विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

JPSC मेधा घोटालाः एक करोड़ में चयन, 10 लाख में प्रीलिम्स; CID को बुद्धेश्वर ने बताया कैसे तय था परीक्षा का रेट

Published: Thu, 13 Aug 2026 11:28 AM (IST)

बिचौलिया बुद्धेश्वर भगत ने सीआईडी को बताया कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा में सामान्य/ओबीसी के लिए एक करोड़ और एससी/एसटी के ...और पढ़ें

एआई जेनरेटेड इमेज।

एआई जेनरेटेड इमेज।

HighLights

  1. बुद्धेश्वर ने 14वीं जेपीएससी घोटाले का खुलासा किया।

  2. NHM में संविदा पर कंप्यूटर ऑपरेटर था बुद्धेश्वर।

राज्य ब्यूरो, रांची। जेपीएससी मेधा घोटाला मामले की जांच कर रही सीआईडी को रिमांड पर बिचौलिया बुद्धेश्वर भगत ने परीक्षा में कथित सेटिंग और अभ्यर्थियों से रुपये की वसूली को लेकर बड़ी जानकारी दी है। उसने बताया है कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा में अभ्यर्थियों से वसूली का पूरा रेट तय हो गया था।

उसने अनुसार, सामान्य व ओबीसी संवर्ग के अभ्यर्थियों के लिए अंतिम रूप से चयन का रेट एक करोड़ रुपये था, जबकि एससी-एसटी संवर्ग के अभ्यर्थियों के अंतिम रूप से चयन के लिए 80 लाख रुपये में सौदा तय किया गया था। प्रारंभिक परीक्षा में पास कराने का रेट 10 लाख रुपये था। वहीं मुख्य परीक्षा तक तय रेट की 50 प्रतिशत राशि देनी थी और अंतिम रूप से चयन होने पर पूरी राशि देने की बात थी। 

बुद्धेश्वर ने सीआईडी को बताया कि जो अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण हो जाता है, वह फिर पीछे नहीं हटता और अंतिम रूप से परिणाम हासिल करने के लिए रुपये देने से नहीं हिचकता है। उसका विश्वास जम जाता है, क्योंकि प्रारंभिक परीक्षा ही अंतिम नहीं होता है ओर यह अभ्यर्थी अच्छी तरह जानते हैं इसलिए लिए वे रिश्वत देने से पीछे नहीं हटते। यही वजह है कि प्रारंभिक परीक्षा के पूर्व इच्छुक अभ्यर्थियों से 10 लाख रुपये लिए जाते थे। लेनदेन केवल नकदी में होना तय था और अभ्यर्थी लाने वाले को कमीशन में प्रति अभ्यर्थी 15 लाख रुपये मिलना तय था।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए 11 अभ्यर्थियों से लिए 1.10 करोड़ रुपये

बिचौलिया बुद्धेश्वर मूल रूप से लोहरदगा के बेजवाली का रहने वाला है। उसने सीआईडी को बताया है कि उसने 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के लिए 11 अभ्यर्थियों से 1.10 करोड़ रुपये की वसूली की थी। उसने यह भी बताया कि इस परीक्षा में पास कराने के लिए 24 अभ्यर्थियों ने संपर्क किया था, लेकिन 11 ने ही पैसे दिए। इन अभ्यर्थियों में कपिल कुमार महतो, संतोष कुमार, वंदना कुमारी, दिलीप कुमार राणा, ओमप्रकाश राणा, शिवम सिंह, पवन कुमार मुंडा, राकी सचिन लकड़ा, रौशन केरकेट्टा व उमाकांत उरांव शामिल थे।

एनएचएम में संविदा पर कंप्यूटर ऑपरेटर बना, जमीन के धंधे से भी जुड़ा, फिर अभय तिवारी के संपर्क में आया

बिचौलिया बुद्धेश्वर भगत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के नामकुम स्थित कार्यालय में वर्ष 2008 में संविदा के आधार पर कंप्यूटर आपरेटर के पद पर बहाल हुआ था। वह नौकरी के साथ-साथ जमीन के धंधे से भी जुड़ा था।

इसी कार्यालय में वर्ष 2022-23 में जेपीएससी मेधा घोटाले के मास्टरमाइंड वह परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी से मुलाकात हुई थी।

उस समय अभय तिवारी टीएंडएम कंस्लटेंसी सर्विसेज कंपनी में कार्यरत था। अभय तिवारी एनएमएच में आउटसोर्सिंग का काम लेने के लिए टेंडर भरने आया था। इसके बाद अभय तिवारी की कंपनी को टेंडर मिला और उसका एनएचएम कार्यालय में आना-जाना शुरू हो गया।

बुद्धेश्वर ने सीआईडी को बताया कि आने-जाने के क्रम में ही अभय तिवारी से उसकी मित्रता हो गई। जनवरी 2026 में जब 14वीं जेपीएससी परीक्षा की घोषणा हुई तो अभय ने उससे संपर्क कर बताया कि जेपीएससी की परीक्षा में सेटिंग हो रहा है, कोई अभ्यर्थी हो तो बताए।

उसने यह भी भरोसा दिलाया कि उक्त अभ्यर्थी का परिणाम पक्का होगा। अभय ने अपने बारे में भी बताया कि वह खुद सेटिंग से जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में अच्छे रैंक से पास हो चुका है। इतना ही नहीं उसने सेटिंग से पीजीटी, एफएसओ, एसीएफ, एफआरओ की परीक्षा भी पास कर ली है। 

यह भी पढ़ें- JPSC के पूर्व सदस्य डॉ. जमाल अहमद ने अभय तिवारी के बयानों को बताया निराधार, CID करेगी दोबारा पूछताछ

यह भी पढ़ें- JPSC Scam: रांची के अपार्टमेंट में दूसरे राज्यों के टॉपर्स बुलाकर लिखवाते थे अभ्यर्थी के उत्तर, घोटाले में सीनियर IAS का भी नाम