रांची, राज्य ब्यूरो। Jharkhand Lockdown कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखकर मुख्यमंत्री के स्तर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने वर्तमान हालात को चिंताजनक बताया और राज्य सरकार को हर संभव सहयोग का भराेसा भी दिया। हालांकि बैठक में लॉकडाउन को लेकर राजनीतिक दलों के मत अलग-अलग दिखे। सत्ताधारी झामुमो ने पूरे लॉकडाउन की बात कही तो सहयोगी कांग्रेस ने सोशल लॉकडाउन की वकालत की। भाजपा आंशिक लॉकडाउन तो वामदल लॉकडाउन लगाने के पक्ष में नहीं दिखे। 

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शनिवार को सर्वदलीय वर्चुअल बैठक में सभी राजनीतिक दलों के सुझावों का स्वागत करते हुए कहा कि हम सभी मिलकर राज्य से संक्रमण को दूर भगाने में सफल होंगे। संक्रमण के चेन को ब्रेक करने की मशक्कत में सरकार जुटी हुई है। अभी दूसरे राज्यों से प्रवासी मजदूरों का आना जारी है, महाराष्ट्र और पुणे से ट्रेन भी चली है। इसपर नजर बनाए हुए हैं। लॉकडाउन और कड़ाई से नियमों के अनुपालन के सुझाव पर भी सरकार ध्यान रख रही है। उन्होंने इस दौरान सरकार के स्तर से लिए गए कई निर्णयों की जानकारी भी दी जिसमें जैक बोर्ड की परीक्षाएं स्थगित करने की जानकारी अहम रही। मुख्यमंत्री ने जन प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि लोगों को समझाएं कि जब तक बहुत आवश्यक ना हो, अस्पताल में भर्ती ना हों, घर पर रहकर ही स्वास्थ्य लाभ लें। सरकार सभी के लिए किट उपलब्ध करा रही है।

केंद्र से सहयोग के लिए पत्र लिखने के बारे में भी बताया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश से उन्होंने केंद्रीय बलों के साथ तैनात चिकित्सकों और पारा मेडिकल कर्मियों की सेवा राज्य को उपलब्घ कराने के लिए पार्टी के शीर्ष नेताओं से बात करने का आग्रह भी किया। मुख्यमंत्री ने सभी उम्र के लोगों को टीका दिए जाने की मांग की वकालत की लेकिन यह भी जोड़ा कि इस पर केंद्र सरकार को निर्णय लेना है। इस दौरान उन्होंने सीमित संसाधनों और दवाओं की आवश्यकताओं पर भी चर्चा की। निजी अस्पतालों में साहित्यकार गिरधारी राम गौंझू को जगह नहीं मिलने के मामले की चर्चा करते हुए उन्होंने सरकारी व्यवस्था को और भी दुरुस्त करने की बात कही। उन्होंने अगले 25 दिनों में हालात सामान्य करने का लक्ष्य निर्धारित किए जाने की बात कही। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में राज्य के जाे हालात हैं वो किसी से छिपा नहीं है। सच्चाई छिप भ्ज्ञभ् नहीं सकती। हमारे पास सुविधाएं नहीं थीं जिसे हम बढ़ा रहे हैं। राज्य में आरटीपीसीआर जांच के लिए दो केंद्र और बढ़ेंगे। सैंपल कलेक्शन बड़े पैमाने पर की जा रही है और इसके लिए दाे बड़ी बास मशीनें अलग से ली जा रही हैं। इसकी आपूर्ति 15-20 दिनों में हो जाएगी। इसके लिए आर्डर जारी कर दिया गया है। 

कांग्रेस ने की आर्थिक की जगह सोशल लॉकडाउन की वकालत

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और राज्य के वित्त तथा खाद्य आपूर्ति मंत्री डा. रामेश्वर उरांव ने कहा कि आर्थिक लॉकडाउन की जगह सोशल लॉकडाउन के माध्यम से भीड़ को नियंत्रित किया जाना चाहिए। उरांव ने कहा कि मौजूदा हालात में कई संगठनों को लॉकडाउन की आशंका सता रही है, लेकिन पार्टी इसके पक्ष में नहीं है। अभी चैती छठ महापर्व हो रहा है, लोग छठ पर्व मनाएं लेकिन भीड़ किस तरह से नियंत्रित रहे, इस पर काम करने की जरूरत है। यह सुझाव भी आया है कि तीन दिन कपड़ा की दुकानें खुलें, 3 तीन हार्डवेयर की दुकानें। इससे उनका कारोबार भी चलता रहेगा और कोरोना चेन को भी तोड़ने में मदद मिलेगी। उरांव ने कोरोना जांच रिपोर्ट मिलने में विलंब होने का गलत करार दिया। उन्होंने रामगढ़ और लोहरदगा जैसे आसपास के जिलों में भी कोविड मरीजों के इलाज की व्यवस्था करने की बात कही। 

संकट की इस घड़ी में भाजपा सरकार के साथ : दीपक प्रकाश

सर्वदलीय बैठक में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने राज्य सरकार को भरोसा दिलाया है कि भाजपा इस मुश्किल दौर में पूरी मजबूती के साथ सरकार के साथ है। दीपक प्रकाश ने राज्य सरकार को कुछ सुझाव भी दिए। कहा, जिला स्तर पर हेल्प लाइन सेंटर बनाना चाहिए ताकि संक्रमित मरीज और उनके परिजनों को मदद मिल सके। आक्सीजन की कमी के लिए जिंदल व टाटा जैसी कंपनियों के साथ समन्वय स्थापति किया जाना चाहिए। दवाओं की कालाबाजारी पर रोक लगनी चाहिए। घर में इलाज की ज्यादा से ज्यादा व्यवस्था होनी चाहिए। इतना ही नहीं घरों में रहने वाले मरीजों की निगरानी राज्य सरकार के स्तर से होनी चाहिए, चिकित्सक भी ऑडियो व वीडियो के माध्यम से उन्हें सलाह दे सकें, ऐसा तंत्र विकसित किया जाना चाहिए। कुछ राज्यों ने आंशिक लॉक डाउन लगाया है, उसी तर्ज पर कोरोना की चेन तोड़ने के लिए सप्ताह में एक-दो या जितने दिन सरकार उचित समझें पहल करे। वेंटीलेटर व रेमडिसीवर इंजेक्शन की कमी को दूर करने के लिए सीधे मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी से बात की जानी चाहिए। 

