Jharkhand में घर-घर राशन का दावा, पर सिर्फ 30% राशन कार्ड ही मोबाइल से लिंक; रोजगार के लिए पलायन कर रहे पूरे परिवार
झारखंड में राशन कार्डों का मोबाइल और आधार से लिंकेज बेहद कम है, औसत केवल 30.17% है। रोजगार के लिए ...और पढ़ें

एआई द्वारा जेनरेटेड तस्वीर।
HighLights
रोजगार के लिए पलायन मुख्य बाधा, लाभार्थी नहीं मिल रहे।
रांची शीर्ष पर, पश्चिमी सिंहभूम, देवघर, गुमला सबसे पीछे।
आशीष झा, रांची। एक तरफ जहां सरकार हर घर तक राशन पहुंचाने और डिजिटल इंडिया का दावा करती है, वहीं झारखंड में राशन कार्डधारकों के मोबाइल और आधार लिंकेज की जमीनी हकीकत बेहद दयनीय है।
राज्य में मोबाइल लिंकेज शत-प्रतिशत होना तो दूर, अभी औसत आंकड़ा महज 30.17 प्रतिशत तक ही पहुंच सका है। इस मामले में पश्चिमी सिंहभूम जिले की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है।
अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह आ रही है कि रोजगार की तलाश में हजारों परिवार गांवों से पलायन कर चुके हैं, जिससे जन वितरण प्रणाली (PDS) के दुकानदारों को कार्डधारी मिल ही नहीं रहे हैं।
रोजगार की तलाश में पलायन बना बड़ी बाधा
केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी लगातार इस धीमी रफ्तार के कारणों को जानने में जुटे हैं। प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि पश्चिमी सिंहभूम सहित कई आदिवासी बहुल जिलों से बड़े पैमाने पर लोगों का पलायन हुआ है।
इन ग्रामीण क्षेत्रों में घर काफी दूर-दूर बने हैं और आपसी संपर्क कम होने के कारण यह पता लगाना भी मुश्किल हो रहा है कि कौन सा परिवार कहां गया है।
नाम काटने पर बढ़ेगी मुसीबत
इस विकट स्थिति में सबसे आसान तरीका ऐसे अनुपस्थित लोगों का नाम राशन कार्ड की सूची से काटना है। लेकिन, नियमों के मुताबिक एक बार नाम कटने के बाद दोबारा नाम जोड़ने की प्रक्रिया बेहद जटिल है।
गरीब परिवारों को इस परेशानी से बचाने के लिए विभाग फिलहाल कोई बीच का रास्ता तलाश रहा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सूबे की राजधानी रांची 42.55% मोबाइल सीडिंग के साथ शीर्ष पर है, जबकि देवघर (19.97%) और गुमला (18.55%) जैसे जिलों का प्रदर्शन सबसे निराशाजनक रहा है।
झारखंड में जिलावार मोबाइल सीडिंग की रिपोर्ट
नीचे दी गई तालिका से आप झारखंड के सभी जिलों में राशन कार्ड से मोबाइल लिंकेज की वर्तमान स्थिति को समझ सकते हैं:
जिला मोबाइल सीडिंग जिला मोबाइल सीडिंग
- रांची 42.55% गढ़वा 31.50%
- रामगढ़ 38.73% पलामू 31.22%
- पूर्वी सिंहभूम 38.68% गिरिडीह 30.27%
- हजारीबाग 36.41% सरायकेला 28.43%
- खूंटी 35.35% लातेहार 28.09%
- कोडरमा 33.35% लोहरदगा 27.68%
- बोकारो 33.20% दुमका 26.77%
- चतरा 32.90% सिमडेगा 26.41%
- धनबाद 32.16% पाकुड़ 24.66%
- गोड्डा 21.55% साहिबगंज 22.55%
- पश्चिमी सिंहभूम 21.41% जामताड़ा 21.00%
- देवघर 19.97% गुमला 18.55%
राज्य का कुल औसत: 30.17 प्रतिशत
आगे की राह
विभागीय सूत्रों के अनुसार, जब तक शत-प्रतिशत आधार और मोबाइल लिंकेज [Aadhaar Redacted] नहीं हो जाता, तब तक खाद्यान्न वितरण प्रणाली में पूरी तरह पारदर्शिता लाना मुमकिन नहीं है।
अब देखना यह है कि पलायन कर चुके परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने और उनका डेटा अपडेट करने के लिए खाद्य आपूर्ति विभाग क्या ठोस कदम उठाता है।
