खास बातें

  • छठी सिविल सेवा परीक्षा को ले नई सरकार से बड़ी उम्मीद
  • हेमंत सरकार में शुरू हुई थी परीक्षा प्रक्रिया, बदला था पैटर्न
  • बाद में रघुवर सरकार ने भी बदल दिया था परीक्षा का पैटर्न
  • तीन-तीन बार निकला प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम 

रांची, राज्य ब्यूरो। JPSC 6th Result झारखंड लोक सेवा आयोग की छठी सिविल सेवा परीक्षा वर्ष 2014 में तत्कालीन हेमंत सरकार के कार्यकाल में ही शुरू हुई थी। इसके बाद रघुवर दास की सरकार पांच साल का कार्यकाल पूरा कर बदल भी गई। लेकिन यह परीक्षा आज तक पूरी नहीं हो पाई है। झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद अबतक यह लंबित है। अब नई सरकार से इस परीक्षा को पूरा कराने तथा अगली संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा शुरू कराने को लेकर अभ्यर्थियों को बड़ी उम्मीद है। नई सरकार के समक्ष यह चुनौती भी है।

तत्कालीन हेमंत सोरेन सरकार ने पूर्व मुख्य सचिव वीएस दूबे की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय कमेटी की अनुशंसा पर सिविल सेवा परीक्षा का पूरा पैटर्न ही बदल दिया था। इस आलोक में आवेदन भी मंगा लिए गए गए थे। बाद में रघुवर दास के नेतृत्व वाली सरकार ने इसमें विवाद होने के बाद इस परीक्षा को रद करते हुए फिर से पैटर्न बदल दिया। साथ ही नए सिरे से संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा की प्रक्रिया वर्ष 2015-16 में शुरू हुई। इसकी प्रारंभिक परीक्षा भी लगातार विवादित रही और इस कारण जेपीएससी को इसके परिणाम में तीन-तीन बार संशोधन करने पड़े।

23 फरवरी 2017 को सबसे पहले जारी परिणाम में 5,138 अभ्यर्थी सफल हुए थे। झारखंड हाई कोर्ट के निर्देश 11 अगस्त 2017 को संशोधित परिणाम जारी किया गया। इसमें 965 अभ्यर्थी अधिक अर्थात कुल 6,103 अभ्यर्थी सफल हुए। इसमें भी विवाद होने पर राज्य सरकार ने प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण करने के लिए न्यूनतम अंक निर्धारित कर 34 हजार अभ्यर्थियों को पास कर दिया। इस परिणाम के आधार पर मुख्य परीक्षा भी आयोजित हो गई।

कोर्ट के आदेश के बाद है लंबित

बाद में यह मामला भी कोर्ट में जाने के बाद झारखंड हाईकोर्ट ने इसी साल 21 अक्टूबर को अदालत के आदेश पर जारी संशोधित परिणाम के अनुसार ही उतने ही अभ्यर्थियों के मुख्य परीक्षा का परिणाम जारी करने का आदेश दिया है। कोर्ट के ताजा आदेश के बाद राज्य सरकार और जेपीएससी की परेशानी बढ़ गई। कोर्ट के आदेश के आधार पर ही मुख्य परीक्षा का परिणाम जारी किया जाए या इस आदेश को चुनौती दी जाए, इसपर निर्णय नहीं लिया जा सका है। इधर, बताया जाता है कि वैसे अभ्यर्थी जो हाईकोर्ट के आदेश से प्रभावित हो रहे हैं, उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

Posted By: Alok Shahi

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