यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 16, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Jharkhand News: वकालत छोड़ कारोबार करने वालों का रद होगा लाइसेंस... स्टेट बार काउंसिल ने वकीलों की मांगी सूची
Jharkhand News झारखंड स्टेट बार काउंसिल ने सभी जिला बार संघों को पत्र भेजकर ऐसे अधिवक्ताओं की सूची मांगी है ...और पढ़ें

रांची, राज्य ब्यूरो। झारखंड स्टेट बार काउंसिल ने सभी जिला बार संघों की निगरानी कमेटी से ऐसे वकीलों को पहचान कर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है, जो लाइसेंस लेने के बाद वकालत के बदले दूसरा कारोबार कर रहे हैं। ऐसा करने वालों का अब लाइसेंस रद किया जाएगा। झारखंड बार काउंसिल ने राज्य के सभी बार संघों के अध्यक्षों और सचिवों को पत्र भेज कर इस संबंध में वकीलों की सूची उनके निबंधन संख्या के साथ मांगी है, ताकि ऐसे लोगों के खिलाफ बार काउंसिल के नियमों के अनुसार उन पर कार्रवाई की जा सके।
सचिव ने जिला बार संघों को भेजा पत्र
काउंसिल के सचिव ने सभी बार संघों को इस संबंध में पत्र भेजा दिया है। बार काउंसिल के माडल नियम के तहत सभी बार संघों को पूर्व में ही एक निगरानी कमेटी का गठन करने को कहा गया था। इस कमेटी में संबंधित बार संघ के तीन सदस्यों को शामिल करने का प्रविधान है। कमेटी को हर साल इस तरह के वकीलों की पहचान कर रिपोर्ट भेजने का प्रविधान है। जिन संघों में अभी तक कमेटी का गठन नहीं किया गया है, वहां यथाशीघ्र कमेटी गठित करने का निर्देश दिया गया है।
इसलिए बार काउंसिल ने उठाया यह कदम
काउंसिल के अनुसार बार काउंसिल से निबंधन के बाद कई वकील अपना निजी कारोबार करते हैं। वह नियमित कोर्ट नहीं जाते, लेकिन बार संघों के चुनाव में शामिल होते हैं। इनका उद्देश्य बार काउंसिल के कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेना होता है। इससे काउंसिल को नुकसान होता है। ऐसे वकीलों की पहचान कर उनका लाइसेंस रद किया जाएगा। वहीं, बार काउंसिल ने हर याचिका में 15 रुपये का एडवोकेट वेलफेयर स्टांप लगाना अनिवार्य कर दिया है। निगरानी कमेटी को इस मामले की भी जांच करने को कहा गया है। जो लोग स्टांप नहीं लगा रहे हैं उनके नाम और निबंधन संख्या भी बार काउंसिल ने मांगी है।
वरीय अधिवक्ता के चयन समिति से महाधिवक्ता को हटाने की मांग
उधर, झारखंड एडवोकेट एसोसिएशन ने महाधिवक्ता राजीव रंजन को वरीय अधिवक्ता उपाधि प्रदान करने वाली कमेटी से हटाए जाने की मांग की है। इसके लिए एडवोकेट एसोसिएशन की कार्यकारिणी की बैठक हुई। जिसमें बहुमत से पारित प्रस्ताव के आधार पर एसोसिएशन के महासचिव नवीन कुमार ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डा. रवि रंजन को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि महाधिवक्ता राजीव रंजन के खिलाफ आपराधिक अवमानना का मामला झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए लंबित है। एकल पीठ ने माना है कि प्रथम दृष्टया महाधिवक्ता के खिलाफ आपराधिक अवमानना का मामला बनता है। वरीय अधिवक्ता के चयन के लिए बनी चयन समिति के सदस्य के रूप में उन्हें नहीं रखा जा सकता है। वरीय अधिवक्ता की उपाधि दिए जाने के संबंध में महाधिवक्ता निर्णय लेने के योग्य नहीं हैं।
