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दुनिया ढूंढ रही तांबा, झारखंड की धरती ने उगला खजाना; जानिए कैसे गिरिडीह बनेगा Copper Hub

By Ashwini RaghuvanshiEdited By: Sanjeev Kumar
Published: Tue, 29 Sep 2026 06:00 AM (IST)

झारखंड के गिरिडीह जिले में उच्च कोटि के तांबे का अकूत भंडार मिला है, जिसकी पुष्टि MECL और राज्य सरकार ...और पढ़ें

बरगंडा क्षेत्र में लगभग एक वर्ग किलोमीटर की परिधि में तांबा अयस्क का विस्तृत भंडार मौजूद है।

बरगंडा क्षेत्र में लगभग एक वर्ग किलोमीटर की परिधि में तांबा अयस्क का विस्तृत भंडार मौजूद है।

HighLights

  1. गिरिडीह के बरगंडा क्षेत्र में मिला उच्च कोटि का तांबा अयस्क।

  2. MECL और राज्य सरकार ने की लगभग एक वर्ग किमी भंडार की पुष्टि।

  3. वैश्विक मांग और बढ़ती कीमतों के बीच झारखंड के लिए बड़ी उपलब्धि।

अश्विनी रघुवंशी, रांची । झारखंड में तांबे का एक और अकूत खजाना मिला है। राज्य के गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड अंतर्गत बरगंडा, परसाबेड़ा, कोलुवा और अंबाडीह गांव की धरा के नीचे उच्च कोटि का तांबा अयस्क पाया गया है। 
 
झारखंड सरकार के भूतत्व सर्वे और भारत सरकार के उपक्रम MECL (खनिज अन्वेषण निगम लिमिटेड) द्वारा की गई गहन खोज के बाद यह पुष्टि हुई है कि बरगंडा क्षेत्र में लगभग एक वर्ग किलोमीटर की परिधि में तांबा अयस्क का विस्तृत भंडार मौजूद है। 
 

2018 में शुरू हुई थी तांबे की तलाश 

MECL ने अपनी अंतिम सर्वे रिपोर्ट राज्य सरकार के भूतत्व विभाग को सौंप दी है। गिरिडीह के बरगंडा में तांबे की मौजूदगी का अंदाजा काफी समय से था। 
 
वर्ष 2018 में भूतत्व विभाग ने इस क्षेत्र में वैज्ञानिक छानबीन शुरू की थी। शुरुआती चरण में धरती की सतह से लिए गए नमूनों का हजारीबाग स्थित प्रयोगशाला में परीक्षण किया गया, जिसमें तांबा (कॉपर), जस्ता (जिंक) और सीसा (लेड) के अंश पाए गए।
 
इसके बाद छोटानागपुर क्षेत्र के उप निदेशक कुणाल कौशल के नेतृत्व में विस्तृत खोज शुरू की गई। तीन अलग-अलग स्थानों पर गहराई तक ड्रिलिंग (छेद) करके नमूने निकाले गए, तो वहां उच्च गुणवत्ता वाला तांबा अयस्क मिला। 
 
इसके बाद आगे के बड़े पैमाने के अन्वेषण का काम MECL को सौंपा गया था, जिसने अब अपनी प्रक्रिया पूरी कर ली है।
 

ब्रिटिश काल से जुड़ा है इतिहास 

भारत में आजादी से पूर्व वर्ष 1923 में ब्रिटिश हुकूमत ने पूर्वी सिंहभूम के मुसाबनी में तांबा खदान की खोज की थी, जहां आज भी हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) द्वारा खनन और प्रसंस्करण किया जा रहा है। 
 
अंग्रेजों ने उसी दौरान गिरिडीह के बरगंडा में भी सर्वे शुरू कराया था, लेकिन वह काम अधूरा रह गया था। वर्तमान में देश में मुसाबनी के अलावा केवल मध्य प्रदेश के बालाघाट और राजस्थान के खेतड़ी में ही तांबे की प्रमुख खदानें संचालित हैं। 
 
इस लिहाज से गिरिडीह में कॉपर रिजर्व का मिलना झारखंड और पूरे देश के लिए एक बड़ी आर्थिक उपलब्धि माना जा रहा है।
 

AI डेटा सेंटर और EV की वजह से बढ़ी तांबे की वैश्विक मांग 

वर्तमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटर्स और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के निर्माण के कारण दुनिया भर में तांबे की मांग में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। 
 
विशेषज्ञ संस्थाओं के अनुसार, एक उन्नत AI डेटा सेंटर के निर्माण में लगभग 50,000 टन तांबे की आवश्यकता होती है। भारी बिजली आपूर्ति, मोटे केबल और कूलिंग सिस्टम (शीत यंत्रों) में तांबे का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है।
 
वैश्विक मांग के कारण पिछले तीन वर्षों में तांबे की कीमतों में करीब 75 प्रतिशत का उछाल आया है। अक्टूबर 2023 में जिस तांबे की कीमत 1 लाख रुपये थी, वह बढ़कर करीब 1.75 लाख रुपये हो चुकी है। 
 
वर्तमान में भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में तांबे का भाव लगभग 1,400 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर है। ऐसे में गिरिडीह खदान में जल्द माइनिंग शुरू होना झारखंड के राजस्व और रोजगार दोनों के लिए मील का पत्थर साबित होगा। 
 

गिरिडीह के बरगंडा में ताम्र अयस्क की खोज का काम पूरा हो चुका है और सर्वे रिपोर्ट विभाग को मिल गई है। अब इस रिपोर्ट का विस्तृत अध्ययन कर आगे की कार्ययोजना और नीलामी/संचालन की प्रक्रिया पर विचार किया जाएगा।

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कुमार अमिताभ, निदेशक (भूतत्व), झारखंड सरकार