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झारखंड में आदिवासियों को मछली पालन से मिलेगा आर्थिक संबल, 90% अनुदान से बदल रही तस्वीर

Published: Thu, 25 Jun 2026 09:10 AM (IST)

झारखंड में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत आदिवासियों को मछली पालन के लिए 90% अनुदान मिल रहा ...और पढ़ें

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HighLights

  1. आदिवासियों को मछली पालन पर 90% अनुदान मिल रहा है।

  2. धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत योजना।

  3. योजना से आर्थिक सशक्तिकरण और रोजगार के अवसर।

मनोज सिंह, रांची। राज्य के आदिवासियों को रोजगार देकर आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार के सहयोग से धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत राज्य के आदिवासी बाहुल क्षेत्र के अनुसूचित जनजाति के लोगों को 90 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है।

यह योजना राज्य के सभी 24 जिलों में पांच साल तक चलेगी। राज्य के 223 ब्लाक के 6882 गांव के लोगों को इस योजना के लाभुकों के लिए चयन किया जा रहा है। पूरे देश में इस योजना के तहत कुल 375 करोड़ रुपये आवंटित की गई है।

पिछले साल झारखंड को छह करोड़ रुपये मिले थे। लेकिन राज्य में इस योजना की सफलता और कुशल क्रियान्वयन के वजह से इस साल 27 करोड़ की राशि मिली है। इसमें केंद्र और सरकार का 60-40 प्रतिशत का योगदान रहेगा।

इस योजना के तहत मछली पालन से जुड़ने वाले अनुसूचित जाति के महिला या पुरुष को 90 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। पहले पीएम किसान मत्स्य संपदा योजना के तहत महिलाओं को ज्यादा अनुदान मिलता था, जबकि पुरुष को कम अनुदान मिलता था।

लाभुकों का चयन करती है केंद्र सरकार

इस योजना के तहत लाभुकों का चयन केंद्र सरकार की ओर से किया जाता है। चयन के बाद उनकी रिपोर्ट मत्स्य विभाग को उपलब्ध कराई जाती है। जिसके बाद मत्स्य विभाग को संबंधित योजना का लाभ दिया जाता है। पिछले साल 195 को लेकर अब तक विभाग की ओर से 237 योजनाओं का लाभ दिया जा चुका है।

इस साल भी 11 प्रकार योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। जिसके तहत अनुसूचित जनजाति के मछली पालक किसान अधिकतम 22.50 लाख रुपये की योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

इसके लिए लाभुक को आपको अपना पहचान पत्र, जाति प्रमाण पत्र, भूमि के कागजात (या पट्टा), और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की आवश्यकता होगी। इस योजना का लाभ उठाने के लिए अपने जिला के मत्स्य पदाधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।

ये हैं 11 प्रकार की योजनाएं

बायोफ्लाक, आइस बाक्स के साथ मोटरसाइकिल, आइस बाक्स के साथ साइकिल, मछली बिक्री के लिए आइस बाक्स के साथ तीन पहिया वाहन, मोती पालन के लिए सुविधा, कार्प हैचरी बनाने का कार्य, नए रियरिंग तालाब का निर्माण (नर्सरी-बीज रियरिंग तालाब), मिश्रित मत्स्य पालन, पंगेशियस एवं तिलापिया पालन, बायोफ्लाक तालाबों का निर्माण (चार लाख प्रति हेक्टेयर), चार मीटर ब्यास एवं एक मीटर उंचाई के लिए 25 टैंक मध्यम बायोफ्लाक टैंक की स्थापना, छोटे आकार के आरएएस (रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम) की स्थापना (100 घन मीटर)।

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राज्य के आदिवासियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए यह योजना चलाई जा रही है। केंद्र सरकार की प्रायोजित इस योजना का लाभ उठाने के लिए जिला मत्स्य पदाधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।

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अमरेंद्र कुमार, निदेशक, मत्स्य विभाग, झारखंड