राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड में विपक्षी महागठबंधन के कुनबे में सीटों के तालमेल को लेकर खटास बढ़ सकती है। मुख्य विपक्षी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने विधानसभा की कुल 81 सीटों में से 45 पर अपना दावा ठोकने की तैयारी की है। शेष बची 36 सीटों में से 25 सीटों पर कांग्रेस की दावेदारी होगी। बाकी बची 11 सीटों में से राष्ट्रीय जनता दल (राजद), झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) और वामदलों का हिस्सा होगा। फिलहाल झामुमो इसी फार्मूले के साथ आगे बढ़ रहा है, जिसमें टकराव होना लाजिमी है।

कांग्रेस एकबारगी मान जाए लेकिन अन्य विपक्षी दल सीटों के बंटवारे के इस गणित में साथ आएंगे, यह मुश्किल दिखाई देता है। झामुमो ने सीटों के बंटवारे का यह फार्मूला वर्तमान विधानसभा में विपक्षी दलों की हैसियत के हिसाब से तय किया है। वर्तमान विधानसभा में विपक्षी दलों की स्थिति की बात करें तो झामुमो के सर्वाधिक 19 विधायक हैं, वहीं कांग्रेस के सात। झाविमो के छह विधायक भाजपा के पाले में जाने से उनकी हैसियत महज दो विधायकों की ही रह गई है।

वहीं, वामदलों के कुल दो विधायक ही हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में राजद का खाता तक नहीं खुला था। वर्तमान राजनीतिक तस्वीर के हिसाब से झामुमो के सीटों के बंटवारे का फार्मूला ठीक ही दिखाई देता है। कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों को उनकी वर्तमान हैसियत से तीन गुना से अधिक सीटें देने की पेशकश की गई है। लेकिन झामुमो का यह फार्मूला विपक्षी दलों को रास आएगा, इससे संशय है।

छिटक सकते हैं बाबूलाल मरांडी

बाबूलाल मरांडी की झारखंड विकास मोर्चा सीटों के बंटवारे के इस फार्मूले से छिटक सकती है। पिछले चुनाव में झाविमो ने अपने बूते आठ सीटों पर जीत हासिल की थी। महागठबंधन में राजद अपनी हैसियत को लेकर सवाल उठा सकता है। वामदलों की स्थिति भी इससे इतर नहीं है। कांग्रेस के निर्णय दिल्ली में आलाकमान के स्तर से लिए जाते हैं, लिहाजा वह अभी अपने पत्ते नहीं खोलेगी।

संभव है कि लोकसभा में अधिक सीटों के एवज में वह झामुमो के फार्मूले पर राजी हो जाए। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और झामुमो के गठबंधन के तहत जो फार्मूला तय हुआ था, उसमें तीन चौथाई पर कांग्रेस और एक तिहाई पर झामुमो ने अपने उम्मीदवार उतारे थे। झामुमो दो सीटे जीतने में कामयाब रहा था, जबकि कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला था।

 

By Sachin Mishra