सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए अच्छी खबर: नए सत्र से कक्षा तीन, चार और नौवीं में लागू होंगी बदली हुई पुस्तकें
झारखंड के सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2027-28 से विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यपुस्तकें मिलेंगी। कक्षा तीन, चार और नौवीं ...और पढ़ें

कार्यादेश मिलने के तीन महीने के भीतर प्रिंटरों को प्रखंड स्तर तक पुस्तकों की आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी
HighLights
2027-28 सत्र से समय पर मिलेंगी सरकारी स्कूल की किताबें।
कक्षा 3, 4 और 9 के लिए नई बदली हुई पुस्तकें होंगी।
टेंडर प्रक्रिया शुरू, दिसंबर तक कार्य आदेश जारी होगा।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अगले शैक्षणिक सत्र 2027-28 में समय पर पाठ्य-पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी।
सत्र शुरू होने से पहले ही छात्रों के हाथों में नई किताबें होंगी। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) ने पुस्तकों के समयबद्ध प्रकाशन और वितरण के लिए प्रिंटरों के चयन के लिए टेंडर प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू कर दी है।
परिषद का लक्ष्य नवंबर माह तक टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह संपन्न करना है। इसके बाद दिसंबर में चयनित प्रिंटरों को कार्य का आदेश जारी कर दिया जाएगा।
कार्यादेश मिलने के तीन महीने के भीतर प्रिंटरों को प्रखंड स्तर तक पुस्तकों की आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी, ताकि सत्र की शुरुआत में ही वितरण का काम पूरा हो सके।
बदली हुई पुस्तकों का होगा प्रकाशन
अगले शैक्षणिक सत्र में कक्षा तीन, चार और नौवीं कक्षा की बदली हुई नई पुस्तकों का प्रकाशन किया जाएगा। झारखंड काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (JCERT) ने तीसरी और चौथी कक्षा की नई पाठ्य-सामग्री तैयार कर ली है।
इससे पहले पिछले वर्ष पहली और दूसरी कक्षा की नई पुस्तकें प्रकाशित की गई थीं, जबकि पांचवीं से आठवीं कक्षा की पुस्तकों में शैक्षणिक सत्र 2028-29 से बदलाव संभावित है।
दूसरी ओर, नौवीं कक्षा के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा तैयार की गई नई संशोधित पुस्तकों का प्रकाशन होगा।
उल्लेखनीय है कि राज्य में नौवीं से 12वीं तक एनसीईआरटी की किताबें चलती हैं, जिसके प्रकाशन के लिए राज्य सरकार रायल्टी का भुगतान करती है।
किस योजना के तहत होता है वितरण?
राज्य सरकार 'समग्र शिक्षा अभियान' के तहत कक्षा एक से आठ तक के सभी बच्चों को नि:शुल्क पुस्तकें उपलब्ध कराती है। इसमें 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार वहन करती है।
वहीं, कक्षा नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए पुस्तकों का संपूर्ण खर्च राज्य सरकार अपने बजट से उठाती है। टेंडर प्रक्रिया शुरू होने से इस बार किताबें समय पर मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
