विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

JSSC सीजीएल नियुक्ति रद करना एकपक्षीय, नौकरी पानेवाले अभ्यर्थी झारखंड हाई कोर्ट में दाखिल करेंगे याचिका

Published: Tue, 18 Aug 2026 08:55 PM (IST)Updated: Wed, 19 Aug 2026 11:27 AM (IST)

सरकार द्वारा जेएसएससी सीजीएल नियुक्ति रद्द करने के फैसले को एकतरफा बताया गया है, जिस पर कानूनी चुनौती की तैयारी ...और पढ़ें

जेएसएससी सीजीएल नियुक्ति रद, हाईकोर्ट में चुनौती की तैयारी तेज।

जेएसएससी सीजीएल नियुक्ति रद, हाईकोर्ट में चुनौती की तैयारी तेज।

HighLights

  1. सरकार का जेएसएससी सीजीएल नियुक्ति रद करने का निर्णय एकतरफा।

  2. नौकरी से हटाए गए अभ्यर्थी हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में।

  3. मेरिट पर नियुक्त कर्मियों को हटाना अन्याय, कानूनी लड़ाई की तैयारी।

राज्य ब्यूरो, रांची। जेएसएससी सीजीएल नियुक्ति रद करने की घोषणा के बाद कानूनी पहलू पर चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर नौकरी से हटाए जाने वाले कर्मियों का क्या होगा। इस पर हाई कोर्ट के अधिवक्ता विनोद सिंह ने कहा कि सरकार का निर्णय पूरी तरह से एकपक्षीय है।

सरकार ने बिना किसी निष्पक्ष जांच और नौकरी करने वाले अभ्यर्थियों को सुनवाई मौका दिए बिना ही ऐसा निर्णय लिया है, जो नैसर्गिक न्याय के खिलाफ है। सरकार ने कोर्ट के आदेश पर इनकी नियुक्ति की था और सरकार ही उन्हें हटाने का निर्णय लिया है।

ऐसा करना उनके साथ अन्याय है। क्योंकि इनकी नियुक्ति मेरिट के आधार पर हुई है। कुछ अभ्यर्थियों की गड़बड़ी के कारण इतनी बड़ी संख्या में लोगों को नौकरी से निकालना जाना उचित नहीं है, जिसे हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।

सरकार के निर्णय के खिलाफ दाखिल करेंगे याचिका

सरकार की घोषणा के बाद जिनकी नौकरी चली गई है, वे इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने की बात कह रहे हैं। इस केस से संबंधित अधिवक्ता का कहना है कि जब तक सरकार की ओर से इससे संबंधित कोई आदेश या संकल्प जारी नहीं किया जाता है, तब तक हाई कोर्ट में याचिका दाखिल नहीं की जा सकती है।

क्योंकि सरकार की ओर से जारी आदेश या संकल्प में सीजीएल परीक्षा रद करने का आधार बताया जाएगा। जिसके आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। सरकार के निर्णय से प्रभावित अभ्यर्थियों ने अधिवक्ताओं से संपर्क स्थापित करना प्रारंभ कर दिया है।

उनका कहना है कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद ही सीजीएल परीक्षा का परिणाम जारी करते हुए उनकी नियुक्ति सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के पद पर हुई थी। ऐसे में यह एक तरह से कोर्ट के अवमानना का भी मामला बनता है।

सरकार का निर्णय उत्साहवर्धक: अजीत कुमार

जेएसएससी सीजीएल में पेपर लीक होने का हवाला देते हुए हाई कोर्ट में दाखिल याचिका में पैरवी करने वाले वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार ने कहा कि सरकार का निर्णय उत्साहवर्धक है। इस मामले में हो रही जांच में सारे साक्ष्य उपलब्ध थे।

पिछले दिनों सीआईडी जांच में कई अन्य साक्ष्य भी सामने आए हैं। ऐसे में दागी और गैर दागी अभ्यर्थियों में फर्क करना असंभव हो जाता। इसलिए पूरी नियुक्ति को निरस्त करना पड़ता है। 

यह भी पढ़ें- सीजीएल नियुक्ति पर तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- अप्वाइंटमेंट लेटर जांच के नतीजे के अधीन, नियुक्ति पत्रों में करना होगा जिक्र

यह भी पढ़ें- JPSC-JSSC Scam: भाजपा शासनकाल की 16 परीक्षाओं की भी होगी जांच, इनमें झारखंड सिविल सेवा परीक्षाएं भी