JPSC मेधा घोटाला: तबादले के बाद भी श्वेता गुप्ता को 15 दिन के लिए आयोग में बुलाया गया, CID ने कोर्ट में रखे अहम सबूत
सीआईडी ने कोर्ट को बताया कि जेपीएससी की पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता का स्थानांतरण के बावजूद जेपीएससी ...और पढ़ें

CID ने कोर्ट में रखे सबूत।
राज्य ब्यूरो, रांची। जेपीएससी मेधा घोटाला मामले की जांच कर रही सीआईडी ने पूर्व में गिरफ्तार जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता के विरुद्ध कोर्ट में पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत किया, जिसके आधार पर कोर्ट ने श्वेता गुप्ता की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
सीआईडी ने कोर्ट को बताया था कि श्वेता गुप्ता का स्थानांतरण 22 मई को खाद्य आपूर्ति विभाग में हुआ था। इसके बावजूद 25 जून को चिट्ठी निकालकर उनका फिर से जेपीएससी में योगदान कराया गया था। जेपीएससी में उनका दोबारा योगदान कराया जाना एक साजिश था। श्वेता गुप्ता के इसी कार्यकाल में 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के ओएमआर शीट में हेराफेरी हुई थी।
सीआईडी थाना कांड संख्या 16/2026 की जांच में पाया गया है कि तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता का आयोग से तबादला हो जाने और उनके नए विभाग में पदभार संभालने के बावजूद उन्हें दोबारा जेपीएससी में 15 दिनों के लिए वापस लाने की साजिश रची गई थी।
सीआईडी के अनुसार, श्वेता कुमारी गुप्ता और एक अन्य अधिकारी सरोजिनी अनी तिर्की को 15 दिनों के लिए दोबारा जेपीएससी में उसी पद पर योगदान करने का विशेष निर्देश दिया गया था। सीआईडी ने केस डायरी में गवाहों का बयान भी लगाया है, जिसमें गवाहों ने बताया है कि परीक्षा संचालन कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल व जेपीएससी से जुड़े लोग ओएमआर शीट्स में हेराफेरी कर रहे थे।
तबादले के बावजूद श्वेता गुप्ता जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के निर्देश पर परीक्षा संबंधी गोपनीय कार्यों का निष्पादन कर रही थी। सीआईडी ने कोर्ट को यह भी बताया है कि टीडीपीएल के निदेशकों सत्यपाल सिंह और रामवीर सिंह के निर्देश पर सह-अभियुक्तों ने श्वेता कुमारी गुप्ता और उनके परिवार के सदस्यों के लिए हवाई टिकटों की व्यवस्था की थी। सीआईडी ने टिकट रिकार्ड, पीएनआर, पैसेंजर लिस्ट, बुकिंग का समय, भुगतान के ब्यौरे आदि की जब्ती की है।
