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झारखंड की बेटी ने गांव से निकलकर अमेरिका में लहराया परचम, 4 साल में पूरी की PhD; मास्टर्स में यूनिवर्सिटी टॉपर 

Published: Mon, 28 Sep 2026 08:07 AM (IST)

बोकारो के कुम्हारडीह गांव की श्वेताश्री ने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनायस अर्बाना से मात्र चार वर्षों में पीएचडी की डिग्री हासिल कर झारखंड का नाम रोशन किया है।

डिग्री के साथ श्वेताश्री। फोटो जागरण

डिग्री के साथ श्वेताश्री। फोटो जागरण

HighLights

  1. बोकारो के कुम्हारडीह गांव की श्वेताश्री ने अमेरिका से पीएचडी की।

  2. चार वर्षों में पीएचडी पूरी, मास्टर्स में यूनिवर्सिटी टॉपर।

  3. कैंसर मुक्त भारत के लिए सस्ती दवाएं बनाने का लक्ष्य।

जागरण संवाददाता, रांची। कभी जिस गांव में बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं थीं, आज उसी गांव की बेटी ने अमेरिका की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री हासिल कर झारखंड का नाम अंतरराष्ट्रीय विज्ञानी मंच पर रोशन कर दिया है।

बोकारो जिले के छोटे से गांव कुम्हारडीह की रहने वाली श्वेताश्री ने 17 मई को अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनायस अर्बाना से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। उनकी उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है।

श्वेताश्री, भगवान बिरसा जैविक उद्यान के पशु चिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश साहू और लीलावती साहू की पुत्री हैं। वह अपने गांव ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और आसपास के क्षेत्र की पहली बेटी हैं, जिन्होंने डॉक्टरेट जैसी सर्वोच्च शैक्षणिक उपलब्धि हासिल की है।

श्वेताश्री ने मात्र चार वर्षों में पीएचडी पूरी कर अपनी प्रतिभा और मेहनत का परिचय दिया। उनका शोध विषय मालिक्यूलर मैकेजिज्म ऑफ KRAS4B सिग्नलिंग रहा, जिसमें कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जुड़े कोशिकीय संकेतों पर गहन अध्ययन किया गया।

उनके शोध-निर्देशक प्रो. स्लाइगर यूनिवर्सिटी विज्ञानी माने जाते हैं और अमेरिका की नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज से भी जुड़े रहे हैं।

शिक्षा के लिए गांव छोड़ रांची आ बसे माता-पिता 

श्वेताश्री का बचपन बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता। गांव में लंबे समय तक बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं थीं, लेकिन शिक्षा के प्रति परिवार की जागरूक सोच ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।

बच्चों की बेहतर पढ़ाई के लिए उनके माता-पिता गांव छोड़कर रांची के बूटी मोड़ क्षेत्र में आकर बस गए। श्वेताश्री की प्रारंभिक शिक्षा सुरेंद्रनाथ सेंटेनरी स्कूल, बूटी मोड़ से हुई।

बचपन से ही वह पढ़ाई में मेधावी रहीं। उनकी दादी शकुंतला देवी पंचायत स्तर पर कन्या विद्यालय चलाती थीं और उन्होंने बचपन से ही श्वेताश्री को शिक्षा का महत्व समझाया। दादा दुर्गा प्रसाद साह ने भी हमेशा उन्हें बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया।

बीआइटी मेसरा से गोल्ड मेडल, अमेरिका में बनी यूनिवर्सिटी टॉपर

प्रारंभिक शिक्षा के बाद श्वेताश्री ने बीआइटी मेसरा से बायोटेक्नोलाजी में स्नातक कर गोल्ड मेडल हासिल किया।

इसके बाद छात्रवृत्ति मिलने पर उन्होंने टेक्सास एएंडएम यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री प्राप्त की, जहां वह यूनिवर्सिटी टॉपर रहीं। बाद में उन्होंने शिकागो में शोध कार्य शुरू किया और फिर पीएचडी पूरी कर नई उपलब्धि हासिल की।

श्वेताश्री के परिवार में शिक्षा का माहौल इस कदर मजबूत है कि उनके भाई अमन प्रकाश ने भी आइआइटी दिल्ली से पढ़ाई की है और उनका चयन भी अमेरिका में पीएचडी के लिए हो चुका है। परिवार की इस उपलब्धि को लोग गांव और समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण मान रहे हैं।

आज जिस गांव में कभी बेटियों की उच्च शिक्षा को सपना माना जाता था, वहां अब बच्चे श्वेता की कहानी सुनकर बड़े लक्ष्य तय कर रहे हैं। ग्रामीण गर्व से कहते हैं, कुम्हारडीह की बिटिया अब दुनिया के विज्ञानी मंच पर झारखंड का नाम रोशन कर रही हैं।

अपनी सफलता का श्रेय श्वेता अपने माता-पिता को देती हैं। उनके पिता डा. ओम प्रकाश साहू हमेशा कहा करते थे, जब बेटियां आगे बढ़ती हैं तो पूरा समाज आगे बढ़ता है। यही सोच श्वेता की सबसे बड़ी प्रेरणा बनी। भविष्य को लेकर भी श्वेता का सपना बड़ा है।

वह फार्मास्यूटिकल उद्योग में काम कर कैंसर की सस्ती और सुलभ दवाएं विकसित करना चाहती हैं। उनका लक्ष्य कैंसर मुक्त भारत का निर्माण है, जहां इलाज किसी परिवार पर आर्थिक बोझ न बने।

श्वेताश्री मानती हैं कि विज्ञान का असली उद्देश्य केवल शोधपत्र प्रकाशित करना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक राहत पहुंचाना है।

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