रांची, प्रदीप सिंह। झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता पार्टी के कारण बताओ नोटिस को गंभीरता से नहीं लेते। यही वजह है कि पिछले साल पाकुड़ में नौ दिसंबर को चुंबन प्रतियोगिता कराकर विवादों में आए लिट्टीपाड़ा के विधायक साइमन मरांडी इस बार भी यह आयोजन कराने पर आमदा हैं। उन्होंने बकायदे 15 दिसंबर को चुंबन प्रतियोगिता कराने की घोषणा की है और इसे 'दुलार-चो' का नाम दिया है।

हालांकि झारखंड मुक्ति मोर्चा उनके आयोजन से इत्तफाक नहीं रखता, लिहाजा पार्टी ने फजीहत से बचने के लिए पिछले साल उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर लिखित जवाब मांगा था जिसकी अनदेखी उन्होंने की। पार्टी के वरीय नेताओं के मुताबिक उन्होंने मौखिक तौर पर शीर्ष नेतृत्व के समक्ष अपनी बात रखी थी।

चुंबन प्रतियोगिता कराने की वजह से साइमन मरांडी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों और सामाजिक संगठनों के निशाने पर भी आए थे। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान भी विधायकों ने उनपर खूब तंज कसा था। वैसे साइमन इसे आदिवासी परंपरा बताते हैं और आज भी अपने तर्क पर अड़े हुए हैं।

सरकार लगा सकती है आयोजन पर रोक : साइमन मरांडी की घोषणा का बड़े पैमाने पर विरोध हो रहा है। कई आदिवासी संगठन इसके खिलाफ हैं। ऐसे में आयोजन होने से विधि-व्यवस्था बिगड़ सकती है। मुख्य सचिव को भी तमाम परिस्थितियों से अवगत कराया गया है। संभव है कि सरकार आयोजन पर रोक लगा सकती है। झारखंड आदिवासी सरना विकास समिति ने आयोजन पर रोक लगाने की मांग भी उठाई है। समिति के अध्यक्ष मेधा उरांव इस आयोजन को संवैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन बताते हैं।

कार्रवाई करे झामुमो, अपसंस्कृति नहीं फैलाएं : भाजपा ने चुंबन प्रतियोगिता पर कड़ी आपत्ति जताई है। प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव के मुताबिक साइमन मरांडी ने साफ दिखा दिया है कि वह और उनका दल झारखंड की परंपराओं की धज्जी उड़ाने में लगा हुआ है। उन्होंने साइमन मरांडी को चेतावनी देते हुए कहा कि इस बार भाजपा की सरकार ऐसी प्रतियोगिता का आयोजन किसी भी कीमत पर नहीं होने देगी।

अश्लील प्रतियोगिता के आयोजन की वकालत ऐसे नेताओं की भ्रष्ट मानसिक स्थिति को दर्शाती है। झारखंड मुक्ति मोर्चा का शीर्ष नेतृत्व भी ऐसी प्रतियोगिताओं को गलत नहीं मानता है। ऐसा होता तो साइमन मरांडी के खिलाफ पार्टी कार्रवाई करती। झामुमो झारखंड को रोम और लंदन नहीं बनाए। यहां पाश्यात्य संस्कृति लागू नहीं हो सकती।  

Posted By: Alok Shahi