खास बातें

  • आवेदन मंगाने के दो साल बाद नियुक्ति रद, आगे का अता-पता नहीं
  • मामला हाई स्कूलों में प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति का  
  • जेपीएससी में जमा हैं शुल्क के रूप में लिए गए लाखों रुपये 

रांची, राज्य ब्यूरो। JPSC राज्य के हाई स्कूलों में प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति के लिए नियमावली बनाने में लगभग चार साल लग गए। इस बीच प्रस्तावित नियमावली की फाइल एक विभाग से दूसरे विभाग में घूमती रही। दूसरे विभागों में स्वीकृति के लिए फाइल महीनों डंप भी रही। किसी तरह नियमावली बनी भी तो नियुक्ति प्रक्रिया दो साल तक झारखंड लोक सेवा आयोग में लटकी रही। आखिर में यह परीक्षा ही रद कर दी गई। आगे यह नियुक्ति हो पाएगी या नहीं इसका कोई अता-पता नहीं है। 

काफी जद्दोजहद के बाद नियमावली बनने के बाद स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने जेपीएससी को सितंबर 2016 में ही प्रधानाध्यापकों के 668 पदों पर नियुक्ति के लिए अनुशंसा भेजी थी। आयोग ने इस आलोक में जुलाई 2017 में नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करते हुए आवेदन मंगाए, लेकिन दो साल में नियुक्ति परीक्षा नहीं हो सकी। अंतत: जेपीएससी ने पिछले साल तीन अक्टूबर को अपरिहार्य कारण बताते हुए इस परीक्षा को रद कर दिया। अब यह नियुक्ति प्रक्रिया दोबारा कब शुरू होगी, इसे लेकर अभ्यर्थियों में संशय की स्थिति है।

बताया जाता है कि नियुक्ति नियमावली में कुछ त्रुटि है, जिसमें संशोधन होना है। इसके बाद ही नए सिरे से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो पाएगी। दूसरी तरफ, बेरोजगार हजारों अभ्यर्थियों से परीक्षा शुल्क के रूप में वसूली गई लाखों रुपये की राशि जेपीएससी में पड़ी हुई है। इस परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों से 600-600 (अनुसूचित जाति व जनजाति 150 रुपये) रुपये वसूले गए थे। 

प्रमोशन से भी नहीं भरे गए पद 

हाई स्कूलों में 668 प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति जेपीएससी से होनी थी। दूसरी तरफ, इतने ही पद स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों के प्रमोशन से भरे जाने थे। प्रमोशन नहीं मिलने से ये पद भी रिक्त हैं। इस तरह, कुल 1,336 हाई स्कूलों में प्रधानाध्यापकों के पद रिक्त हैं। उम्मीद है कि नई सरकार का ध्यान इस ओर जाएगा और नियुक्ति प्रक्रिया भी पूरी होगी तथा प्रमोशन से भी पद भरे जाएंगे। 

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Posted By: Alok Shahi

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