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झारखंड हाईस्कूल टीचर नियुक्ति मामले में सुनवाई पूरी, आदेश रखा सुरक्षित

Published: Sun, 25 Oct 2026 11:55 PM (IST)Updated: Sun, 25 Oct 2026 11:56 PM (IST)

झारखंड हाई कोर्ट द्वारा गठित वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्ति प्रतियोगिता परीक्षा-2016 मामले में सुनवाई ...और पढ़ें

झारखंड हाई कोर्ट। (फाइल फोटो)

झारखंड हाई कोर्ट। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. कमेटी ने 2016 शिक्षक नियुक्ति मामले में सुनवाई पूरी की।

  2. जस्टिस गौतम चौधरी की कमेटी ने आदेश सुरक्षित रखा।

  3. जेएसएससी मेरिट लिस्ट में अनियमितताओं की जांच जारी।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की अध्यक्षता वाली वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्ति प्रतियोगिता परीक्षा-2016 से जुड़े मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।

सुनवाई के दौरान झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) और राज्य सरकार की ओर से कुछ आपत्तियों पर जवाब दाखिल नहीं किए जाने पर कमेटी ने असंतोष जताया।

वहीं, प्रार्थियों की ओर से कमेटी द्वारा मांगे गए आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। कमेटी ने उन प्रार्थियों से कोटिवार और विषयवार अंकों का विवरण निर्धारित प्रारूप में मांगा था, जिन्होंने दो अगस्त 2022 के बाद नियुक्त अभ्यर्थियों से अधिक अंक प्राप्त किए हैं।

झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने मीना कुमारी एवं अन्य की ओर से दायर 257 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी को तीन महीने के भीतर जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।

निर्धारित समय सीमा में जांच रिपोर्ट पेश नहीं होने के बाद अदालत ने रिपोर्ट सौंपने की समय सीमा तीन महीने के लिए और बढ़ा दी थी।

मेरिट लिस्ट को लेकर उठे हैं सवाल

हाई कोर्ट के आदेश पर गठित कमेटी हाई स्कूल शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच कर रही है। वर्ष 2016 में जेएसएससी ने स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की थी।

इसके तहत कुल 17,786 शिक्षकों की नियुक्ति होनी थी, लेकिन अब तक लगभग 10 हजार पदों पर ही नियुक्ति हुई है। शेष पद रिक्त हैं।

नियुक्ति प्रक्रिया में जिला स्तर और राज्य स्तर पर अलग-अलग मेरिट लिस्ट तैयार किए जाने को लेकर अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए हैं।

उनका कहना है कि एक ही प्रतियोगिता परीक्षा के लिए दो तरह की मेरिट लिस्ट अपनाने के कारण कई योग्य अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित रह गए। इन्हीं बिंदुओं समेत नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच कमेटी कर रही है।

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