कोरोना के चेन तोड़ने के लिए कंप्लटीट लॉक डाउन लगे : झामुमो

झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रीयो भट्टाचार्य ने कोरोना की चेन तोड़ने के लिए कंप्लीट लॉक डाउन की वकालत की है। सर्वदलीय बैठक में उन्होंने कहा कि कोरोना की चेन तोड़ने के लिए हमें कड़े निर्णय लेनें होंगे। कुछ जरुरी चीजों के लिए दो घंटे सुबह और दो घंटे शाम की छूट दी जा सकती है। स्वीकारा कि लॉक डाउन से जनता को परेशानी होगी लेकिन मौजूदा परिस्थिति में यह जरूरी है। यह भी कहा कि जब लॉक डाउन खुले तो वह एक साथ न खुले बल्कि धीरे-धीरे खोला जाए। कहा, कुछ लोग आपदा में भी अवसर खोज रहे हैं। कुछ निजी अस्पताल और जरुरी लाइफ सेविंग ड्रग को लेकर खेल खेला जा रहा है। सरकार को एक आडिट टीम बनाकर इसकी पड़ताल करनी चाहिए। हर निजी अस्पताल का आडिट होना चाहिए। 

जरूरत पड़ने पर पॉलिटिकल वकर्स की भी मदद ले सरकार : सुदेश महतो

आजसू के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश महतो ने महमारी के इस मुश्किल दौर में सरकार को राजनीतिक दलों की मदद लेने का सुझाव दिया है। सुदेश महतो ने इस बात पर जोर दिया कि जो संक्रमित हो गए हैं उनका बेहतर इलाज हो और किसी भी तरह से कोरोना की इस चेन को तोड़ा जाए। सुदेश ने यह भी कहा कि यदि संसाधनों की बेहतर मॉनीटिरिंग होती तो यह स्थिति नहीं आती। उन्होंने जांच की संख्या बढ़ाने का भी सुझाव दिया। उन्होंने दूसरे राज्यों से आ रहे लोगों के बिना जांच के घर चले जाने को गंभीर बताया। कहा, पिछली बार की तरह पंचायतों व स्कूलों को सेंटर बनाया जाए। 

किसने क्या कहा

सरकार सख्त कदम उठाए : कमलेश सिंह

एनसीपी के कमलेश सिंह ने कहा कि राज्य सरकार सख्त कदम उठाए, हम साथ हैं। यदि संभव हो तो शुक्रवार, शनिवार और रविवार को लॉक डाउन कर दिया जाए। संवेदनशील समय में सरकार को सीसीएल, बीसीसीएल, टाटा जैसी कंपनियों का सहयोग भी लेना चाहिए। 

लॉक डाउन समस्या का समाधान नहीं : जर्नादन प्रसाद

माले के जनार्दन प्रसाद ने कहा कि कोरोना संक्रमण की जांच रिपोर्ट एक सप्ताह में आ रही है। यह रिपोर्ट 24 घंटे में आए ऐसा प्रयास करना चाहिए। निजी अस्पतालों पर नियंत्रण करना चाहिए। हर निजी अस्पताल में एक नोडल अफसर होना चाहिए। गरीब के रोजगार और कालाबाजारी पर नियंत्रण के प्रयास भी सरकार को करने चाहिए। लॉक डाउन समस्या का समाधान नहीं है। 

चिकित्सकों व उपकरणों क कमी दूर करें : गोपीकांत बक्शी

सीपीआइएम के गोपी कांत बक्शी ने कहा कि कोरोना की इस संकट की घड़ी में खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, व रोजगार सुरक्षा लोगों को मुहैया हो। झारखंड में चिकित्सकों के साथ-साथ सीटी स्कैलन, आक्सीजन जैसे उपकरणों की भी कमी है, इन्हें दूर किया जाना चाहिए। आंगनबाड़ी केंद्रों को तत्काल बंद कर बच्चों के परिवारों को सूखा राशन मुहैया कराया जाना चाहिए। संकट की घड़ी में केंद्र सरकार को सभी राज्यों को एक संयुक्त मेमोरंडम भेजना चाहिए। 

(सीपीआइ) : सख्ती की जरुरत है लेकिन लॉक डाउन समस्या का समाधान नहीं है। राजधारी रांची जैसे जिलों जहां तेजी से कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है, वहां जरुरत समझे तो लगाया जा सकता है। रांची के दबाव को कम करने के लिए इलाज की प्रक्रिया पड़ोस के जिलों में शिफ्ट की जानी चाहिए। काेराेना की रिपोर्ट का एक सप्ताह में आना उचित नहीं है। 

(मासस) : संक्रमण के इस दौर में बेड, दवा, खाने व रोजगार की व्यवस्था को सरकार को प्राथमिकता देनी चाहिए। भीड़ पर सख्ती से नियंत्रण किया जाना चाहिए। बच्चों की शिक्षा पर भी सरकार ध्यान दें। गरीब के बच्चों के पास मोबाइल फोन कहां से आएगा।

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