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राज्य के लिए खेलें या एग्जाम दें? झारखंड में 9 अक्टूबर को 10वीं की परीक्षा और राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता दोनों

Published: Thu, 01 Oct 2026 09:30 AM (IST)

झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के दो आदेशों के कारण 9 अक्टूबर को दसवीं के छात्रों को सामाजिक विज्ञान की परीक्षा ...और पढ़ें

शिक्षा परियोजना परिषद के दो आदेशों ने विद्यार्थियों को दोराहे पर खड़ा किया।

शिक्षा परियोजना परिषद के दो आदेशों ने विद्यार्थियों को दोराहे पर खड़ा किया।

HighLights

  1. 9 अक्टूबर को दसवीं की परीक्षा और राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता।

  2. छात्रों को परीक्षा या खेल में से एक चुनना होगा।

  3. अभिभावकों ने तिथि समन्वय की कमी पर चिंता जताई।

जागरण संवाददाता, रांची। जिस दिन दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों को परीक्षा कक्ष में बैठकर सामाजिक विज्ञान के प्रश्नों के उत्तर लिखने हैं, उसी दिन राज्य के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को रांची के खेल मैदान में अपने हुनर का प्रदर्शन करना है। एक ओर परीक्षा की तैयारी, दूसरी ओर राज्य का प्रतिनिधित्व करने का अवसर। एक ही तारीख ने बच्चों के सामने ऐसा धर्मसंकट खड़ा कर दिया है, जिसमें किसी एक अवसर को चुनना ही पड़ेगा।

झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन के हस्ताक्षर से जारी पत्रांक एसओई/16/06/2024/3814, दिनांक 29 सितंबर 2026 के अनुसार राज्य के 80 उत्कृष्ट मुख्यमंत्री विद्यालयों में कक्षा नौवीं से 12वीं तक की स्थगित प्रथम सत्रीय परीक्षा की नई तिथि निर्धारित की गई है। इसके तहत 9 अक्टूबर को दसवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की परीक्षा होगी।

दूसरी ओर, इसी परिषद के प्रशासकीय पदाधिकारी मनोज कुमार के हस्ताक्षर से जारी संशोधित आदेश के अनुसार खेला झारखंड 2026-27 की राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं भी 9 अक्टूबर से शुरू हो रही हैं। 17 वर्ष से कम आयु वर्ग के बालकों की वालीबाल प्रतियोगिता 9 और 10 अक्टूबर को रांची के हरिवंश ताना भगत इंडोर स्टेडियम तथा फुटबाल प्रतियोगिता 9 और 10 अक्टूबर को खेलगांव स्थित बिरसा मुंडा एथलेटिक्स स्टेडियम में होगी।

यहीं से बच्चों की परेशानी शुरू होती है। 17 वर्ष से कम आयु वर्ग में बड़ी संख्या में दसवीं कक्षा के विद्यार्थी शामिल होते हैं। ऐसे में जिन विद्यार्थियों का चयन राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए हुआ है, उनके सामने 9 अक्टूबर को दो जगहों पर मौजूद रहने की चुनौती होगी।

परीक्षा केंद्र जाएं तो राज्य स्तरीय मुकाबला छूटेगा और खेल मैदान पहुंचें तो परीक्षा छूट जाएगी। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता किसी सामान्य विद्यालयी खेल आयोजन जैसी नहीं होती। इसके लिए विद्यार्थी महीनों अभ्यास करते हैं और चयन की कई सीढ़ियां पार कर राज्य स्तर तक पहुंचते हैं। दूसरी ओर परीक्षा भी उनकी शैक्षणिक प्रगति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

ऐसे में दोनों कार्यक्रमों की तिथि एक होने से विद्यार्थियों के सामने किसी एक अवसर की कुर्बानी देने की स्थिति बन गई है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को इस तरह के धर्मसंकट में डालने की आवश्यकता ही क्यों पड़ी।

दोनों कार्यक्रम शिक्षा विभाग से जुड़े हैं। दोनों की तिथियां विभागीय स्तर पर निर्धारित की गई हैं। तो आदेश जारी करने से पहले आपसी समन्वय क्यों नहीं किया गया। बच्चों के सामने खड़ा यह संकट उनकी गलती से नहीं, दो सरकारी आदेशों की एक ही तारीख पड़ने से पैदा हुआ है।

अब अभिभावकों और विद्यार्थियों की निगाह शिक्षा परियोजना परिषद पर है कि वह तत्काल हस्तक्षेप कर किसी एक कार्यक्रम की तिथि में परिवर्तन करे ताकि पढ़ाई और खेल दोनों क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे बच्चों को किसी एक अवसर से वंचित न होना पड़े।