झुमरीतिलैया (कोडरमा), जासं। भारतीय संस्कृति में त्योहार न केवल हमें हमारी परंपराओं से परिचित कराते हैं, बल्कि हमारे अंदर आस्था और विश्वास जगाने का भी काम करते हैं। यही वजह है कि विकास के दौर में भी ईश्वर के प्रति हमारी श्रद्धा कम नहीं हुई है। सुहागिनों का पर्व करवा चौथ पर चांद के दीदार की बेकरारी त्योहार के उल्लास में चार चांद लगा देते हैं। पौराणिक ग्रंथों के साथ ही सामाजिक मान्यताएं हमें अपने धर्म के प्रति धर्मनिष्ठ बनाती हैं। इसी उद्देश्‍य के चलते हम हर त्योहार को अपने ढंग से मनाने में आगे रहते हैं। इस बार चांद के दीदार का पर्व करवा चौथ 24 अक्टूबर को है।

चंद्रोदय के पहले पूजा करना उत्तम

पंडित गौतम पांडेय ने बताया कि 24 अक्टूबर को चतुर्थी है। इस दिन शाम 5:45 बजे से 6:59 बजे तक पूजन का शुभ मुहूर्त है। इस बार करवा चौथ में चांद का पूजन विशेष फलदायी होगा। चंद्रमा का पूजन महिलाओं के लिए पति और बच्चों के लिए अच्छा रहेगा। करवा चौथ का पूजन चंद्रोदय के पहले करना उत्तम होगा। चंद्रोदय रात 8.07 बजे होगा। इससे पहले प्रदोष बेला में 7.30 बजे तक पूजन कर सकते हैं। चतुर्थी 23 को सुबह 3:01 बजे से शुरू होकर 25 अक्टूबर को 5:43 बजे तक रहेगी।

करवा चौथ को लेकर बाजार तैयार

करवा चौथ को लेकर बाजार अभी से तैयार हैं। करवा चौथ पर पूजन सामग्री के साथ ही डिजाइनर करवे भी बाजार में मौजूद हैं। करवा बना रहे सुनील कुम्हार ने बताया कि वे अभी तक मिटटी के 200 करवे बना चुके है। ये दस रुपये में बिकेंगे। वहीं दूसरी ओर सोना चांदी विक्रेता अशोक प्रसाद ने करवा चौथ को लेकर बताया कि पायल व बिछिया की बिक्री होती है। यह 11 सौ से 500 रुपये तक उपलब्ध हैं। वहीं श्रृंगार दुकान के राजेश कुमार ने बताया कि महिलाओं के लिए श्रृंगार के सामान की बिक्री होती है। कम रेंज में आकर्षक श्रृंगार महिलाओं को रास आएंगे।

Edited By: Sujeet Kumar Suman