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JPSC Scam: कुक का बेटा, संविदा पर बना ऑपरेटर और करोड़ों का खेल; पढ़ें धर्मेंद्र के रसूख की कहानी

Published: Tue, 11 Aug 2026 11:13 PM (IST)Updated: Tue, 11 Aug 2026 11:14 PM (IST)

जेपीएससी घोटाले की जांच अब सचिवालय तक पहुंच गई है, जिसमें अनुबंध पर नियुक्त कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार मुख्य आरोपी हैं।

झारखंड सीआईडी।

झारखंड सीआईडी।

HighLights

  1. जेपीएससी घोटाले की जांच सचिवालय तक पहुंची, धर्मेंद्र गिरफ्तार।

  2. धर्मेंद्र पर टीडीपीएल से कमीशन मांगने का आरोप।

  3. पूर्व मुख्य सचिव पीपी शर्मा के समय हुई थी बहाली।

राज्य ब्यूरो, रांची। जेपीएससी मेधा घाेटाले की जांच अब परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी से आगे बढ़कर सचिवालय के उस सिस्टम तक पहुंच गई है, जहां अनुबंध पर नियुक्त एक कंप्यूटर ऑपरेटर ने वर्षों तक अपनी मजबूत पकड़ बना ली थी।

जेपीएससी के पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते के कार्यालय में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार की गिरफ्तारी के बाद सीआईडी उसके पुराने सचिवालय कनेक्शन और प्रभाव भी पड़ताल कर रही है।

धर्मेंद्र पर परीक्षा संचालन का काम हासिल करने के लिए टीडीपीएल कंपनी से सौदेबाजी करने और कमीशन मांगने का आरोप है।

आरोप है कि उसने कंपनी को ओएमआर, एडमिट कार्ड और प्रिंटिंग जैसे काम दिलाने के एवज में 20 से 25 लाख रुपये कमीशन की मांग की थी।

इसके अलावा कुछ अभ्यर्थियों को पैसे के लेन-देन के आधार पर परीक्षा में पास कराने का भरोसा देने का भी आरोप है। टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी से मिली जानकारी के आधार पर सीआईडी ने धर्मेंद्र को गिरफ्तार किया है।

पूर्व सचिव के कुक थे पिताजी

धर्मेंद्र की सचिवालय में पैठ की शुरुआत भी जांच के लिहाज से अहम है। सीआईडी को मिली जानकारी के अनुसार उसके पिता राज्य के पूर्व मुख्य सचिव पीपी शर्मा के कुक थे।

पीपी शर्मा के कार्यकाल में ही धर्मेंद्र की अनुबंध पर कंप्यूटर ऑपरेटर पद पर बहाली हुई थी। इसके बाद उसने सचिवालय के सिस्टम में धीरे-धीरे अपनी जड़ें मजबूत कर लीं। वह कई मुख्य सचिवों के कार्यकाल में वहां काम करता रहा, जिनमें कई बड़े नाम वाले पदाधिकारी भी सम्मिलित हैं।

जांच के दायरे में यह भी है कि धर्मेंद्र ने अपने पद, सिस्टम तक पहुंच और प्रभाव का इस्तेमाल किस तरह किया। आरोप है कि उसने अपने संपर्कों और प्रभाव के जरिए चहेतों को लाभ पहुंचाया।

यही कारण है कि सीआईडी अब उसके केवल जेपीएससी कनेक्शन की जांच नहीं कर रही, बल्कि वर्षों के उसके संपर्कों और प्रभाव की पूरी कड़ी खंगाल रही है।

जेपीएससी परीक्षा के लिए जिस टीडीपीएल कंपनी को काम मिला, उसकी भूमिका भी जांच के केंद्र में है। सीआइडी इस पहलू की भी जांच कर रही है कि ब्लैकलिस्टेड कंपनी को काम मिलने के पीछे किन लोगों की भूमिका रही और इसके लिए किस स्तर पर सिफारिश की गई।

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