रांची, जासं। विश्वकर्मा पूजा पर रिम्स में करोड़ों के उपकरणों की खरीदारी की गई है। अब इससे गरीब मरीजों का निशुल्क इलाज हो सकेगा। पैथोलॉजी विभाग में जांच के साथ-साथ जर्मनी से आधुनिक सीटी स्कैन मशीन भी मंगाई गई है। इसे आज विश्वकर्मा पूजा के दिन इंस्टॉल करने की तैयारी है। पैथोलॉजी में ट्रायल के तौर पर जांच शुरू भी कर दी गई है। इसमें मरीजों को 24 घंटे के अंदर रिपोर्ट भी दी जा रही है।

पैथोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. अजय श्रीवास्तव बताते हैं कि इतने सारे उपकरणों का मिलना और वह भी विश्वकर्मा पूजा जैसे पर्व में काफी शुभ माना जा रहा है। इससे उम्मीद जताई जा रही है कि मरीजों के इलाज व जांच में कोई परेशानी नहीं होगी। नए पैथोलॉजी की शुरुआत हो गई है। यहां कई तरह की जांच फ्री में उपलब्ध कराई गई है। रिम्स प्रबंधन रिम्स के लैब में ही जांच कराएगा।

डॉ. अजय श्रीवास्तव ने बताया कि न्यू ट्रामा सेंटर के पहले तल्ले पर बने पैथोलैब को फंक्शनल बनाया गया है। यहां अत्याधुनिक उच्च गुणवत्ता वाले इक्विपमेंट्स लगाए गए हैं। इससे अब एक दिन में 3000 से अधिक जांच किया जा सकेगा। अभी तक एक दिन में 200 सैंपल की जांच हो पाती थी। मालूम हो कि जांच की लचर व्यवस्था को ठीक करने के लिए झारखंड हाई कोर्ट ने रिम्स प्रबंधन को 15 सितंबर तक का समय दिया गया था।

निजी लैब में जो जांच 500 रुपये में होती है, उस जांच के लिए रिम्स में 90 प्रतिशत से भी कम पैसा देना होगा। इसमें सीबीसी टेस्ट, लिवर फंक्शन टेस्ट, आरएफटी, थायराइड प्रोफाइल, लिपिड प्रोफाइल, यूरिया, कंपलीट हीमोग्राम जैसे 14 पैथोलोजिकल जांच किए जाएंगे। इन जांचों का प्रइइवेट में प्रत्येक टेस्ट में 150 से 250 रुपये तक मरीजों को देने पड़ते हैं। पैथोलॉजी के शुरू होने से इनमें से आधे दर्जन टेस्ट रिम्स में मुफ्त किया गया है।

रिम्स निदेशक डॉ. कामेश्वर प्रसाद ने कहा कि लैब के चालू होने से रिम्स के स्टूडेंट भी सीख सकेंगे कि‍ जांच कैसे की जाती है। रिम्स टीचिंग इंस्टिट्यूशन है। यदि यहां जांच नहीं होगी, तो स्टूडेंट सीखेंगे कैसे। इससे मरीजों को भी काफी फायदा मिलेगा। भर्ती मरीजों के सैंपल की जांच में काफी आसानी होगी और रिपोर्ट भी 24 घंटे में उपलब्ध हो सकेगा।

जर्मनी से रिम्स पहुंची नई सीटी स्कैन मशीन, मस्तिष्क की भी हो सकेगी एंजियोग्राफी

पैथोलॉजी जांच के अलावा लंबे इंतजार के बाद रिम्स में मंगलवार को एडवांस सीटी स्कैन भी मशीन पहुंच गई है। अब मरीजों को सीटी स्कैन कराने के लिए निजी जांच घर या पीपीपी मोड द्वारा संचालित लैब जाने की जरूरत नहीं होगी। जल्द ही पर्यावरण संबंधी अनुमति मिलते ही इसे इंस्टॉल कर जांच शुरू कर दिया जाएगा। राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में से सिर्फ रिम्स में हाइटेक 256 स्लाइस की यह मशीन जर्मनी से रिम्स पहुंची है। मुंबई पोर्ट में पहुंचने के बाद करीब दो सप्ताह मशीन वहीं पड़ी रही और इस बीच कस्टम क्लियरेंस का काम चलता रहा। सारे काम हो जाने के बाद इसे रिम्स के लिए रवाना किया गया।

इस हाइटेक सिटी स्कैन मशीन से सीटी स्कैन के अलावा एंजियोग्राफी भी हो सकेगी। इस मशीन से हार्ट और ब्रेन की एंजियोग्राफी करने की सुविधा होगी। निदेशक डॉ. कामेश्वर प्रसाद ने बताया कि यह अपने आप में अनोखी मशीन है। इससे कम समय में अधिक मरीजों की जांच की जा सकेगी। रिम्स निदेशक ने बताया कि सस्ती दरों पर गरीब व असहाय रोगियों को जांच की सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। मालूम हो कि यह मशीन 28 अगस्त को जर्मनी से रवाना की गई थी।

मशीन इंस्टाल करने की हो चुकी है पूरी तैयारी

निदेशक ने बताया कि नई सीटी स्कैन मशीन को ट्रॉमा सेंटर के ग्राउंड फ्लोर में इंस्टॉल किया जाएगा। इसके लिए साइट भी लगभग तैयार हो चुकी है। बिजली की व्यवस्था भी की जा चुकी है। मालूम हो कि आइसीएमआर की गाइडलाइन के अनुसार, सबसे ज्यादा जरूरत कोरोना काल में मरीजों को एचआरसीटी की पड़ी, लेकिन रिम्स में मशीन के अभाव में 80 प्रतिशत रोगियों को इससे वंचित रहना पड़ा था। अब यदि कोरोना की तीसरी लहर आएगी तो सभी संक्रमितों की जांच में आसानी होगी।

Edited By: Sujeet Kumar Suman