रांची, राज्य ब्यूरो। झारखंड पुलिस की दबिश के कारण ही माओवादियों का पारसनाथ-सारंडा कॉरिडोर एक साल से ध्वस्त पड़ा है। प्रशांत बोस उर्फ किशन दा इसी कॉरिडोर का उपयोग करता था। इस पर झारखंड पुलिस की नजर थी। इस कॉरिडोर में पारसनाथ, झूमरा, दशम, रायसिंदरी, जांब्रो, कोल्हान होते हुए नक्सलियों के 200-300 सदस्य एक बार में सारंडा से आना-जाना करते थे। इसी कॉरिडोर से नक्सली झारखंड से ओडिशा में भी प्रवेश कर जाते थे। पिछले एक साल से किशन दा कॉरिडोर जैसा नहीं, बल्कि सामान्य व्यक्ति की तरह पालकी से आना-जाना करता था। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अगर कॉरिडोर मूवमेंट होता, तो किशन दा की गिरफ्तारी नहीं हो पाती।

सम्मान के साथ की जा रही पूछताछ, ली जा रही माओवादियों के प्लान की जानकारी

किशन दा से झारखंड पुलिस की विशेष टीम पूरे सम्मान के साथ पूछताछ कर रही है और माओवादियों के प्लान की जानकारी ले रही है। झारखंड में इससे पहले वर्ष 2002 में माओवादियों के शीर्ष नेता सेंट्रल कमेटी सदस्य नथूनी मिस्त्री उर्फ पारस नाथ को गिरफ्तार किया गया था। उससे पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की, तो उसने कोई जानकारी नहीं दी थी। तब पुलिस ने उसे माओवादियों के राजा के रूप में सम्मान दिया। लजीज व्यंजन खाने को दिया और पूरे सम्मान के साथ जानकारी ली, तो उसने एक-एक कर कई राज खोले थे। सका पुलिस को लाभ भी मिला था। इसलिए इस बार भी उसी तरह से किशन दा से पूछताछ की जा रही है, ताकि पुलिस को माओवादियों के प्लान की पूरी जानकारी मिल सके।

डीजीपी नीरज सिन्हा के नाम एक और बड़ी उपलब्धि

एक करोड के इनामी पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस उर्फ किशन दा की गिरफ्तारी संयुक्त बिहार से लेकर अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है। इसके अलावा डीजीपी नीरज सिन्हा के नाम एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। उन्होंने वर्ष 1999 में बक्सर के एसपी रहते हुए माओवादियों के बड़े नेता सेंट्रल कमेटी सदस्य विजय कुमार आर्य को पकड़ा था। इसके बाद वर्ष 2002 में रांची के एसएसपी रहते हुए उन्होंने लातेहार के बरवाडीह से झारखंड के सबसे बड़े माओवादी नेता सेंट्रल कमेटी सदस्य नथूनी मिस्त्री उर्फ पारसनाथ को दबोचा था।

नथूनी मिस्त्री पर तब 25 लाख का इनाम (अब सेंट्रल कमेटी सदस्य पर एक करोड़ का इनाम रखा जाता है) था। तब पूरे देश में सिर्फ पांच ही सेंट्रल कमेटी सदस्य हुआ करते थे, आज सेंट्रल कमेटी सदस्यों की संख्या 15 है। इसके बाद वर्ष 2021 में डीजीपी रहते हुए माओवादियों के देश के सर्वोच्च नेता प्रशांत बोस उर्फ किशन दा की गिरफ्तारी के साथ डीजीपी नीरज सिन्हा के नाम एक और उपलब्धि जुड़ गई है।

लातेहार में 25 लाख का विमल यादव व सारंडा में महाराज प्रमाणिक बना पुलिस का सहयोगी

दो महीने पहले बूढ़ा पहाड़ व लातेहार क्षेत्र में सक्रिय माओवादियों का स्पेशल एरिया कमेटी (सैक) सदस्य 25 लाख का इनामी उमेश यादव उर्फ विमल उर्फ राधेश्याम यादव तथा सारंडा में दस लाख के इनामी महाराज प्रमाणिक ने अनधिकृत रूप से आत्मसमर्पण किया था, लेकिन अब तक उन्हें अधिकृत रूप से आत्मसमर्पण नहीं कराया जा सका है। इसकी मूल वजह है कि इनकी निशानदेही पर झारखंड पुलिस को माओवादियों के विरुद्ध अभियान चलाने में लगातार सफलताएं मिल रही हैं।

Edited By: Sujeet Kumar Suman

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