दलालों ने JPSC चेयरमैन एल. खियांग्ते के घर तक पहुंचाई रिश्वत, ब्लैकलिस्टेड एजेंसी बिंसिस को मिला काम
जेपीएससी मेधा घोटाला: दसीआईडी जांच में खुलासा हुआ है कि जेपीएससी मेधा घोटाले में दलाल तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के ...और पढ़ें

पतंजलि कोचिंग के माध्यम से ही बिंसिस के निदेशक अरुण शर्मा से जुड़ा था ब्रज कुमार राम।
HighLights
दलालों ने एल. खियांग्ते की पत्नी को ढाई लाख रुपये दिए।
ब्लैकलिस्टेड बिंसिस टेक्नोलॉजी को परीक्षा संचालन का काम दिलाया गया।
ब्रज कुमार राम ने घोटाले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, सीडीआर से खुला राज।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) मेधा घोटाला मामले की जांच कर रही सीआईडी को जांच में कई अहम जानकारियां मिलीं हैं। सीआईडी ने जांच में पाया है कि जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के मिजोरम की राजधानी आइजोल स्थित आवास तक दलाल पहुंचे थे। वहां 25 दिसंबर 2025 को उनकी पत्नी को नकदी में ढाई लाख रुपये भी पहुंचाए थे।
इतना ही नहीं, दलालों ने परीक्षा संचालन का कार्य पहले से ब्लैकलिस्ट एजेंसी बिंसिस टेक्नोलोजी को दिला दिया था। इस साजिश में जेपीएससी की तत्कालीन सदस्य डाॅ. अजिता भट्टाचार्य का निजी सहायक ब्रज कुमार राम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
सीआईडी ने उसके मोबाइल का सीडीआर निकाला और उसकी जांच की तो कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं। ब्रज कुमार राम रांची में सिविल सर्विसेज की तैयारी कराने वाली पतंजलि कोचिंग के माध्यम से बिंसिस टेक्नोलोजी के निदेशक अरुण कुमार उर्फ अरुण शर्मा से जुड़ा था। सीआईडी ने उसके मोबाइल की फोरेंसिक जांच भी कराई है।
डिजिटल लेन-देन, आने-जाने के साक्ष्य आदि भी सीआइडी के हाथ लगे हैं। सीआईडी ने ब्रज कुमार राम की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कोर्ट को अपनी जांच में मिले तथ्यों से अवगत कराया है। सीआईडी को पूछताछ में ब्रज कुमार राम ने स्वीकारा था कि पतंजलि कोचिंग के रवि कुमार ने ही उसे बिंसिस टेक्नोलोजी एजेंसी के निदेशक अरुण शर्मा से मुलाकात कराई थी।
रवि कुमार का पहले से ही अरुण शर्मा से संबंध था। ब्रज कुमार राम ने एल. खियांग्ते के कंप्यूटर आपरेटर धर्मेंद्र कुमार के साथ मिलकर अरुण शर्मा उर्फ अरुण कुमार का जेपीएससी में एंट्री कराई और उसकी एजेंसी बिंसिस टेक्नोलोजी को परीक्षा संचालन का काम दिलाया।
सीआईडी को मिली ट्रेवेल हिस्ट्री, दो साथियों के साथ ब्रज गया था आइजोल
सीआईडी को जांच में आरोपितों की ट्रेवेल हिस्ट्री भी मिली है। 25 दिसंबर 2025 को ब्रज कुमार राम बिंसिस के निदेशक अरुण कुमार व सानंद प्रकाश के साथ आइजोल गया था। वहां जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते से मिलना था, लेकिन उनकी अनुपस्थिति में उनकी पत्नी से आरोपितों की मुलाकात हुई थी। ढाई लाख रुपये उनकी पत्नी को ही आरोपितों ने दिया था।
सीआइडी को आरोपितों के यात्रा टिकट व अन्य डिजिटल से संबंधित साक्ष्य भी मिले हैं। मोबाइल में वाट्सएप चैट भी मिले हैं, जो इससे संबंधित सबूत दिए हैं। सीआईडी ने कोर्ट में सबूत दिया है कि ब्रज कुमार राम जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के कंप्यूटर आपरेटर धर्मेंद्र कुमार, बिंसिस टेक्नोलोजी के संचालक अरुण शर्मा के सिंडिकेट का हिस्सा था और सबके संपर्क में रहता था।
सीआईडी की जांच टीम को 14वीं जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण ऐसे छह अभ्यर्थियों की जानकारी मिली है, जिनसे ब्रज कुमार राम सीधे संपर्क में था।
