जागरण संवाददाता, रांची : इस बार कलाइयों पर सजने वाली राखी कुछ खास होगी। झारखंड खादी बोर्ड इस बार स्पेशल राखी लेकर आ रहा है। इस रेशम की राखी में धर्म की मिठास होगी। खादी बोर्ड के कार्यालय में मुस्लिम बहनें रेशम की राखियां बना रही हैं और शिव भक्तों के लिए कांवरिया ड्रेस की सिलाई कर रही हैं। यहां दर्जनों मुस्लिम बहनें काम कर रही हैं। उन्हें यहां सिलाई की ट्रेनिंग भी दी गई। राखी बनाने का भी प्रशिक्षण दिया गया और वे इस काम को तेजी से अंजाम दे रही हैं। खादी बोर्ड ने दस हजार रेशम की राखी बनाने का लक्ष्य रखा है।

सादिया परवीन, गुलनाज परवीन, गुलशन परवीन, सोनी परवीन, साजिदी परवीन के साथ-साथ चांदनी कुमारी, शिखा कुमारी, पूजा नूनीवाला मिलकर काम कर रही हैं। दो धर्मों की डोर को मजबूत कर रही हैं। खादी बोर्ड के अध्यक्ष संजय सेठ कहते हैं, राखी का पर्व ऐसा है जो अब हिंदू धर्म तक सीमित नहीं रहा है। यहां सौहार्द का नजारा है। यहां सभी महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्हें स्वावलंबन का पाठ पढ़ाया जाता है। यहां प्रशिक्षण के दौरान भी बोर्ड डेढ़ सौ रुपये प्रतिदिन देता है। बाद में सिलाई मशीन भी इन्हें प्रदान किया जाता है।

स्नेह का बंधन : रक्षा बंधन सगे भाई बहन के अतिरिक्त अनेक भावनात्मक रिश्ते भी इससे बंधे होते हैं जो धर्म, जाति और देश की सीमाओं से परे हैं। रक्षाबंधन का पर्व भारत के राष्ट्र्रपति और प्रधानमंत्री के निवास पर भी मनाया जाता है। जहां छोटे-छोटे बच्चे जाकर उन्हें राखी बांधते हैं। रक्षाबंधन आत्मीयता और स्नेह के बंधन से रिश्तों को मज़बूती प्रदान करने का पर्व है। यही कारण है कि इस अवसर पर न केवल बहन भाई को ही अपितु अन्य संबंधों में भी रक्षा या राखी बांधने का प्रचलन है।

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