रांची, जासं। लॉकडॉउन के दौरान जुमा की तरह ही रमजान में भी नमाजे तरावीह घर पर ही अदा की जाएगी। यह फैसला एदार ए शरिया झारखंड ने लिया है। मजहबी जिम्मेदारों के अलावा शेष सभी लोगों से घर में ही नमाज अदा करने की अपील की गई है। राज्य भर के मुस्लिम समुदाय की मांग पर शुक्रवार शाम एदार ए शरिया झारखंड के काजीयाने शरीयत, मुफ्तियाने केराम, उलेमाए दीन एवं राज्य के प्रमुख प्रबुद्ध व्यक्तियों की बैठक एदार ए शरिया झारखंड के नाजिमे आला मौलाना कुतुबुद्दीन रिजवी की पहल पर हुई। बैठक की अध्यक्षता चीफ काजी-ए-शरीयत हजरत मौलाना मुफ्ती आबिद हुसैन मिस्बाही शैख उल हदीस मदरसा फैजुल उलूम जमशेदपुर ने की। 

इफ्तार के समय सिर्फ जिम्मेदार मस्जिद में रहेंगे

 बैठक में लिये गए फैसले के अनुसार रमजान उल मोबारक के पाक महीने में भी लाकडॉउन का पालन करते हुए जिस तरह पंज वक्ता और जुमा नमाज में इमाम, नायब इमाम, मोअज्जिन, नायब मोअज्जिन, खतीब एवं मुतवल्ली ही मस्जिदों में नमाज बजमाअत अदा कर रहे हैं, ठीक उसी तरह रमजान उल मोबारक के पाक महीने में अदा की जाने वाली विशेष नमाज नमाजे तरावीह भी अदा की जाएगी। उक्त मजहबी जिम्मेदारों के एलावा बाकी सभी लोग अपने अपने घरों ही में नमाजे तरावीह अदा करेंगे। इफ्तार के समय भी केवल जिम्मेदार ही मस्जिद में रहेंगे। इफ्तार हो या तरावीह उक्त जिम्मेदारों के सिवाय किसी को भी शामिल होने की इजाजत नहीं रहेगी। इसी तरह नमाजे तरावीह में पांच-छह आदमी ही हाफिजे कुरआन से खत्मे कुरआन कराना संभव हो तो कराएं।

बैठक में कोरोना की रोकथाम पर डाला प्रकाश

बैठक में कोरोना वायरस और उसकी रोकथाम की सरकारी पहल पर मौलाना कुतुबुद्दीन रिजवी ने प्रकाश डाला।  उन्होंने कहा कि केंद्र व राज्य सरकारों की ओर से 3 मई तक लाकडॉउन का विस्तार किया गया है। इस बीच रमजानुल मुबारक का पहला अशरा पड़ेगा, जिसे देखते हुए रमजान उल मोबारक  का चांद देखने, शहादत लेने, रोजा रखने, तरावीह, सेहरी, इफ्तार एवं अन्य महत्वपूर्ण विषय पर एडवाइजरी  जारी करना जरूरी है। बैठक में एजेंडे से संबंधित हर पहलू पर बारीकी से विचार विमर्श के बाद सर्वसम्मति से फैसला लिया गया।

Edited By: Alok Shahi