किसानों के लिए झारखंड में प्रखंड स्तर पर बनेंगे कस्टम हायरिंग सेंटर और थ्रेसिंग फ्लोर, बड़े ट्रैक्टरों पर सब्सिडी बढ़ेगी
झारखंड कृषि विभाग किसानों को महंगे कृषि यंत्रों से राहत देने के लिए प्रखंड स्तर पर कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित ...और पढ़ें

गांवों में सामूहिक पक्के थ्रेसिंग फ्लोर बनाने का विचार।
HighLights
प्रखंड स्तर पर कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित होंगे।
गांवों में सामूहिक पक्के थ्रेसिंग फ्लोर बनेंगे।
बड़े ट्रैक्टरों पर सब्सिडी बढ़ाने पर विचार।
राज्य ब्यूरो, रांची। कृषि विभाग किसानों को महंगे कृषि यंत्र खरीदने की मजबूरी से राहत दिलाने के उद्देश्य से प्रखंड स्तर पर कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा। इन केंद्रों पर खेती-किसानी से जुड़े विभिन्न कृषि यंत्र उपलब्ध रहेंगे, जिनका उपयोग किसान अपनी जरूरत के अनुसार किराए पर कर सकेंगे।
इससे विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को लाभ मिलेगा और कृषि कार्यों में आधुनिक मशीनों का उपयोग बढ़ाने में मदद मिलेगी। गांवों में सामूहिक एवं सार्वजनिक उपयोग के लिए पक्के थ्रेसिंग फ्लोर का निर्माण कराया जाएगा। कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने विभाग को इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को धान की मिसाई, गेहूं की मड़ाई तथा मड़ुवा की कुटाई जैसे कार्यों के लिए समतल और उपयुक्त स्थान उपलब्ध नहीं हो पाता है। इसके कारण उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
सामूहिक पक्के थ्रेसिंग फ्लोर बनने से किसान सुविधाजनक तरीके से इन कार्यों को कर सकेंगे। इससे समय और श्रम की बचत होगी और गांव के किसानों को एक साझा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
बड़े ट्रैक्टरों पर सब्सिडी बढ़ाने पर विचार
विभाग की ओर से वितरित किए जाने वाले बड़े ट्रैक्टरों पर मिलने वाली सब्सिडी बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा की गई। वर्तमान में सरकार की ओर से 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। किसानों की जरूरतों और कृषि कार्यों में मशीनीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस सहायता को बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया गया।
कृषि मंत्री ने भूमि संरक्षण निदेशालय के सभी अधिकारियों के लिए वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर जारी करने का निर्देश दिया। इसका उद्देश्य अधिकारियों की तकनीकी दक्षता बढ़ाना, नई तकनीकों एवं कार्यप्रणालियों से उन्हें अवगत कराना तथा विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि विभागीय योजनाओं का वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए आवश्यक है कि योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि किसानों की जमीनी जरूरतों को ध्यान में रखकर उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने विभागीय अधिकारियों से प्राप्त सुझावों के आधार पर सुधारात्मक पहल करने और किसानों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
