करम पर्व पर झालीवुड में लोकगीतों की धूम: नागपुरी, खोरठा और संथाली में रिलीज हुए 80 से अधिक वीडियो एल्बम
करम पर्व के पावन अवसर पर झालीवुड में झारखंडी लोकगीतों की धूम है, जहाँ नागपुरी, खोरठा सहित विभिन्न भाषाओं में 70-80 करम आधारित गीत रिलीज हुए हैं।

करम पर्व पर झालीवुड में लोकगीतों की धूम(एआई जेनरेटेड तस्वीर)
HighLights
झालीवुड में करम पर्व पर 70-80 लोकगीत रिलीज हुए।
गीतों में झारखंडी संस्कृति, प्रकृति प्रेम और भाई-बहन का रिश्ता।
पारंपरिक वाद्ययंत्रों और आधुनिक संगीत का सुंदर संयोजन प्रस्तुत किया गया।
जागरण संवाददाता, रांची। करम पर्व के पावन अवसर पर झालीवुड में झारखंडी लोकगीतों की धूम है। झारखंडी कलाकारों और संगीतकारों ने इस वर्ष नागपुरी, सादरी, खोरठा, संथाली, कुरमाली, पंचपरगनिया समेत विभिन्न झारखंडी भाषाओं में करीब 70 से 80 करम आधारित गीत रिलीज किए हैं।
इन गीतों में करम पर्व की परंपरा, प्रकृति प्रेम, भाई-बहन के रिश्ते, सामुदायिक एकता और झारखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति को संगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
झारखंड की लोकआस्था और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा
करम पर्व झारखंड की लोकआस्था और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। इसी को ध्यान में रखते हुए कलाकारों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों और लोकधुनों के साथ आधुनिक संगीत संयोजन का मेल किया है। गीतों के वीडियो में करम डाली, करम पूजा, अखड़ा, नृत्य-संगीत और ग्रामीण जीवन की झलक दिखाई गई है।
झारखंडी परिधान और पारंपरिक नृत्य के साथ लोक वातावरण को भी वीडियो में प्रमुखता दी गई है। इस वर्ष रिलीज हुए करम गीतों में करम राईत, नेग रीती करमा, करम आए गेल, हरियर करम डाईर, भादो कर एकादशी, चल करम खेले, मांदरीक रे, कांशी फुल, करम रतिया में, पांव में पाईरी, झिक झोरी करम, करम करम, अखरा में मंदार बाजे, पूजबई करम डरिया, आलय करम राजा, झली मिली अखरा में करम, केकर लागिन करमा करले, छोट भईया, करम जितिया रे, हैरे करम और 12 महिंना करम सहित कई वीडियो एल्बम शामिल हैं।
अनेक गायकों ने आवाज दी
इन गीतों को पवन रॉय, मोनिका मुंडू, ज्योति साहू, इग्नेश कुमार, मनोज सहरी, विवेक नायक, कुमार प्रीतम, सुमन गुप्ता, किशन राज, अनीता बड़ा, राजू करकेटा समेत अनेक गायकों ने आवाज दी है।
गीतकार एवं फिल्म निर्देशक रंजू मिंज ने कहा कि करम केवल एक पर्व नहीं, बल्कि झारखंड की संस्कृति, प्रकृति और सामुदायिक जीवन की पहचान है। प्रयास है कि झारखंडी गीत-संगीत को आधुनिक मंच मिले और लोकभाषा एवं संस्कृति देश-दुनिया तक पहुंचे।
