स्थिति को देखते हुए प्रोजेक्ट भवन के मुख्य द्वार पर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। हालांकि, सुरक्षा घेरे के बावजूद अभ्यर्थियों ने शांतिपूर्ण लेकिन आक्रामक रुख अपनाते हुए सड़क के सामने बैठकर अपना विरोध जारी रखा।
प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थियों का कहना था कि सरकार और आयोग का निर्णय उनके भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।
कई अभ्यर्थियों ने भावुक होकर बताया कि वे अन्य राज्यों अभ्यर्थियों तथा विभिन्न सरकारी व निजी नौकरियों को छोड़कर झारखंड में सेवा देने के उद्देश्य से आए थे।
अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि पूरी चयन प्रक्रिया में उनकी कोई गलती नहीं है, फिर भी एक झटके में उनकी सेवा समाप्त कर देना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और गैर-कानूनी है।
सुबह 10 बजे से ही अभ्यर्थी प्रोजेक्ट भवन के मुख्य द्वार पर जुटने लगे थे। इसके पश्चात, आगे की भावी रणनीति तय करने के लिए सभी अभ्यर्थी पास स्थित गोलचक्कर मैदान में एकत्रित हुए।
देखते ही देखते मैदान में राज्य के सभी 24 जिलों से आए 1000 से अधिक अभ्यर्थियों का जमावड़ा हो गया।
मैदान में अभ्यर्थियों ने जिलावार समन्वय स्थापित किया और एक डायरी में सभी के नाम व संपर्क सूत्र दर्ज किए गए, ताकि आंदोलन को पूरे राज्य में सुसंगठित रूप दिया जा सके।
अभ्यर्थियों का स्पष्ट कहना था कि उनकी मेहनत और निष्ठा को इस तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दोपहर 12 बजे तक गोलचक्कर मैदान में सर्वसम्मति से निर्णय लेने के बाद अभ्यर्थियों का जत्था पुनः प्रोजेक्ट भवन के समक्ष पहुंचा और धरना शुरू कर दिया।
40 अभ्यर्थियों की लीगल टीम गठित, वकालतनामा तैयार
कानूनी लड़ाई को मजबूती से लड़ने के लिए अभ्यर्थियों ने एक बड़ी रणनीति के तहत 40 सदस्यीय विशेष लीगल टीम का गठन किया है। इस टीम में राज्य के सभी जिलों से एक से दो अभ्यर्थियों को शामिल किया गया है।
साथ ही विभिन्न विभागों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रतिनिधियों को भी स्थान दिया गया है। यह लीगल टीम उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे रही है।
प्रदर्शन स्थल पर ही लीगल टीम द्वारा अभ्यर्थियों से वकालतनामा एकत्र किया जा रहा था, ताकि न्यायालय के समक्ष मजबूती से पक्ष रखा जा सके और अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा हो सके।
गले में फांसी का फंदा डाल किया प्रदर्शन
दोपहर में गोलचक्कर मैदान से प्रोजेक्ट भवन लौटने के बाद अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन और अधिक तीव्र हो गया। अभ्यर्थियों ने सांकेतिक रूप से अपने गले में फांसी जैसी रस्सी डाल रखी थी, जो उनके मानसिक तनाव और हताशा को दर्शा रही थी।
इस प्रदर्शन के कारण प्रोजेक्ट भवन के सामने की मुख्य सड़क पर काफी देर तक आवागमन बाधित रहा और जाम की स्थिति बनी रही। प्रशासनिक समझाइश और विरोध दर्ज कराने के बाद अभ्यर्थी सड़क की दूसरी ओर स्थानांतरित हुए।
इस आंदोलन में एक बेहद भावुक और मानवीय पहलू भी देखने को मिला। कड़ाके की धूप और भीड़ के बीच कई महिलाएं अपने दुधमुंही बच्चों के साथ प्रदर्शन में शामिल हुईं।
नगड़ी की रहने वाली ललिता कुमारी अपनी 11 महीने की मासूम बच्ची याश्विनी को गोद में लेकर पहुंची थीं। ललिता का कहना था कि इतने संवेदनशील मोड़ पर वह अपनी बच्ची को घर छोड़कर नहीं आ सकती थीं।
भीड़ और शोर-शराबे के बीच मासूम बच्चे रोते-बिलखते दिखे, जिसने प्रशासनिक अधिकारियों और राहगीरों का ध्यान आकर्षित किया।
छात्र नेताओं का सरकार पर तीखा हमला, दो महीने का अल्टीमेटम
छात्र नेता रविंद्र पासवान ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गठबंधन सरकार पर दोहरा रवैया अपनाने का गंभीर आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री प्रेस वार्ता में दावा करते हैं कि सरकार छात्रों की मांगों के साथ है, लेकिन गठबंधन के सहयोगी दल पर्दे के पीछे से अलग खेल खेल रहे हैं।
पासवान ने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार ने शायद यह सोचा था कि परीक्षा रद करने से आंदोलन समाप्त हो जाएगा, लेकिन JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच अब अत्यधिक मजबूत हो चुका है।
सरकार को दो महीने का समय दिया जाता है। यदि हमारी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो कल ही लाखों छात्रों को राज्य की धरती पर सड़कों पर उतार दिया जाएगा।
वहीं, एक अन्य छात्र नेता पीयूष कुमार ने आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान सरकार की नीयत साफ नहीं दिखती।
उन्होंने सवाल उठाया कि हाईकोर्ट में सरकार की तरफ से एडवोकेट जनरल (AG) पेश नहीं हो रहे हैं और केवल संजय पिपरवाल ही उपस्थित रहते हैं।
उन्होंने कहा कि छात्रों को गुमराह किया जा रहा है और जल्द ही आंदोलन के अगले चरण की घोषणा की जाएगी।