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JPSC नियुक्ति पर झारखंड सरकार: 'जब एजेंसी ही भ्रष्ट हो और अध्यक्ष सबूत नष्ट करे, तो पूरी चयन प्रक्रिया संदिग्ध'

Published: Mon, 12 Oct 2026 07:30 PM (IST)

जेपीएससी की 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा सहित अन्य नियुक्तियों को रद्द करने के मामले में हाई कोर्ट ने अपना फैसला ...और पढ़ें

सरकार ने कहा- जनहित में दूषित परीक्षा प्रक्रिया से चयनित उम्मीदवारों को सिविल सेवा में न रखा जाए।

सरकार ने कहा- जनहित में दूषित परीक्षा प्रक्रिया से चयनित उम्मीदवारों को सिविल सेवा में न रखा जाए।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने जेपीएससी नियुक्ति रद्द मामले में फैसला सुरक्षित रखा।

  2. सरकार ने कहा, दूषित परीक्षा प्रक्रिया से चयनितों को न रखा जाए।

  3. जांच में ओएमआर छेड़छाड़, आंसर-की लीक और सॉल्वर गैंग मिले।

राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में जेपीएससी की 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) और फूड सेफ्टी अफसर की नियुक्ति रद करने के राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई हुई।

सभी पक्षों की ओर से बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत ने प्रार्थियों और राज्य सरकार को संक्षिप्त लिखित पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

सरकार की ओर से सोमवार को अदालत में अब तक की जांच की सीलबंद रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई। प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने कहा कि टीडीपीएल ने इस परीक्षा में किस हद तक गड़बड़ी की है। इसकी जांच होनी चाहिए।

पूरी परीक्षा प्रणाली के धोखाधड़ी से दूषित होने का मामला

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से दाखिल शपथ पत्र में कहा गया है कि यह मामला किसी व्यक्तिगत कदाचार का नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली के धोखाधड़ी से दूषित होने का है। जब परीक्षा कराने वाली एजेंसी ही भ्रष्ट हो, तो अलग-अलग उम्मीदवारों को नोटिस देने की जरूरत नहीं होती। सीआइडी जांच में पता चला कि ओएमआर शीट में व्यापक पैमाने पर छेड़छाड़ की गई।

ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में भी गड़बड़ी हुई। आरोप है कि तत्कालीन नियंत्रक ने वाट्सएप के जरिए आंसर-की भेजी। परीक्षा में कई साल्वर गैंग का इस्तेमाल किया गया और अभ्यर्थियों की अदला-बदली की गई। राज्य सरकार ने कहा कि यह मामला किसी व्यक्तिगत कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का नहीं, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया के रद करने का है।

जब परीक्षा कराने वाली एजेंसी ही भ्रष्ट हो और अध्यक्ष सबूत नष्ट करे, तो पूरी चयन प्रक्रिया संदिग्ध हो जाती है। सरकार ने कहा कि जनहित में यह जरूरी है कि दूषित परीक्षा प्रक्रिया से चयनित उम्मीदवारों को सिविल सेवा में न रखा जाए। सरकार ने कहा कि नई परीक्षा कराना और स्वच्छ एजेंसी के माध्यम से चयन करना संवैधानिक रूप से उचित रास्ता है।

पैसे लेकर बेची गई थी सीट

सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता कुमार हर्ष ने अदालत को बताया गया कि 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा और सीडीपीओ परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल ने कथित तौर पर 50-50 लाख रुपये लेकर कई अभ्यर्थियों को परीक्षा में सफल कराया। जांच में अभय कुमार तिवारी ने इस संबंध में बयान दिया है।

इस मामले की पिछली सुनवाई में जेपीएससी की ओर से कहा गया था कि परीक्षाओं में व्यवस्थित तरीके से अनियमितताएं हुई हैं। अनुसंधान में यह स्पष्ट हुआ है कि परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित हुई थी। नियुक्ति प्रक्रिया में यह पता लगाना मुश्किल है कि सफल अभ्यर्थियों में कौन दोषी है और कौन निर्दोष।