रांची, जासं। दुमका राजभवन में सीएम विजिट के दौरान बीएसएनएल सेवा ठप रहने के कारण थाने के हाजत में रातभर प्रभारी टीडीएम और कनीय अभियंता को रखे जाने की घटना को बीएसएनएल के मुख्य महाप्रबंधक झारखंड केके ठाकुर ने दुखद बताया है। उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी के साथ ऐसा व्यवहार निराशाजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि हमने कड़ी आपत्ति जताते हुए इस घटना के बाद राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर जांच व कार्रवाई करने की मांग की है। बीएसएनएल स्टाफ का प्रतिनिधिमंडल भी मुख्य सचिव से इस संबंध में मिलकर जल्द ही उन्हें ज्ञापन सौंपेगा। मुख्य महाप्रबंधक ने कहा कि तकनीकी दिक्कत कहीं भी कभी भी आ सकती है, लेकिन इस कारण से कानून हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है।

हमलोग इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि वहां दुमका-जामताड़ा, दुमका-भागलपुर और दुमका-धनबाद की तीन फाइबर लाइन उपलब्ध होने के साथ पीजीसीएल की प्राइवेट लिंक भी होने के बावजूद सेवा क्यों लंबे समय तक ठप थी। ठाकुर ने सवाल उठाया कि वहां प्राइवेट ऑपरेटरों की सेवा भी ठप थी, लेकिन उनके अफसरों को न तो तलब किया गया ना ही उनसे पूछा गया। अधिकारियों का अपराध गिरफ्तार करने लायक या हिरासत में रखने लायक नहीं था। 

यूनियन ने पीएम को लिखा पत्र, कार्रवाई की मांग : भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के यूनियन ने दुमका में पिछले दिनों कमजोर नेटवर्क की वजह से सीएम के निर्देश पर बीएसएनएल के दो अधिकारियों को रात में पांच घंटे तक थाने में बैठाने व प्रताडि़त करने की निंदा करते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

ऑल यूनियन एंड एसोसिएशंस आफ बीएसएनएल (एयूएबी) के अध्यक्ष चंदेश्वर सिंह व कन्वीनर पी अभिमन्यु की ओर से प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि दोनों इंजीनियर को रात भर थाने में बैठाए रखा गया। इस दौरान उनसे गाली गलौज की गई। उन्हें थाने में काफी जलालत झेलनी पड़ी। अधिकारियों के साथ ऐसा व्यवहार मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

पत्र में यूनियन नेताओं ने जिक्र किया है कि संचार मंत्री रविशंकर  प्रसाद व प्रधानमंत्री जी आप खुद कई बार निजी ऑपरेटरों को कमजोर नेटवर्क व कॉल ड्राप की समस्या को लेकर कह चुके हैंं। इसके बावजूद समस्या बरकरार है। बीएसएनएल में यह समस्या कम है। उसके बावजूद इस तरह बीएसएनएल के अधिकारियों को प्रताडि़त करना सही नहीं है।

इस पूरे प्रकरण में प्रताडि़त करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। देश भर में फैले बीएसएनएल के कर्मचारियों में इसे लेकर आक्रोश है। पत्र की प्रति गृह मंत्री राजनाथ सिंह, संचार राज्यमंत्री मनोज सिन्हा, टेलीकॉम सचिव अरुण सुंदरराजन व बीएसएनएल के सीएमडी अनुपम श्रीवास्तव को भी भेजी गई है।

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Posted By: Alok Shahi