जेयूटी परिणाम में देरी: झारखंड में 40 हजार छात्रों का भविष्य दांव पर, छात्रवृत्ति पर संकट
झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जेयूटी) रांची में परीक्षा के पांच महीने बाद भी परिणाम घोषित न होने से करीब 40 हजार ...और पढ़ें

40 हजार विद्यार्थियों का भविष्य भी दांव पर।
HighLights
जेयूटी में 40 हजार छात्रों के परिणाम लंबित।
ई-कल्याण छात्रवृत्ति नवीनीकरण में बाधा उत्पन्न।
छात्रों में मानसिक तनाव और भविष्य की चिंता।
जागरण संवाददाता, रांची। झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जेयूटी), रांची के सुस्त रवैये के कारण करीब 40 हजार छात्र-छात्राओं का शैक्षणिक भविष्य दांव पर लग गया है। विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित बीटेक प्रथम सेमेस्टर (बैच 2025-29), बीटेक तृतीय सेमेस्टर (बैच 2024-28) और एनईपी डिप्लोमा प्रथम सेमेस्टर (बैच 2025-28) की परीक्षाएं मार्च 2026 में ही पूरी कराई जा चुकी थीं।
परीक्षा संपन्न हुए लगभग पांच महीने का लंबा वक्त गुजर चुका है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन अब तक परिणाम जारी करने में नाकाम रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि इस बीच विद्यार्थियों के अगले सेमेस्टर के इम्तिहान भी लिए जा चुके हैं, फिर भी पिछले सत्र के नतीजों का कोई अता-पता नहीं है।
विद्यार्थियों के सामने खड़ी प्रमुख समस्याएं
ई-कल्याण छात्रवृत्ति पर संकट: राज्य सरकार की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के नवीनीकरण और कालेज स्तर पर सत्यापन के लिए पिछले सेमेस्टर का उत्तीर्ण अंकपत्र अनिवार्य होता है। परिणाम लंबित रहने से हजारों जरूरतमंद व आरक्षित वर्ग के छात्रों की छात्रवृत्ति रद्द होने की स्थिति बन गई है।
बैकलाग को लेकर भारी संशय: रिजल्ट न आने से छात्र इस असमंजस में हैं कि वे किस विषय में सफल हुए हैं और किसमें बैक लगी है। इससे आगे के बैक पेपर फार्म भरने और अध्ययन की तैयारी की रणनीति बनाना पूरी तरह बाधित हो गया है।
पांच महीने बीत जाने के बाद भी रिजल्ट न मिलने के कारण अभिभावकों की चिंता बढ़ रही है। छात्र लगातार मानसिक दबाव और पारिवारिक सवालों का सामना करने को मजबूर हैं।
नई शिक्षा नीति के कारण बहुत कुछ देखना पड़ रहा है। रिजल्ट न आने से कोई परेशानी नहीं होती है छात्रों को। वे अगले सेमेस्टर में पढ़ने लगते हैं। अंतिम सेमेस्टर व परीक्षा समय से होती है और रिजल्ट भी समय से आ जाता है। इसलिए बीच में देरी का प्रभाव अंत नहीं पड़ता है। यह तकनीकी संस्थान है। इसका दूसरे विवि से तुलना नहीं की जा सकती है।
-डाॅ डीके सिंह, कुलपति, झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय
