जेपीएससी परीक्षा घोटाले में बड़ा खुलासा, पूर्व अध्यक्ष खियांग्ते का ऑपरेटर देता था जेल भेजने की धमकी
JPSC Scam: सीआईडी जांच में जेपीएससी परीक्षा संचालन एजेंसी के निदेशक रामवीर सिंह ने कई खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया ...और पढ़ें

एजेंसी टीडीपीएल का निदेशक है रामवीर सिंह, एल. खियांग्ते का कंप्यूटर आपरेटर था धर्मेंद्र।
HighLights
रामवीर सिंह ने सीआईडी को महत्वपूर्ण जानकारी दी।
धर्मेंद्र ने पेपर लीक व अवैध चयन का दबाव बनाया।
कोचिंग संस्था से जुड़े रवि कुमार पर भी शिकंजा।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में अनियमितता, पेपर लीक, ओएमआर शीट में हेराफेरी आदि मामलों की जांच कर रही सीआईडी को पूछताछ में परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के निदेशक रामवीर सिंह ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं।
रामवीर सिंह ने सीआइडी को बताया है कि जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के कंप्यूटर आपरेटर धर्मेंद्र के पास दलालों व एजेंटों का आना-जाना था। अभ्यर्थियों के चयन को लेकर धर्मेंद्र रामवीर पर दबाव बनाता था। वह एल. खियांग्ते का भय दिखाता था।
एक बार विवाद इतना बढ़ा कि रांची के हिनू चौक स्थित शनि मंदिर के पास रामवीर व धर्मेंद्र में जमकर झगड़ा भी हुआ था। रामवीर सिंह ने सीआइडी को बताया कि धर्मेंद्र व लालपुर की एक कोचिंग संस्था शिवांगन की पाठशाला से जुड़े रवि कुमार ने मिलकर उसे धमकी दी थी कि उनके अभ्यर्थियों का चयन नहीं हुआ तो वे रामवीर को जेल भिजवा देंगे।
धर्मेंद्र ने रामवीर सिंह पर 10-12 अभ्यर्थियों का सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) नियुक्ति परीक्षा व वन क्षेत्र पदाधिकारी (एफआरओ) नियुक्ति परीक्षा में अवैध चयन के लिए पेपर लीक का दबाव बनाया था।
रामवीर के अनुसार उसने पेपर लीक से इंकार किया और तत्काल इसकी सूचना तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता को भी दी, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। उच्च स्तर पर सूचना के बावजूद फर्जी तरीके से बहाली का खेल धड़ल्ले से चलता रहा।
अब सीआइडी सभी सूचनाओं का सत्यापन कर रही है। अब जल्द ही कोचिंग संस्था शिवांगन की पाठशाला से जुड़े रवि कुमार पर भी शिकंजा कसेगा।
थर्ड पार्टी एजेंसी ने जारी किया था सिविल जज पीटी का परिणाम: रामवीर
रामवीर सिंह ने पूछताछ में यह भी जानकारी दी है कि सिविल जज पीटी परीक्षा उनकी एजेंसी ने नहीं कराई थी और मेरिट लिस्ट किसी थर्ड पार्टी एजेंसी ने जारी की थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दो विवादित प्रश्न हटाए गए थे। उसके बाद उनकी कंपनी टीडीपीएल ने संशोधित मेरिट लिस्ट जारी की थी।
इस फेरबदल के कारण पहले से चयनित 200 छात्र मेरिट से बाहर हो गए और 200 नए छात्र मेरिट लिस्ट के भीतर आ गए थे। इसके बाद आयोजित एफआरओ और एसीएफ परीक्षा में धर्मेंद्र ने खुलकर 10-12 छात्रों को पास कराने और पर्चा लीक करने की सौदेबाजी शुरू हुई थी।
