झारखंड की सभी विधानसभाओं में बनेंगे कोल्ड स्टोरेज-कम-मार्केटिंग सेंटर, बच्चों को मिड-डे मील में मिलेगा रागी
कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने घोषणा की कि झारखंड के हर विधानसभा क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज-कम-मार्केटिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे।

कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की। (सोशल मीडिया)
HighLights
हर विधानसभा में कोल्ड स्टोरेज-कम-मार्केटिंग सेंटर स्थापित होंगे।
सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलेगा रागी का पौष्टिक आहार।
लाह पोषक समृद्धि योजना से किसानों की आय बढ़ेगी।
राज्य ब्यूरो, रांची। कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने शुक्रवार को एक बैठक में कहा कि चालू वित्तीय वर्ष के बजट में सरकार हर विधानसभा क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज-कम-मार्केटिंग सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई है।
इसके लिए डीपीआर तैयार कराने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन अब तक प्राप्त डीपीआर से विभाग पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। उन्होंने विभाग को निर्देश दिया कि देशभर में बेहतर लाजिस्टिक एवं कोल्ड-चेन सिस्टम विकसित करने वाली अग्रणी कंपनियों को भी कंसल्टेंसी के लिए आमंत्रित किया जाए और उनके तकनीकी सुझाव लिए जाएं, ताकि परियोजना को भविष्य की जरूरतों और आधुनिक तकनीक के अनुरूप तैयार किया जा सके।
मंत्री ने कहा कि राज्य के लगभग 20 जिलों में 5,000 मीट्रिक टन क्षमता वाले कोल्ड स्टोरेज बनाए गए हैं, लेकिन कई स्थानों पर तकनीकी रूप से पर्याप्त सक्षम नहीं होने के कारण उनके संचालन में एफपीओ, सहकारी समितियों अथवा थर्ड पार्टी आपरेटरों को विभिन्न कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
सरकारी स्कूलों के बच्चों को मिलेगा रागी का पौष्टिक आहार
बैठक में सिद्धकोफेड द्वारा प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत सरकारी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन के लिए रागी (मड़ुवा) के आटे की आपूर्ति से संबंधित प्रस्ताव की भी समीक्षा की गई।
फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तहत रांची, खूंटी और सरायकेला-खरसावां जिलों को शामिल किया गया है। इस संबंध में शिक्षा विभाग के साथ आवश्यक पत्राचार किया गया है।
मंत्री ने कहा कि यह पहल दोहरे उद्देश्य को पूरा करेगी, एक ओर स्थानीय किसानों के उत्पाद मड़ुवा को सुनिश्चित बाजार मिलेगा, वहीं दूसरी ओर स्कूली बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
लाह पोषक समृद्धि योजना से किसानों को मिलेगा नया आधार
बैठक में झास्कोलैम्प्स द्वारा प्रस्तावित लाह पोषक समृद्धि योजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इस योजना के तहत लाभुकों को लाह उत्पादन के लिए उपयोगी पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे।
योजना में 400 सीमियालता के पौधे, पांच कुसुम, पांच बेर तथा 20 कैलियेंड्रा या कैलोथायरस के पौधे दिए जाने का प्रविधान है। ये सभी पौधे लाह उत्पादन के लिए उपयोगी एवं पोषक वृक्ष हैं।
योजना के तहत लगभग 20 डिसमिल भूमि पर एकीकृत खेती को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे किसान लाह उत्पादन के साथ अन्य कृषि गतिविधियों को भी जोड़कर अपनी आय के स्रोतों को मजबूत कर सकेंगे।
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