-हत्या के साथ-साथ अपहरण, साक्ष्य छिपाने का माना गया दोषी

-सिमडेगा में एडीजे की अदालत तीन जुलाई को सुनाएगी सजा

-26 नवंबर 2014 को स्कूल से अगवा कर की गई थी हत्या

-इस मामले में अर्से से जेल में बंद हैं एनोस, जा सकती है विधायकी जागरण संवादददाता, सिमडेगा : एडीजे नीरज कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने पारा शिक्षक मनोज कुमार की हत्या मामले में पूर्व मंत्री सह कोलेबिरा विधायक एनोस एक्का को दोषी करार दिया है। उन्हें हत्या करने, साक्ष्य छुपाने, हत्या के उद्देश्य से अपहरण करने तथा चुनाव अवधि में राजनीतिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए अपराध करने के साथ-साथ 27 आ‌र्म्स एक्ट के तहत दोषी पाया पाया गया। कोर्ट ने उपरोक्त मामले में सजा के लिए तीन जुलाई की तारीख मुकर्रर की है। वर्ष 2014 में 26 नवंबर को पारा शिक्षक मनोज कुमार को उनके स्कूल से अगवा कर लिया गया था। बाद में उनका शव दूसरे दिन स्कूल के पास से बरामद हुआ था। पुलिस ने इस मामले में 26 नवंबर की रात करीब डेढ़ बजे कोलेबिरा विधायक एनोस एक्का को उनके ठाकुरटोली आवास से गिरफ्तार किया था।

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उग्रवादी से बातचीत कर फंसे थे एनोस :

इस मामले में विधायक एनोस के पुलिस गिरफ्त में आने की कहानी भी दिलचस्प है। दरअसल पुलिस ने पूर्व से ही पीएलएफआई उग्रवादी विक्रम उर्फ बारूद गोप के मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर रखा था। पुलिस के अनुसार घटना वाले दिन भी विधायक एनोस एक्का ने मोबाइल से विक्रम गोप से बात कर उससे पारा शिक्षक की हत्या की जिम्मेवारी लेने को कहा था। पुलिस ने इसी बातचीत को आधार मानकर विधायक को गिरफ्तार किया था। बातचीत के टेप को पुलिस ने कोर्ट में भी मजबूत साक्ष्य के रूप में पेश किया था।

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अदालत के निर्देश के बाद भी नहीं दिया था वॉयस सैंपल :

बातचीत के टेप से मिलान करने के लिए विधायक ने न सिर्फ पुलिस अनुसंधान में वॉयस सैंपल देने से इन्कार किया, बल्कि न्यायालय के आदेश के बावजूद उन्होंने वॉयस सैंपल नहीं दिया। इसके बाद पुलिस गिरफ्त में आए विक्रम गोप ने सरकारी गवाह बनने के लिए कोर्ट में आवेदन दिया, जिसे स्वीकार कर लिया गया। बाद में विधायक एनोस एक्का के वकील ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। हालांकि हाई कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा विक्रम को सरकारी गवाह बनाए जाने के निर्णय को सही ठहराया।

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सरकारी गवाह बनने के बाद भी मुकर गया विक्रम गोप :

इस मामले में पांच जून को विक्रम गोप का बयान होटवार जेल से वीडियो कांफेंसिंग के माध्यम से दर्ज कराया गया। हालांकि सरकारी गवाह बनने के बाद भी उसने घटना के प्रति अनभिज्ञता जाहिर की। इस प्रकार उसने क्षमादान शर्त का भी उल्लंघन किया। अब उसके विरुद्ध भी विधिवत ट्रायल चलेगा। इसके बाद कोर्ट ने अन्य साक्ष्य एवं गवाहों के आधार पर विधायक एनोस एक्का को दोषी करार दिया। इस दौरान विधायक एनोस एक्का को भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से होटवार जेल से पेश किया गया।

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हो सकती है आजीवन कारावास तक की सजा :

जानकारों की मानें तो उपरोक्त मामले में विधायक को आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। वे हत्या, अपहरण, साक्ष्य छिपाने जैसे गंभीर मामलों में दोषी करार दिए गए हैं। अगर उन्हें दो वर्ष से अधिक की सजा होती है तो उनकी विधायकी छिन जाएगी।

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तीन की जा चुकी है विधायकी :

इस विधानसभा कार्यकाल में अलग-अलग मामलों में दो वर्ष से अधिक की सजा पाने के बाद तीन विधायकों की सदस्यता खत्म हो चुकी है। इनमें लोहरदगा के आजसू विधायक कमल किशोर भगत, सिल्ली के झामुमो विधायक अमित महतो और गोमिया के झामुमो विधायक योगेंद्र महतो शामिल हैं। इन तीनों सीटों पर उपचुनाव हो चुके हैं। झामुमो ने अपनी सीटें बरकरार रखी तो कांग्रेस ने आजसू से उसकी सीट छीन ली थी।

Posted By: Jagran