुदृढ व्यवस्था के लिए तार, पोल, इंसुलेटर और ट्रांसफॉर्मर तक बदले जा रहे हैं। पुराने और टूटे तारों को बदल कर नए तार लगाए जा रहे हैं। ये तार प्लास्टिक कवर्ड हैं, जिससे बिजली चोरी को रोकने में मदद मिलेगी। वहीं डेढ़े और टूटे पोल की भी या तो मरम्मत की जा रही है या फिर उन्हें बदला जा रहा है। लोड को देखते हुए पॉली प्रोपलीन के इंसुलेटर लगाए जा रहे हैं। ये इंसुलेटर वज्रपात में जल्दी पंक्चर नहीं होंगे।

 

दो महीनों में होगा मरम्मत कार्य पूरा 

मरम्मत कार्य को पूरा करने के लिए दो कंपनियां काम कर रही है। आरएपीडीआरपी कार्य के लिए पॉली कैब और आईपीडीएस के लिए अशोका बिल्डकॉम लगातार मरम्मत की दिशा में कार्यरत है। उम्मीद की जा रही है कि सितंबर महीने के अंत तक 90 फीसदी से अधिक कार्य हो जाएगा। बेहतर कंडक्टिंग तारों से वोल्टेज की समस्या भी दूर होगी और बिजली की आपूर्ति बेहतर होगी।

बीपीएल को मिलेगी मुफ्त बिजली
राजधानी का कोई भी घर बिना बिजली के नहीं रहेगा, जो बिजली दर चुकाने के काबिल नहीं हैं, उनके लिए भी विभाग के पास व्यवस्था है। वैसे बीपीएल परिवार जो बिजली बिल चुकाने में असमर्थ हैं, उन्हें विभाग द्वारा मुफ्त में बिजली दी जाएगी। इसकी भी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इसके अलावा एपीएल परिवारों को भी किस्त द्वारा बिजली बिजली बिल भुगतान करने की सुविधा दी जाएगी।

सेंसिटिव जोन को मिलेंगे दो फीडर
शहर के कई ऐसे इलाके हैं जहां बिजली नही रहने से अन्य कई विकराल समस्याएं उत्पन्न हुई हैं। ऐसे क्षेत्रों के लिए खास इंतजाम किए जा रहे हैं। इन्हें दो अलग फीडरों से बिजली दी जाएगी। रुक्का जलशोध को नामकुम ग्रिड से और बूटी प्लांट को हटिया से बिजली की अलग फीडर देने की तैयारियां हो चुकी है। अन्य सेंसिटिव जोन के लिए भी यही कार्य किए जाएंगे। इससे आपातकाल में यदि एक फीडर में ब्रेकडाउन हो तो दूसरे फीडर से आपूर्ति की जा सके।

पॉली प्रोपलीन के लगेंगे इंसुलेटर
बरसात के मौसम में अक्सर इंसुलेटर पंक्चर होने से समस्या होती है। इसे दूर करने के लिए शहर के सभी इंसुलेटर को बदलकर पॉली प्रोपलीन के इंसुलेटर लगाए जा रहे हैं। चीनी मिट्टी के मुकाबले ये इंसुलेटर जल्दी पंक्चर नहीं होंगे। इससे शहर में ब्रेकडाउन की समस्या से निजात मिलेगा और लोगों को बेहतर बिजली मिल सकेगी।

-धनेश झा ( महाप्रबंधक, बिजली वितरण निगम )

By Krishan Kumar