विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

JPSC Scam: पहले छोड़े सवाल, फिर OMR में भर दिए सही जवाब; CID जांच में सामने आया चौंकाने वाला दावा

Published: Wed, 12 Aug 2026 11:40 AM (IST)Updated: Wed, 12 Aug 2026 01:53 PM (IST)

सीआईडी जांच में जेपीएससी परीक्षाओं में ओएमआर और ओएसएम में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ का खुलासा हुआ है। टीडीपीएल के ...और पढ़ें

टीडीपीएल कर्मी उस्मान ने ओएमआर छेड़छाड़ का खुलासा किया।

टीडीपीएल कर्मी उस्मान ने ओएमआर छेड़छाड़ का खुलासा किया।

HighLights

  1. टीडीपीएल कर्मी उस्मान ने ओएमआर छेड़छाड़ का खुलासा किया।

  2. हेमंत और संजय ने ओएमआर, ओएसएम में हेरफेर किया।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की विभिन्न परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की सीआईडी जांच के दौरान परीक्षा के रिजल्ट में हेरफेर को लेकर चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं।

सीआईडी के सामने दिए गए कथित बयानों में ओएमआर शीट में खाली छोड़े गए सवालों के जवाब बाद में सही करने और अंकों में हेरफेर करने का दावा किया गया है।

जेपीएससी की कुछ परीक्षाओं में पैसे लेकर अभ्यर्थियों को सफल करने का दावा भी सामने आया है। इसके लिए ऑप्टिकल मार्क रीडर (OMR) शीट और ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) के जरिए कथित तौर पर छेड़छाड़ किए जाने की बात जांच में सामने आने का दावा किया गया है। सीआईडी इन बयानों और दावों का सत्यापन कर साक्ष्य जुटा रही है।

जेपीएससी की परीक्षाओं में ओएमआर और ओएसएम में कथित टेम्परिंग की बात सामने आई है। परीक्षा पास कराने के लिए अंकों में हेरफेर किए जाने का भी दावा किया गया है।

यह दावा सीआईडी के सामने पूर्व में गिरफ्तार परीक्षा संचालन कराने वाला एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के तकनीकी सपोर्ट कर्मचारी उस्मान के बयान में सामने आया है।

उस्मान का बयान

उस्मान ने यह भी बताया है कि ओएमआर व ओएसएम में कथित टेम्परिंग और मैनिपुलेशन का काम एजेंसी के कर्मी हेमंत और संजय ने किया है। सीआईडी अब तक लिए गये सभी बयान के सत्यापन करने में जुटी है और इससे संबंधित साक्ष्य जुटा रही है।

अब तक लिए गये बयानों में फॉरेस्ट रेंज अफसर (एफआरओ), 14वीं जेपीएससी और जेपीएससी बैकलॉग परीक्षा समेत अन्य परीक्षाओं में गड़बड़ी का मामला सामने आया है।

उस्मान के कथित बयान के मुताबिक एफआरओ परीक्षा में करीब 100, 14वीं जेपीएससी में 100 से अधिक और जेपीएससी बैकलाग में 50 से 100 अभ्यर्थियों के पैसे देकर परीक्षा पास करने का दावा किया गया है। जिसका सीआईडी सत्यापन कर रही है।

वर्ष 2025 में टीडीपीएल से जुड़ा था उस्मान

उस्मान ने सीआईडी को बताया है कि वह वर्ष 2025 में टीडीपीएल कंपनी में तकनीकी सपोर्ट स्टाफ के रूप में जुड़ा था। प्रदीप कुमार सिंह कंपनी में इंजीनियर के रूप में कार्यरत था और उसकी निगरानी में ओएमआर प्रोसेसिंग तथा रिजल्ट पब्लिकेशन का काम होता था।

उस्मान ने यह भी बताया है कि ओएमआर से संबंधित काम प्रदीप कुमार सिंह देखता था, जबकि ओएसएम से जुड़ा काम हेमंत करता था। ओएमआर और ओएसएम में कथित टेंपरिंग और मैनिपुलेशन का काम हेमंत और संजय मिलकर करते थे।

संजय के बारे में उसने कहा है कि वह टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी और जेपीएससी की परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता सहित अन्य लोगों के संपर्क में रहता था और अभ्यर्थियों से संपर्क कराने की भूमिका निभाता था।

उस्मान के अनुसार, कथित टेम्परिंग के दौरान टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह और सतपाल सिंह की तकनीकी टीम भी बाहर से आती थी।

उसने सीआइडी को यह भी बताया है कि पूरी प्रक्रिया के क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी उसके पास थी। कथित गड़बड़ी के बदले रामवीर सिंह ने उसे कुल बिल में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का प्रलोभन दिया था।

ओएमआर और ओएसएम के माध्यम से हुए हैं खेल

उस्मान के अनुसार, आप्टिकल मार्क रीडिंग (ओएमआर) और ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) के माध्यम से ही परीक्षाओं में पूरा खेल हुआ है। इसके माध्यम से अंकों में हेरफेर की गई है।

