रांची, राज्य ब्यूरो। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद की कमान फिलहाल अगले एक-दो माह लक्ष्मण गिलुवा के पास ही रहेगी। माना जा रहा है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद होने वाले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही झारखंड में भी सांगठनिक बदलाव होगा। गिलुवा को बनाए रखना भाजपा की मजबूरी भी है क्योंकि उनके हटाए जाने के साथ ही पूरी कार्यसमिति स्वत: भंग हो जाएगी।

बता दें कि प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा ने 25 दिसंबर को विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार की जिम्मेदारी लेते हुए प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। गिलुवा के इस्तीफे को केंद्रीय नेतृत्व के स्तर से नामंजूर कर दिया गया है। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव (फरवरी के मध्य में संभावित) के बाद ही प्रदेश संगठन के बारे में कोई निर्णय लिया जाएगा।

हालांकि राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में गिलुवा मत का मोल होगा या नहीं, इसे लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी की मानें तो चूंकि वे इस्तीफा दे चुके हैं इसलिए वे राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में भाग नहीं ले सकेंगे। यहां यह भी बता दें कि झारखंड में भाजपा के प्रदेश संगठन का कार्यकाल अगस्त में ही पूरा हो चुका है। विधानसभा चुनाव के कारण संगठन की चुनाव प्रक्रिया को फिलहाल लंबित रखा गया था। 

विधायक दल के नेता को लेकर बना हुआ है सस्पेंस

भाजपा में विधायक दल के नेता को लेकर सस्पेंस अब भी बना हुआ है। पार्टी ने अब तक विधायक दल की बैठक नहीं बुलाई है। विधायक दल की बैठक में ही आम सहमति से नेता का चुनाव किया जाता है। पार्टी सूत्रों की मानें तो विधायक दल के नेता के तौर पर यदि पेंच नहीं फंसा तो नीलकंठ सिंह मुंडा का नाम लगभग तय है सिर्फ औपचारिकता पूरी की जानी है। विधायक जिन दिन भी एकत्रित हो जाएंगे, नेता का चुनाव हो जाएगा। 

पांच को सीएए को लेकर भाजपा की कार्यशाला 

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर भाजपा ने अपने सांसदों, विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों के लिए रविवार को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया है। कार्यशाला में सीएए को लेकर पार्टी के स्टैंड को स्पष्ट करने के साथ ही इसके तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। कयास लगाए जा रहे हैं कि कार्यशाला के बाद विधायकों के साथ औपचारिक बैठक की जा सकती है जिसमें विधायक दल के नेता का चुनाव किया जा सकता है। 

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