रांची, जासं। घरेलू विमान सेवा शुरू होने के साथ ही रांची का बिरसा मुंडा एयरपोर्ट करीब दो महीने बाद सोमवार को फिर गुलजार हो गया। एयर एशिया का बेंगलुरु-रांची विमान सोमवार की सुबह 7:35 बजे एयरपोर्ट पर पहुंचा और 8:43 बजे बेंगलुरु के लिए रवाना हुआ। इसके बाद इंडिगो का दिल्ली-रांची विमान निर्धारित समय से एक घंटे बाद 10:07 बजे रांची पहुंचा। यह विमान 11:34 बजे दिल्ली के लिए रवाना हुआ। राज्य के मुख्य सचिव सुखदेव सिंह भी इस विमान से दिल्ली गए। 

बिरसा मुंडा एयरपोर्ट के निदेशक विनोद शर्मा ने बताया कि सोमवार को चार विमानों के आगमन व प्रस्थान का शिड्यूल प्राप्त हुआ है। एयर इंडिया का दिल्ली-रांची-दिल्ली विमान एआइ 417/418, गो एयर का दिल्ली-रांची-दिल्ली विमान जी8 167/168 व इंडिगो का मुंबई-रांची-मुंबई विमान 6ई 5316/6179 रद कर दिया गया है। सोमवार को दिन में 3:02 बजे इंडिगो का हैदराबाद-रांची विमान भी रांची पहुंचा और 3:56 बजे हैदराबाद के लिए उड़ान भरा। 

इधर, बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिड्योर) के तहत सभी व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त थी। रांची से बेंगलुरु व दिल्ली जाने वाले यात्रियों के बैगेज सैनिटाइज किए गए। फिर यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई। उसके बाद एक-एक कर यात्री ने वेब कैम के सामने खड़ा होकर अपना बोॄडग पास व आइ कार्ड दिखाया। स्क्रीन पर बोॄडग पास व आइ कार्ड का सत्यापन करने के बाद यात्रियों को एयरपोर्ट टॢमनल के अंदर प्रवेश करने की अनुमति दी गई। बाहर निकलने वाले सभी यात्रियों के हाथ पर होम क्वारंटाइन की मुहर लगाई गई।

एयर एशिया के विमान की लैंडिंग से पूर्व रांची के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) लोकेश मिश्रा व सिटी एसपी सौरभ कुमार ने स्वयं एयरपोर्ट पर यात्रियों की दी जाने वाली सुविधाओं का निरीक्षण किया। एसडीओ ने बताया कि विमान से आने वाले जो लोग 72 घंटे के अंदर वापस चले जाएंगे, उन्हेंं क्वारंटाइन करने की जरूरत नहीं है। उन्हेंं सिर्फ यह बताना है कि वे कहां जा रहे हैं और कब लौटेंगे। जबकि, शेष सभी यात्रियों को 14 दिनों तक होम क्वारंटाइन में रहना होगा।  

हवाई यात्रियों ने कहा

स्वीडन में वैज्ञानिक हूं। मार्च में गोमो आया था। यहां लॉकडाउन में फंस गया था। जाना जरूरी है। काफी काम पेंडिंग हैं। उम्मीद है कि ये सब जल्द ठीक होगा। दुनिया फिर से पहले जैसी होगी। अंकुर प्रसाद 

बेंगलूरु से आ रही हूं। वहां एक न्यूज एजेंसी में काम करती हूं। मेरे पिता की तबीयत बहुत ज्यादा खराब है। इसलिए आना जरूरी था। कोरोना से निपटने को लेकर एयरपोर्ट पर काफी तैयारी है।- रुचि। 

दो महीने से बेंगलुरु में अकेले फंसा हुआ था। वहां कोरोना को लेकर प्रशासन बेहद सख्त है। आप यूं ही बेवजह कहीं नहीं निकल सकते हैं। वहां के लोग भी कांशस हैं। फिजिकल डिस्टेंस का काफी ध्यान रखा जाता है।- मनोज। 

दिल्ली से आ रही हूं। इससे पहले ट्रेन से आने की कोशिश की थी, लेकिन सफल नहीं हो पाई थी। एयरपोर्ट पर बोॄडग पास वाली जगह पर भीड़ लग जाती है। शारीरिक दूरी के नियमों का पालन नहीं हो रहा है। इस पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है। - प्राची सिंह

बेंगलुरु में जॉब करता हूं। बड़ी मुश्किल से दो महीने गुजरे हैं। यहां मेरा परिवार फंसा हुआ था। हवाई सेवा बहाल हुई है, तब जाकर आना संभव हो पाया है। उम्मीद है फिर से सब ठीक हो जाएगा।- विकास कुमार। 

दो बार फ्लाइट की टिकट कटा चुका था। दोनों बार कैंसल हो गई थी। तीसरी बार टिकट कटाने के बाद यहां पहुंचा हूं। लोगों में डर का माहौल है। कोरोना ने सब एकदम से बदल कर रख दिया है।- आनंद मोहन शर्मा। 

इससे पहले ट्रेन तथा फ्लाइट दोनों से आने की कोशिश कर चुकी थी। तीन बार प्रयास व्यर्थ हो चुका है। हालांकि मुझे जमशेदपुर जाना है, लेकिन रांची आकर ही लग रहा है कि घर पहुंच गई हूं।-अंकिता सिंह। 

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