टीडीपीएल के गिरफ्तार निदेशक रामवीर ने सीआईडी को बताया, खाली गोलों को सही उत्तर में बदला

टीडीपीएल के गिरफ्तार निदेशक रामवीर सिंह ने सीआइडी को बताया कि खाली छोड़े गए गोलों को सही उत्तर में बदला गया था।

उसने अपनी स्वीकारोक्ति बयान में ओएमआर स्कैनिंग, ओएमआर में हेरफेर, मेरिट अंकों से जुड़े डेटा में बदलाव, ओएसएम, मेंस परीक्षा के अंकों और इंटरव्यू के लिए कोड जेनरेशन जैसी प्रक्रियाओं में कथित गड़बड़ी की जानकारी होने का दावा किया गया है।

बयान के अनुसार, श्वेता गुप्ता को एसीएफ और एफआरओ के साक्षात्कार तथा 14वीं जेपीएससी परीक्षा के संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी दी गई थी।

रामवीर के कथित बयान में यह भी दावा है कि कुछ परीक्षाओं की आंसर-की मूल्यांकन शुरू होने से पहले ही संबंधित कर्मचारियों के साथ साझा की गई थी, ताकि ओएमआर और ओएसएम में कथित मैनिपुलेशन की जा सके।

रामवीर ने जांच में कथित तौर पर बताया कि अभय कुमार तिवारी के माध्यम से दिए गए अभ्यर्थियों के रोल नंबर के आधार पर ओएमआर शीट में खाली छोड़े गए प्रश्नों के उत्तर बाद में सही तरीके से अंकित किए जाते थे। इसके बाद उनके अंक बढ़ाकर चयन कराने का दावा किया गया है।

कथित बयान के अनुसार, एफआरओ की प्रारंभिक परीक्षा के बाद अभय तिवारी, धर्मेंद्र (मुख्य सचिव के आवास का कंप्यूटर आपरेटर) और आनंद ने करीब 15 अभ्यर्थियों की सूची दी थी। इन अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट में सही उत्तर अंकित कर उन्हें सफल कराने की बात कही गई थी।

बदले में चयन होने पर प्रति अभ्यर्थी आठ से दस लाख रुपये तक देने की बात सामने आने का दावा किया गया है। एसीएफ और एफआरओ की मुख्य परीक्षा में भी कथित सेटिंग का आरोप लगाया गया है।

बयान में कहा गया है कि कुछ अभ्यर्थियों से रांची और हजारीबाग के अलग-अलग स्थानों पर लिखित परीक्षा की तैयारी या उत्तर लिखवाने की व्यवस्था कराई गई। अभय तिवारी की ओर से 40 से 50 अभ्यर्थियों के रोल नंबर चयन के लिए दिए जाने और इसके एवज में करीब 1.10 करोड़ रुपये अलग-अलग किस्तों में नकद देने का भी दावा किया गया है।

रांची के हरिओम टावर में फ्लैट लेकर लिखवाए गए थे उत्तर, आईएएस मनीष रंजन का भी लिया है नाम

टीडीपीएल के गिरफ्तार मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने सीआईडी को बताया है कि रांची के हरिओम टावर में फ्लैट लेकर अभ्यर्थियों से उत्तर लिखवाने की व्यवस्था की गई थी।

बयान में आरोप है कि कुछ एजेंट दूसरे राज्यों से लोगों को बुलाकर अभ्यर्थियों से उत्तर लिखवाते थे। जिन अभ्यर्थियों के उत्तर अपेक्षाकृत बेहतर थे, उनके अंक बढ़ाने के लिए कुछ प्रोफेसरों से संपर्क किए जाने का भी दावा किया गया है।

अभय के कथित बयान के अनुसार, एसीएफ और एफआरओ परीक्षा में अपने अभ्यर्थियों की मेंस परीक्षा के उत्तर लिखवाने और अंक बढ़वाने के लिए उसने करीब 40 लाख रुपये दिए थे। सीडीपीओ परीक्षा में भी टीडीपीएल के माध्यम से अभ्यर्थी उपलब्ध कराने और प्रति अभ्यर्थी करीब 10 लाख रुपये का रेट होने का दावा किया गया है।

अभय तिवारी के कथित बयान में टीडीपीएल के रामवीर सिंह और सतपाल सिंह का वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मनीष रंजन के आवास पर आने-जाने का भी उल्लेख है।

बयान के अनुसार, इन्हीं लोगों से उसने कथित तौर पर सुना था कि 14वीं जेपीएससी में मनीष रंजन के तीन अभ्यर्थियों की मदद कराई गई थी। हालांकि, उसने उन अभ्यर्थियों के नाम जानने से इनकार किया। सीआईडी इस बयान का भी सत्यापन कर रही है।